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Liver Problem: आंखें बताती हैं आपका लिवर हेल्दी है या नहीं? ये लक्षण हैं तो तुरंत जाएं डॉक्टर के पास

Sat, 09 May 2026 08:15 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आंखें लिवर की सेहत का महत्वपूर्ण संकेत बन सकती हैं। जब आंखों का सफेद हिस्सा पीला पड़ने लगे, तब यह शरीर में बिलीरुबिन बढ़ने का संकेत हो सकता है। अगर आंखों में लगातार पीलापन, सूजन या रंग में बदलाव दिखाई दे, तो इसे सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।
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लिवर की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
लिवर हमारे शरीर के उन महत्वपू्र्ण अंगों में से एक है जो बिना थके, बिना रुके लगातार काम करता रहता है। शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालना हो या फिर भोजन को ऊर्जा में बदलना, पाचन को ठीक रखना हो या फिर शरीर के लिए जरूरी हार्मोन्स बनाना, लिवर कई महत्वूर्ण कार्य करता है। हालांकि जिस तरह से हमारी लाइफस्टाइल-खानपान गड़बड़ होता जा रहा है, इसने लिवर से जुड़ी बीमारियों को तेजी से बढ़ा दिया है। कम उम्र के लोग यहां तक कि बच्चे भी लिवर की बीमारियों का शिकार देखे जा रहे हैं।

डॉक्टर कहते हैं, हेल्थ चेकअप रूटीन में लिवर की जांच को जरूर शामिल किया जाना चाहिए। शुरुआती चरण में लिवर की बीमारियों के अक्सर कोई संकेत नहीं दिखते हैं, यही कारण है कि ये धीरे-धीरे बढ़ती रहती है। समय पर जांच की मदद से आप लिवर की समस्याओं को समय रहते पता लगाकर इलाज करा सकते हैं।

विशेषज्ञ कहते हैं, हमारा शरीर भी लिवर की समस्याओं का संकेत देता रहता है। आप आंखों को ध्यान से देखकर भी जान सकते हैं कि लिवर हेल्दी है या नहीं?
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आंखों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
आंखें बताती हैं लिवर का हाल

जी हां, हमारी आंखें भी लिवर की सेहत के बारे में बताती हैं। आंखों का सफेद हिस्सा अगर पीला दिख रहा हो, यानी कि अगर आपमें पीलिया के लक्षण हैं तो ये भी लिवर की समस्याओं की तरफ इशारा माना जाता है। 
 
  • शरीर में बिलीरुबिन का स्तर बढ़ने के कारण ये दिक्कतह होती है।
  • बिलीरुबिन लाल रक्त कोशिकाओं के टूटने से बनता है। सामान्य स्थिति में लिवर इसे प्रोसेस करके शरीर से बाहर निकाल देता है।
  •  जब लिवर ठीक से काम नहीं करता, तब यह शरीर में जमा होने लगता है और आंखों के अलावा त्वचा में भी पीलापन बढ़ जाता है।
  • आंखों में होने वाले इस तरह के बदलाव पर समय रहते ध्यान देकर आप लिवर की गंभीर समस्याओं से सुरक्षित हो सकते हैं।
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पीलिया की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Adobe Stock
पीलिया को न करें अनदेखा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जब लिवर कमजोर हो जाता है या उसमें सूजन, संक्रमण होती है, तब वह ठीक से काम नहीं कर पाता है। ऐसी स्थिति में अतिरिक्त बिलीरुबिन को भी लिवर सही तरीके से बाहर नहीं निकाल पाता। इसके कारण यह खून में जमा होने लगता है और सबसे पहले आंखों के सफेद हिस्से में पीलापन दिखाई देने लगता है।
 
  • हेपेटाइटिस, फैटी लिवर, संक्रमण जैसी स्थितियां इसके पीछे कारण हो सकती हैं।
  • अगर आंखों के साथ त्वचा भी पीली हो रही हो, पेशाब गहरा पीला हो और लगातार कमजोरी महसूस हो रही हो, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।

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लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe Stock
लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? 

विशेषज्ञों के अनुसार लिवर की कई बीमारियों को सही लाइफस्टाइल और खानपान को अपनाकर काफी हद तक रोका जा सकता है। 
 
  • हरी सब्जियां, फल-साबुत अनाज और प्रोटीन युक्त भोजन लिवर को स्वस्थ रखने में मदद करते हैं। 
  • ज्यादा तला-भुना, प्रोसेस्ड फूड्स और ज्यादा चीनी वाली चीजें फैटी लिवर का खतरा बढ़ा सकती हैं।
  • ज्यादा शराब पीना लिवर कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाकर फैटी लिवर और सिरोसिस का खतरा बढ़ा सकती है।
  • वजन को कंट्रोल रखने से नॉन-अल्कोहोलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा कम होता है। 
  • हेपेटाइटिस-ए और बी के टीके भी लिवर को संक्रमण से बचाने में मदद करते हैं।
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आंखें बताती हैं सेहत का हाल - फोटो : Freepik.com
आंखों में दिखने वाले अन्य लिवर रोग संकेत

आंखों में पीलापन के अलावा भी कई अन्य संकेत भी शरीर की बीमारियों की तरफ इशारा हो सकते हैं।
 
  • आंखों में सूखापन, सूजन और आसपास की त्वचा का रंग बदलना भी लिवर से जुड़ी समस्याओं का संकेत हो सकता है।
  • आंखों के आसपास पीले रंग के छोटे फैटी जमाव को जैंथेलाज्मा कहा जाता है। यह शरीर में कोलेस्ट्रॉल असंतुलन का संकेत हो सकता है।
  • अगर आंखों में लगातार बदलाव दिखाई दें और साथ में थकान, भूख कम लगने या पेट में सूजन जैसे लक्षण हों, तो इसे सामान्य समस्या मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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