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Post Covid: कोरोना से ठीक होने के सालभर बाद तक भी देखी जा रही हैं ये चार दिक्कतें, हल्के लक्षण वाले भी परेशान

Sun, 17 Mar 2024 03:58 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के कारण बनी रहने वाली समस्याएं - फोटो : iStock
दुनियाभर में कोरोना संक्रमण के मामले भले ही इन दिनों काफी नियंत्रित हैं, पर स्वास्थ्य विशेषज्ञ संक्रमण के जोखिमों को लेकर सभी लोगों को निरंतर सावधानी बरतते रहने की सलाह दे रहे हैं। अध्ययनकर्ताओं ने बताया, कोरोनावायरस जीवित रहने के लिए लगातार म्यूटेट होता रहता है, यही कारण है कि हर बार नए-नए वैरिएंट्स देखने को मिल रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि हम सभी निरंतर कोरोना से बचाव के उपाय करते रहें। भले ही आपका वैक्सीनेशन हो चुका है, फिर भी नए वैरिएंट्स से संक्रमण का जोखिम हो सकता है। टीके, गंभीर रोगों से जरूर सुरक्षा देते हैं।

कोरोना के वैश्विक जोखिमों के बीच महामारी की शुरुआत से ही लॉन्ग कोविड जिसे पोस्ट कोविड सिंड्रोम के रूप में भी जाना जाता है, विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। शोधकर्ताओं ने बताया है कि कुछ लोगों में पोस्ट कोविड के लक्षण एक साल से अधिक समय तक भी देखे जा रहे हैं। थकान-कमजोरी से लेकर लॉन्ग कोविड के कारण लोगों में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याएं रिपोर्ट की जा रही हैं।

आइए ऐसे ही चार सबसे ज्यादा देखी जा रही समस्याओं के बारे में जानते हैं।
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थकान-कमजोरी की स्थिति - फोटो : istock
थकान-कमजोरी और सांस फूलने की दिक्कत

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में जो दिक्कत सबसे ज्यादा देखी जाती रही है, वह है लंबे समय तक बनी रहने वाली कमजोरी-थकान की समस्या। कुछ लोगों को सांस फूलने की भी दिक्कत हो सकती है। अध्ययनकर्ताओं ने बताया, वृद्ध लोगों और अन्य बीमारियों के शिकार रहे लोगों में पोस्ट-कोविड की ये समस्याएं लंबे समय तक बने रहने की आशंका अधिक हो सकती है।

संक्रमण में वायरस से मुकाबले के दौरान शरीर में माइक्रोन्यूट्रिएंट्स की कमी हो जाती है, जिसके कारण ठीक होने के बाद भी इस तरह  की समस्याएं बनी रह सकती हैं। 
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा और बचाव - फोटो : istock
हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले

क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के अनुसार जिन लोगों में कोविड-19 के हल्के या गंभीर लक्षण रहे हैं, ऐसे बड़ी संख्या में रोगियों में लॉन्ग कोविड की स्थिति में हार्ट से संबंधित दिक्कतें देखी जा रही हैं। कुछ स्थितियों में इसके कारण हार्ट अटैक के केस भी बढ़े हैं।

अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी की एक रिपोर्ट के मुताबिक संक्रमण से ठीक होने के महीनों बाद तक किसी व्यक्ति में हृदय संबंधी समस्याएं बने रहने की आशंका दोगुनी से अधिक पाई गई हैं। 58 लाख लोगों पर किए गए 11 अध्ययनों के मेटा-विश्लेषण में पाया गया है कि कोरोनावायरस ने हृदय को गंभीर क्षति पहुंचाई है, जिससे इसकी कार्यक्षमता में कमी आ गई है। सर्वेक्षणों से पता चलता है कि अमेरिका में लगभग 7 में से 1 व्यक्ति ने लॉन्ग कोविड का अनुभव किया है।

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नींद न आने की समस्या - फोटो : pixabay
बिगड़ गई है लोगों की नींद

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लॉन्ग कोविड का एक और दुष्प्रभाव, संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में नींद की समस्याओं के रूप में देखा जा रहा है। अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया है कि कोविड-19 से पीड़ित लगभग 40% लोग ठीक होने के बाद भी नींद की समस्या की शिकायत करते हैं। इनमें अनिद्रा, दिन में नींद आने, रात में कई बार जागने या सुबह तरोताजा महसूस न करने जैसी दिक्कतें शामिल हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नींद की बनी रहने वाली इस तरह की दिक्कतें न सिर्फ शारीरिक बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
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मस्तिष्क पर कोरोना का असर - फोटो : Pixabay
मस्तिष्क क्षमता पर भी देखा जा रहा है असर

पोस्ट कोविड को लेकर द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन में प्रकाशित शोध में बताया गया है कि कोरोना संक्रमण के हल्के और गंभीर दोनों प्रकार के मामले वाले लोगों में संज्ञानात्मक गिरावट देखी जा रही है। ठीक हो चुके लोगों की बौद्धिक क्षमता में कमी रिपोर्ट की गई है। वहीं जिन लोगों में कोरोना के अधिक गंभीर लक्षण थे उनके आईक्यू में 9-पॉइंट तक की कमी आ गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कोरोनावायरस ने शरीर को कई प्रकार से क्षति पहुंचाई है, इसलिए जो भी लोग संक्रमित रहे हैं, उन्हें एहतियातन ठीक होने के बाद डॉक्टर से मिलकर पूरे शरीर की जांच करा लेनी चाहिए जिससे पोस्ट कोविड की दिक्कतों का समय पर पता चल सके और उसका उपचार किया जा सके।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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