कोरोना महामारी 21वीं सदी की सबसे बड़ी त्रासदी बनकर लोगों के सामने आई। नोवेल कोरोनावायरस और इसमें हुए म्यूटेशंस ने वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को न सिर्फ गंभीर स्तर पर प्रभावित किया, बल्कि बड़ी संख्या में लोगों की मौत भी हुई। अब तक के आंकड़ों के मुताबिक 70.47 करोड़ से अधिक लोग संक्रमण का शिकार हुए वहीं 70 लाख से अधिक की मौत हो चुकी है।
साल 2019 के आखिरी के महीनों में शुरू हुई कोरोना महामारी अब भले ही स्थिर हो गई है पर विशेषज्ञ कहते हैं, आरएनए वायरस में लगातार म्यूटेशन होता रहता जिसके कारण इसके फिर से बढ़ने का खतरा हो सकता है। इन जोखिमों को देखते हुए सभी लोगों को अब भी सावधानी बरतते रहने की सलाह दी जाती है।
कोरोना महामारी पर एक नजर डालें को पता चलता है कि संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान डेल्टा वैरिएंट के संक्रमण ने सबसे ज्यादा तबाही मचाई। इस दौरान ऑक्सीन की कमी के चलते बड़ी संख्या में लोगों की मौत हुई। इसी से संबंधित एक हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि दुनियाभर में करीब पांच अरब लोग, जोकि आबादी का लगभग दो-तिहाई हिस्सा है अभी भी मेडिकल ऑक्सीजन की पहुंच से वंचित हैं।