Risk of Hearing Loss on Diwali: दिवाली का त्योहार रोशनी और उल्लास का पर्व है, लेकिन इसके साथ ही पटाखों की तेज और कर्कश आवाज एक गंभीर स्वास्थ्य खतरा भी पैदा करती है। विशेषज्ञों के अनुसार पटाखों की अचानक और अत्यधिक तेज ध्वनि हमारे कानों की सुनने की क्षमता को स्थायी रूप से नुकसान पहुंचा सकती है, जिससे बहरापन का जोखिम बढ़ जाता है।
कान हमारे शरीर का सबसे संवेदनशील अंगों में से एक है, और पटाखों का तेज आवाज सीधे अंदरूनी कान की नाजुक कोशिकाओं को क्षतिग्रस्त करती है। इस तरह के नुकसान को शोर-प्रेरित सुनवाई हानि नॉइज इंड्यूज्ड हियरिंग लास (एनआईएचएल) कहा जाता है। दिवाली के दौरान कुछ पटाखों से निकलने वाली आवाज 140 डेसिबल या उससे भी अधिक हो सकती है, जबकि 85 डेसिबल से अधिक की कोई भी ध्वनि लंबे समय तक सुनना कानों के लिए नुकसानदायक होता है।
यह जोखिम खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए ज्यादा होता है। इसलिए त्योहारों का मजा लेते हुए, कुछ सावधानियां बरतना बहुत जरूरी है। आइए इस लेख में जानते हैं कि पटाखों की तेज आवाज हमारे कानों को कैसे प्रभावित कर सकती है और इससे बचाव के लिए क्या किया जा सकता है।