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Leptospirosis: आपके घर में भी हैं चूहे? इनसे जानलेवा संक्रमण का जोखिम; भारत-अमेरिका में रिपोर्ट किए गए मामले

Tue, 16 Apr 2024 03:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लेप्टोस्पायरोसिस का खतरा - फोटो : istock
दुनियाभर में जारी कोरोना के खतरों के बीच अमेरिका के कुछ हिस्सों में पिछले दिनों घातक 'जूनोटिक संक्रमण' ह्यूमन लेप्टोस्पायरोसिस के मामले भी बढ़ते हुए रिपोर्ट किए जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि ये बीमारी तेजी से फैल सकती है और इससे मौत का खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है। यहां जानना जरूरी है कि जूनोटिक संक्रमण उन संक्रमणों को कहा जाता है जो मुख्यरूप से जानवरों और इंसानों के बीच में फैलते हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अमेरिका के साथ-साथ भारत में भी इसके मामले पहले से ही देखे जाते रहे हैं। इस संक्रामक रोग के कारण मृत्युदर 5-15 फीसदी के बीच रहा है।

लेप्टोस्पायरोसिस को वेइल डिजीज के नाम से भी जाना जाता है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार न्यूयॉर्क शहर के विशेषज्ञों ने चेतावनी जारी कर कहा है कि ये संक्रामक बीमारी विश्व स्तर पर देखी जा रही है। जिन स्थानों पर चूहे अधिक होते हैं वहां इसका खतरा भी अधिक देखा जाता रहा है। चूहों के मूत्र के संपर्क में आने के कारण इसका जोखिम हो सकता है। लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षणों और इसके कारण होने वाली स्वास्थ्य समस्याओं के बारे में सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह दी गई है।
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संक्रामक रोग का जोखिम - फोटो : istock
भारत में भी रहा है खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया, भारत में भी इस संक्रामक रोग के मामले बढ़ते हुए देखे जाते रहे हैं। उल्लेखनीय मृत्युदर के कारण भारत लेप्टोस्पायरोसिस का हॉटस्पॉट रहा है। केरल, गुजरात, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे तटीय क्षेत्रों में इसके मामले सबसे ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। इस बीमारी के बारे में लोगों में जागरूकता की कमी बनी हुई है।

जिन स्थानों पर धान की खेती जैसी कृषि गतिविधियां होती हैं, भूमिगत सीवरों से जुड़े व्यवसाय होते हैं या जिन लोगों के घरों में चूहे होते हैं वहां इसका खतरा अधिक हो सकता है। 
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लेप्टोस्पायरोसिस और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : istock
लेप्टोस्पायरोसिस और इसका खतरा

लेप्टोस्पायरोसिस मुख्यरूप से संक्रमित जानवरों से मनुष्यों को हो सकता है। इसके बैक्टीरिया त्वचा में घाव, आंखों और म्यूकस के माध्यम से शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। संक्रमण की स्थिति ब्रेन और स्पाइनल कॉर्ड को प्रभावित करने के साथ कुछ लोगों में इंसेफेलाइटिस जैसी समस्याओं का कारण बन सकती है। कुछ लोगों में ये संक्रमण फेफड़ों को भी प्रभावित करता देखा गया है।

संक्रमण के लक्षणों पर ध्यान देना और इसके जोखिमों से बचाव के लिए निरंतर प्रयास करते रहना जरूरी है। 

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गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock
लेप्टोस्पायरोसिस के कारण शरीर को कई प्रकार के नुकसान

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण हल्के से लेकर गंभीर भी हो सकते हैं। संक्रमण के बाद इसके लक्षण दिखने में आमतौर पर 5 से 14 दिन लग जाते हैं। संक्रमण की स्थिति में बुखार और ठंड लगने, खांसी आने, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द की समस्या लेकर कुछ लोगों को पीलिया भी हो सकती है।

गंभीर लक्षणों में किडनी और लिवर फेलियर की समस्या के साथ सांस लेने में दिक्कत होने, झटके आने और ब्रेन से संबंधित कई और भी प्रकार की समस्याओं के विकसित होने का खतरा हो सकता है। 
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संक्रामक रोगों से करें बचाव - फोटो : istock
कैसे करें इस गंभीर रोग के खतरे से बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लेप्टोस्पायरोसिस से सुरक्षित रहने के लिए जरूरी है कि संक्रमण का कारण बनने वाले जानवरों से बचाव किया जाए। मृत जानवरों को छूने से बचें। अगर आपके घर के आसपास चूहे रहते है तो इससे छुटकारा पाने उपाय करें। बाढ़ के पानी के संपर्क में आने वाली किसी भी चीज से दूरी बनाकर रखें। नदियों और झीलों के पानी को बिल्कुल न पिएं। अगर आपके शरीर पर किसी भी तरह का कोई घाव है तो उसे ढककर रखें। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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