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सावधान: बच्चों को व्यस्त रखने के लिए अगर आप भी थमा देते हैं मोबाइल तो जान लीजिए इसके गंभीर नुकसान

Mon, 30 Dec 2024 07:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जो माता-पिता अपने बच्चे को बिजी रखने के लिए "डिजिटल डमी" का उपयोग करते हैं, उन बच्चों में समय के साथ मानसिक और शारीरिक बीमारियों का खतरा अन्य बच्चों की तुलना में काफी अधिक हो सकता है। कहीं आप भी तो ये गलती नहीं कर रहे हैं? 
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बच्चों का बढ़ता स्क्रीन टाइम - फोटो : Freepik.com
मोबाइल-कंप्यूटर और टेलीविजन जैसे स्क्रीन्स से हम सभी दिनभर किसी न किसी तरह से घिरे ही रहते हैं। पर क्या आप जानते हैं कि स्क्रीन पर बढ़ता आपका ये समय सेहत को कई प्रकार से गंभीर नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है? कई अध्ययन इसको लेकर गंभीर चिंता जताते रहे हैं कि बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को नुकसान पहुंचाने वाला हो सकता है। विशेषतौर पर बच्चों में बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने गंभीर चिंता व्यक्त की है।

अगर आप भी अपने बच्चे को व्यस्त रखने के लिए मोबाइल थमा देते हैं तो सावधान हो जाइए। जाने-अनजाने आपकी ये एक आदत बच्चे की सेहत को बहुत नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है।

एक नए अध्ययन में चेतावनी दी गई है कि जो माता-पिता अपने बच्चे को बिजी रखने के लिए "डिजिटल डमी" का उपयोग करते हैं, उन बच्चों में समय के साथ मानसिक और शारीरिक बीमारियों का खतरा अन्य बच्चों की तुलना में काफी अधिक हो सकता है। 
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बच्चों के लिए नुकसानदायक है मोबाइल का अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik.com
प्रीस्कूल-आयु के बच्चों में देखे गए दुष्प्रभाव

वैज्ञानिकों की टीम ने एक हालिया अध्ययन में पाया है कि बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम प्रीस्कूल-आयु (3-4 साल) के बच्चों में नींद की गुणवत्ता को कम कर सकता है। शोध के अनुसार, लैपटॉप, टैबलेट या स्मार्टफोन के सामने बच्चों का बीतने वाला अधिक समय उनमें एकाग्रता की समस्या और अस्थिर मनोदशा जैसी दिक्कतों का भी कारण बन सकती है। इसके अलावा बढ़े हुए स्क्रीन टाइम के कारण बच्चों की संज्ञानात्मक क्षमता में कमी के भी मामले देखे जा रहे हैं जो उनके जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करने वाली हो सकती है।

अर्ली चाइल्ड डेवलपमेंट एंड केयर जर्नल में प्रकाशित शोध के निष्कर्ष बताते हैं कि बच्चों को स्वस्थ रखने और भविष्य में उन्हें कई प्रकार की गंभीर समस्याओं से बचाने के लिए स्क्रीन टाइम को कम करना सबसे जरूरी हो गया है।
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बच्चों की स्वास्थ्य समस्याएं - फोटो : freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

बच्चों की सेहत पर बढ़े हुए स्क्रीनटाइम के दुष्प्रभावों को जानने के लिए कनाडा और चीन के वैज्ञानिकों ने विस्तृत शोध किया। वैज्ञानिकों ने पाया कि स्क्रीनटाइम बढ़ने के कारण नींद तो प्रभावित होती ही है साथ ही इसके कारण दीर्घकालिक तौर पर हाइपरएक्टिव अटेंशन प्रॉब्लम यानी एकाग्रता बनाए रखने में दिक्कत, संज्ञानात्मक समस्याओं के बढ़ने की दिक्कत देखी गई है।

शंघाई नॉर्मल यूनिवर्सिटी से प्रीस्कूल शिक्षा के विशेषज्ञ और अध्ययन के लेखक प्रोफेसर यान ली कहते हैं, हमारे परिणाम संकेत देते हैं कि अत्यधिक स्क्रीन टाइम प्रीस्कूल बच्चों के दिमाग को उत्तेजित अवस्था में ले आता है जिससे नींद की गुणवत्ता और इसकी अवधि दोनों खराब हो सकती है।

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स्क्रीन पर अधिक समय बिताने के नुकसान - फोटो : freepik
संज्ञानात्मक कौशल में गिरावट

स्क्रीनटाइम का बढ़ना बच्चों के सोचने, समझने और समस्याओं को हल करने की क्षमता पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रहा है। नतीजतन किसी काम पर बच्चों का ध्यान लंबे समय तक केंद्रित नहीं रह पाता।

इसको लेकर जर्नल ऑफ अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन में प्रकाशित एक अन्य शोध से पता चलता है कि जिन बच्चों के दिन का 2 घंटे से अधिक समय स्क्रीन्स के सामने बीतता है उन बच्चों के भाषा और सोचने की क्षमता में कमी आ सकती है। कैनेडियन पब्लिक हेल्थ सर्वे की रिपोर्ट में ऐसे बच्चों में स्कूल के प्रदर्शन में गिरावट की भी दिक्कत देखी गई।
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स्क्रीनटाइम पर दें ध्यान - फोटो : Adobe Stock
क्या है सलाह?

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के विशेषज्ञ 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों के लिए दिन में एक घंटे से अधिक स्क्रीनटाइम को हानिकारक बताया है। विशेषज्ञों ने कहा बढ़ा हुआ स्क्रीनटाइम बच्चों में अवसाद और चिंता की समस्या को भी बढ़ाता जा रहा है। सभी माता-पिता को सुनिश्चित करना चाहिए कि बच्चे का स्क्रीन पर समय कम से कम बीते। 

स्क्रीन टाइम कम करने के लिए माता-पिता बच्चों के साथ गुणवत्ता समय बिताएं और उन्हें आउटडोर गतिविधियों के लिए प्रोत्साहित करें। भविष्य को स्वस्थ बनाने के लिए ये प्रयास मौजूदा समय की जरूरत हैं। 


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स्रोत और संदर्भ
Screen time and behavioural problems among preschool children: unveiling the mediating effect of sleep quality


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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