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Health Alert: शिगेला, वेस्ट नाइल के बाद अब केरल में तीसरे खतरनाक संक्रमण की एंट्री से हड़कंप, जानिए पूरी अपडेट

Thu, 11 Jun 2026 02:15 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केरल में निपाह संक्रमण को लेकर अलर्ट किया गया है। निपाह हल्के बुखार से लेकर गंभीर मस्तिष्क संक्रमण (एन्सेफलाइटिस) तक का कारण बन सकता है। इसकी सबसे बड़ी चिंता इसकी अपेक्षाकृत मृत्यु दर है। विभिन्न प्रकोपों में मृत्यु दर 40% से 75% तक दर्ज की गई है, जो इसे बेहद गंभीर बीमारी बनाती है।
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केरल में संक्रामक बीमारियों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
संक्रामक बीमारियों के रूप में केरल इन दिनों मानो अदृश्य दुश्मनों के एक साथ हमले का सामना कर रहा है। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने जानकारी दी थी कि एक तरफ शिगेला संक्रमण लोगों की सेहत पर खतरा बनकर मंडरा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मच्छरों से फैलने वाला वेस्ट नाइल वायरस स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रहा है। इसी बीच निपाह वायरस के एक संदिग्ध मामले ने पूरे राज्य में सतर्कता और बढ़ा दी है।

केरल के कोझिकोड में सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एन्सेफलाइटिस के लक्षणों वाले 43 वर्षीय व्यक्ति का इलाज चल रहा है। अधिकारी फिलहाल निपाह संक्रमण की जांच के लिए पुणे के नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी भेजे गए सैंपल की रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं। इससे पहले गुरुवार (11 जून) को अधिकारियों ने बताया अस्पताल में निपाह वायरस संक्रमण के लिए शुरुआती जांच का नतीजा पॉजिटिव आया था।

यहां गौरतलब है कि निपाह वायरस का संक्रमण हल्के बुखार से लेकर गंभीर मस्तिष्क संक्रमण (एन्सेफलाइटिस) तक का कारण बन सकता है। इसकी मृत्युदर भी काफी अधिक रही है जोकि सबसे बड़ी चिंताओं में से एक है।


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निपाह संक्रमण और इसके खतरे - फोटो : Freepik.com
केरल में फिर से निपाह का खतरा

स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि मरीज को निपाह का संदिग्ध मामले माने जाने से पहले वह कई लोगों के संपर्क में आया था।

अधिकारियों को शक है कि संक्रमण एक गोदाम की सफाई के दौरान हुआ हो सकता है, हालांकि इसके असली स्रोत की अभी पुष्टि नहीं हुई है। मरीज की हालत अभी स्थिर है और अधिकारी सैंपल की लैब रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं।  
 
  • केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन ने कहा कि कई लोग संदिग्ध व्यक्ति के संपर्क में थे, हालांकि इस समय घबराने की कोई जरूरत नहीं है।
  • मंत्री ने बताया कि मरीज इससे पहले प्राइवेट अस्पताल के कई विभागों में गया था जहां उसने शुरू में इलाज कराया, जिससे दूसरों के भी संक्रमित होने की आशंका बढ़ गई है।
  • एहतियात के तौर पर, अस्पताल के जिन कर्मचारियों के मरीज के संपर्क में आने की आशंका है, उन्हें क्वारंटीन में रहने के लिए कहा गया है।
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केरल में शिगेला का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
पहले से ही शिगेला और वेस्ट नाइल वायरस को लेकर केरल में अलर्ट

केरल पहले से ही संक्रामक बीमारियों की चपेट में है। 
 
  • शिगेला संक्रमण विशेषज्ञों के लिए चिंता का कारण बना हुआ है। इससे चार वर्षीय बच्चे की मौत भी हो गई है। 
  • इसके बाद  राज्य के कई हिस्सों में वेस्ट नाइल वायरस का संक्रमण बढ़ने को लेकर भी अलर्ट किया गया था. 
  • एक ही समय पर तीन अलग-अलग संक्रमणों का फैलना स्वास्थ्य सेवाओं पर लगातार दबाव बढ़ाता जा रहा है।

केरल में पहले भी निपाह के मामले रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। एक बार फिर से इसके संदिग्ध मामले ने लोगों की चिंता बढ़ा दी है।

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निपाह के खतरे - फोटो : Amarujala.com
निपाह और इसके खतरे को जानिए

निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, जिसका मतलब है कि यह जानवरों से इंसानों में फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार फल खाने वाले चमगादड़ों से इसके फैलने का खतरा सबसे ज्यादा माना जाता है।
 
  • यह वायरस संक्रमित जानवरों और कुछ मामलों में संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में भी फैल सकता है।
  • निपाह वायरस के शुरुआत में तो हल्के बुकार जैसै लक्षण होते हैं हालांकि गंभीर स्थिति में ये ब्रेन में संक्रमण (एन्सेफलाइटिस) तक का कारण बन सकता है। 
  • संक्रमितों में इसकी मृत्यु दर 40% से 75% तक देखी गई है, जो इसे बेहद गंभीर बीमारी बनाती है।
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निपाह से बचाव के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe Stock Photos
निपाह वायरस कैसे फैलता है और इससे कैसे बचें?

निपाह वायरस मुख्य रूप से ऐसे स्थानों पर जाने से फैल सकता है जहां चमगादड़ अधिक होते हैं। इसके अलावा जब चमगादड़ फलों, खजूर को संक्रमित करते हैं और मनुष्य उनका सेवन करता है, तो संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। सुअरों के संपर्क में आने से भी वायरस फैल सकता है। संक्रमित जानवरों के शारीरिक तरल पदार्थ, मल-मूत्र या स्राव के संपर्क में आने पर संक्रमण हो सकता है।
 
  • निपाह से बचाव के लिए विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि गिरे हुए या आधे खाए हुए फलों का सेवन न करें। 
  • खुले में रखे खजूर या ऐसे खाद्य पदार्थ जिनके चमगादड़ों से दूषित होने की आशंका हो, उनसे बचना चाहिए।
  • संक्रमण की रोकथाम के लिए हाथों की स्वच्छता, संक्रमित व्यक्तियों से सुरक्षित दूरी और अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण प्रोटोकॉल का पालन जरूरी माना जाता है।
  • निपाह वायरस से बचाव के लिए अभी कोई वैक्सीन नहीं है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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