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लिवर की बीमारी: अब हर बार बायोप्सी जरूरी नहीं, एम्स के डॉक्टर ने खोज निकाला इसका आसान तरीका

Tue, 25 Aug 2026 04:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लिवर की बीमारी अब केवल शराब से जुड़ी समस्या नहीं है। फैटी लिवर, मोटापा, डायबिटीज, हेपेटाइटिस भी खतरा बढ़ाते जा रहे हैं। गंभीर बीमारियों का पता लगाने के लिए डॉक्टर बायोप्सी की सलाह देते हैं, पर हर मरीज के लिए ये जरूरी नहीं होती। एम्स के डॉक्टरों ने बताया है कि बगैर बायोप्सी के भी इस खतरे की पहचान हो सकती है।
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लिवर की बीमारी का खतरा - फोटो : Adobe Stock Images
लिवर की बीमारियां वैश्विक स्तर पर तेजी से बढ़ती जा रही हैं। ये सिर्फ लिवर के लिए ही खतरनाक नहीं हैं, इसका पूरे शरीर पर असर हो सकता है। लिवर दिन-रात बिना रुके काम करता रहता है। खाना पचाने में मदद करने से लेकर पोषक तत्वों को प्रोसेस करने, दवाओं और विषैले पदार्थों के ब्रेक डाउन और शरीर के लिए जरूरी प्रोटीन बनाने तक में इसकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है। यही कारण है कि लिवर की बीमारियों का असर पूरे शरीर को प्रभावित कर सकता है। 

समस्या यह है कि लिवर में गड़बड़ी शुरू होने के बाद ज्यादातर लोगों में लंबे समय तक कोई स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते। कुछ लोगों में थकान, भूख कम लगने, पेट में सूजन, पीलिया या वजन तेजी से घटने जैसे संकेत सामने आ सकते हैं जिसे अक्सर सामान्य मानकर इग्नोर कर दिया जाता है। 

गंभीर स्थितियों में लिवर की बीमारी फैटी लिवर, लिवर सिरोसिस और कैंसर तक में बदल सकती है। लिवर की गंभीरता जानने के लिए लंबे समय तक बायोप्सी को महत्वपूर्ण जांच माना जाता रहा है। हालांकि अब विशेषज्ञों का कहना है कि बिना बायोप्सी के भी लिवर की समस्याओं का अंदाजा लगाया जा सकता है।
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लिवर रोगों के मामले - फोटो : Adobe Stock
पहले बायोप्सी के बारे में जान लीजिए

लिवर की बायोप्सी में लिवर से ऊतक का छोटा हिस्सा लेकर माइक्रोस्कोप से जांच की जाती है। लिवर की समस्याओं के बारे में पता लगाने के लिए डॉक्टर आमतौर पर खून की जांच, FIB-4 जैसे स्कोर और इलास्टोग्राफी जैसे टेस्ट कराते हैं जिससे जोखिमों का आकलन किया जा सकता है। कुछ मामलों में बीमारी का सही कारण या लिवर के अंदर मौजूद सूक्ष्म बदलाव जानने के लिए बायोप्सी  की जरूरत पड़ती है।

मोटापे के साथ लिवर में चर्बी जमा होना आम समस्या है। कुछ लोगों में यह आगे बढ़कर लिवर फाइब्रोसिस हो जाता है। गंभीर स्थिति में लिवर को काफी नुकसान हो सकता है। ऐसे मरीजों की पहचान आसान बनाने के लिए एम्स दिल्ली के विशेषज्ञों ने एक नया खतरे का अंक तैयार किया है।
 
  • मतलब बगैर बायोप्सी के भी इस खतरे की पहचान की जा सकती है। 
  • इसमें लिवर की सख्ती, खून की एक खास जांच और प्लेटलेट की संख्या को एक साथ देखा जाता है। शुरुआती जांच में इस तरीके के अच्छे नतीजे मिले हैं। 
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लिवर की जांच - फोटो : adobe stock images
189 मरीजों पर हुई जांच

अध्ययन में मोटापे और लिवर में चर्बी की समस्या वाले 189 मरीजों को शामिल किया गया। सभी मरीज वजन कम करने की सर्जरी के लिए एम्स पहुंचे थे। 
 
  • इनकी सामान्य जांच के साथ लिवर की सख्ती और खून में फाइब्रोसिस से जुड़े संकेतकों की जांच की गई। 
  • सर्जरी के दौरान लिवर का छोटा हिस्सा लेकर भी जांच की गई, ताकि बीमारी की असली स्थिति का पता चल सके। 
  • जांच में 189 में से 33 मरीजों यानी 17.5 प्रतिशत में लिवर की गंभीर फाइब्रोसिस मिली। यानी करीब हर छह मरीजों में से एक का लिवर गंभीर रूप से प्रभावित था।
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लिवर की गंभीर बीमारी - फोटो : Adobe Stock
लिवर फाइब्रोसिस का जोखिम

डॉक्टर बताते हैं, लिवर फाइब्रोसिस वह स्थिति है जब लंबे बनी लिवर की बीमारी आपके लिवर के ऊतकों को बदलने लगती है। क्रॉनिक सूजन के कारण स्केरिंग की दिक्कत हो सकती है  जिससे लिवर सख्त हो जाता है। यदि यह जारी रहती है, तो इससे सिरोसिस और लिवर फेलियर तक हो सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, आधुनिक चिकित्सा में कई तरीके उपलब्ध हैं, जिससे समय रहते बीमारी की गंभीरता की पहचान हो सकती है साथ ही समय पर उपचार से फाइब्रोसिस को रोका जा सकता है और यहां तक कि इसे ठीक भी किया जा सकता है।





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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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