Liver Disease Risk Factors: ये कहना गलत नहीं होगा कि हम खुद ही अपने शरीर का दुश्मन बनते जा रहे हैं। हाल के वर्षों में जिस तरह से लाइफस्टाइल और खानपान में गड़बड़ी के कारण कई प्रकार की बीमारियों का खतरा बढ़ता जा रहा है, ये काफी चिंताजनक है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र के लोग भी क्रॉनिक बीमारियों का शिकार हो रहे हैं, ये और भी खतरनाक स्थिति है। अगर ये ट्रेंड जारी रहा तो आने वाले तीन-चार दशकों में देश की बड़ी आबादी रोगग्रस्त हो सकती है, जिसके कारण न सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं पर अतिरिक्त दबाव बढ़ने की आशंका है, साथ ही ये देश के आर्थिक विकास को भी नुकसान पहुंचा सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार हर साल करीब 20 लाख लोग लिवर से जुड़ी बीमारियों से जान गंवा देते हैं। कैंसर और हृदय रोगों के बढ़ते मामले पहले से ही टेंशन बढ़ा रहे हैं, वहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने अब लिवर रोगों की महामारी को लेकर भी लोगों को सावधान किया है।
भारत में भी लिवर रोग एक गंभीर स्वास्थ्य चिंता का विषय हैं, यहां नॉन-अल्कोहलिक फैटी लिवर रोग (एनएएफएलडी) के मामले हाल के वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। मोटापा और गतिहीन जीवनशैली के कारण, यह अनुमानित 38% वयस्कों और 35% बच्चों को प्रभावित करता है। हेपेटाइटिस बी और सी का संक्रमण भी एक बड़ा कारण है। हालांकि जिस एक आदत को लेकर विशेषज्ञ सबसे ज्यादा चिंतित हैं वह है अल्कोहल। शराब की आदत को लिवर रोगों की संभावित महामारी का प्रमुख कारण बताया जा रहा है।