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सावधान: भारी बारिश-बाढ़ प्रभावित हिस्सों में लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण को लेकर अलर्ट, जानिए इस रोग के बारे में सबकुछ विस्तार से

Mon, 18 Jul 2022 02:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लेप्टोस्पायरोसिस के कई राज्यों में बढ़ते मामले - फोटो : iStock
देश के ज्यादातर हिस्सों में मानसून का प्रभाव देखने को मिल रहा है। महाराष्ट्र, गुजरात, असम जैसे राज्यों में तेज बारिश के कारण बाढ़ का कहर जारी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बाढ़ प्रभावित राज्य के लोगों को सेहत को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह देते हैं। बारिश और बाढ़ के खतरे के बीच बृहन्मुंबई महानगर पालिका (बीएमसी) ने  शहर में  लेप्टोस्पायरोसिस संक्रमण के खतरे को लेकर अलर्ट किया है। हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक जून के बाद से राज्य में लेप्टोस्पायरोसिस के कई मामले रिपोर्ट किए गए हैं। जुलाई में अब तक सात से अधिक लोगों में इसकी पुष्टि की गई है। 

लेप्टोस्पायरोसिस एक जीवाणु जनित रोग है जो मनुष्यों और जानवरों दोनों को प्रभावित करता है। यह जीनस लेप्टोस्पाइरा नामक बैक्टीरिया के कारण होता है। भारी बारिश या बाढ़ के बाद इससे संक्रमण का खतरा अधिक होता है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि पानी या मिट्टी, लेप्टोस्पायरोसिस पैदा करने वाले बैक्टीरिया से दूषित रही हो तो इसके संपर्क में आने वाले व्यक्ति में रोग विकसित होने का खतरा हो सकता है।

लेप्टोस्पायरोसिस बीमारी की गंभीर स्थिति में इसके कारण मृत्यु का खतरा 10-15 फीसदी के बीच हो सकता है, इस जोखिम को ध्यान में रखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को इससे बचाव के उपाय करते रहने की सलाह देते हैं।
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लेप्टोस्पायरोसिस के खतरे को लेकर बरतें सावधानी (सांकेतिक) - फोटो : Pixabay
लेप्टोस्पायरोसिस के बारे में जानिए

सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) विशेषज्ञों के मुताबिक लेप्टोस्पायरोसिस एक जूनोटिक रोग है, जिसका अर्थ है कि इससे  मनुष्यों और जानवरों दोनों में संक्रमण का खतरा हो सकता है। यह रोग मुख्य रूप से संक्रमित जानवर के मूत्र के संपर्क में आने से फैलता है। मनुष्यों में यह, जानवरों के मूत्र या दूषित मिट्टी-पानी के संपर्क में आने के कारण हो सकता है।

भारी बारिश के दौरान, जलजमाव एक आम समस्या है और इसलिए मनुष्यों के इसके संपर्क में आने की आशंका बढ़ जाती है। लेप्टोस्पायरोसिस के कारण गंभीर जटिलताएं भी हो सकती हैं और यह घातक भी हो सकता है।
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उल्टी और बुखार की समस्या के मामले - फोटो : iStock
लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षणों के बारे में जानिए

लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण, इसकी गंभीरता के आधार पर लोगों में भिन्न-भिन्न हो सकते हैं। किसी व्यक्ति के दूषित स्रोत के संपर्क में आने के बाद बीमारी के लक्षण विकसित होने में 2 दिन से 4 सप्ताह तक का भी समय लग सकता है। बीमारी आमतौर पर बुखार के साथ अचानक शुरू होती है और धीरे-धीरे इसके लक्षण बढ़ सकते हैं। सामान्यतौर पर लोगों में इस प्रकार के लक्षण देखे जाते हैं। 
  • बुखार के साथ खांसी।
  • सिरदर्द- मांसपेशियों में दर्द (विशेषकर पीठ के निचले हिस्से)
  • बिना खुजली वाले दाने।
  • दस्त-उल्टी या ठंड लगना।
  • आंखों का लाल रहना।

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लेप्टोस्पायरोसिस का जोखिम - फोटो : iStock
किन लोगों में लेप्टोस्पायरोसिस का जोखिम अधिक होता है?

लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा कुछ लोगों में अधिक देखा जाता रहा है, अपने जोखिम को समझते हुए ऐसे लोगों को विशेष तौर पर बचाव की आवश्यकता होती है। 
  • बरसात के दिनों में अधिक बरसात या बाढ़ वाले हिस्सों में खतरा।
  • जानवरों के साथ काम करने वाले जैसे डेयरी किसान या पशु चिकित्सक।
  • सीवर कर्मचारियों में जोखिम।
  • पानी में तैरने या नाव चलाने वालों में।
  • बगीचे या मिट्टी में काम करने वाले लोगों में खतरा, दूषित मिट्टी से इसका जोखिम अधिक होता है।
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लेप्टोस्पायरोसिस में समय पर इलाज जरूरी - फोटो : iStock
लेप्टोस्पायरोसिस का क्या इलाज है?

लेप्टोस्पायरोसिस में रोग की स्थिति और लक्षणों के आधार पर इसके इलाज की प्रक्रिया का पालन किया जाता है। लेप्टोस्पायरोसिस के हल्के लक्षण वाले केस घरेलू उपायों जैसे तरल पदार्थों के अधिक सेवन, आराम और ओवर-द-काउंटर दर्द निवारक दवाओं के साथ ठीक हो जाते हैं। बैक्टीरिया के खतरे को कम करने के लिए एंटीबायोटिक्स को प्रयोग में लाया जाता है। समय पर इलाज मिलने से स्थिति को गंभीर रूप लेने से बचाया जा सकता है।


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स्रोत और संदर्भ
Leptospirosis

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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