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सेहत की बात: लाल कृष्ण आडवाणी के सीने में इंफेक्शन, जानिए बुजुर्गों में क्यों बढ़ जाती है ये दिक्कत

Sat, 17 Oct 2026 02:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Lal Krishna Advani Health Condition: वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व उप प्रधानमंत्री लाल कृष्ण आडवाणी को शुक्रवार शाम छाती में संक्रमण (चेस्ट इन्फेक्शन) के कारण राजधानी के अपोलो अस्पताल में भर्ती कराया गया। बुजुर्गों में कमजोर इम्युनिटी, पुरानी बीमारियों के कारण छाती के इंफेक्शन का खतरा बढ़ सकता है। लगातार खांसी, बलगम, सांस फूलने जैसे संकेत दिखें तो सावधान हो जाना चाहिए।
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छाती में संक्रमण की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
पूर्व उप प्रधानमंत्री और भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लाल कृष्ण आडवाणी को छाती में संक्रमण की समस्या के कारण शुक्रवार (16 अक्तूबर) की शाम को दिल्ली के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। 98 वर्षीय वरिष्ठ नेता को इससे पहले भी इसी साल मई में उम्र से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याओं के कारण अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कुछ दिनों बाद उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई थी।

अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक फिलहाल आडवाणी की हालत स्थिर है। उन्हें पल्मोनरी विभाग में भर्ती किया गया है, जहां डॉक्टरों की एक विशेष टीम उनके इलाज और मेडिकल जांच की देखरेख कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने शनिवार सुबह अस्पताल जाकर उनके स्वास्थ्य का हाल जाना।

गौरतलब है कि उम्र बढ़ने के साथ सीने में संक्रमण की समस्या बहुत आम है। समय के साथ शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होती जाती है, इसका असर फेफड़े और सांस से जुड़ी समस्याओं पर भी पड़ता है जिसके कारण कुछ लोगों में  छाती में इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों के घर में बुजुर्ग हैं, उन्हें सीने में संक्रमण के लक्षणों को लेकर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। समय पर संक्रमण पर ध्यान न दिया जाए तो संक्रमण के बढ़ने और जानलेवा खतरे हो सकते हैं। 
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फेफड़ों में इंफेक्शन का खतरा - फोटो : Freepik.com
बुजुर्गों में फेफड़ों का संक्रमण

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है
कि छाती और फेफड़ों के संक्रमण बुजुर्गों में बीमारी और मौत के प्रमुख कारणों में से एक हैं। रोग प्रतिरोधक क्षमता (इम्यूनोसिनसेंस) और फेफड़ों की कार्यप्रणाली में आने वाले बदलावों के कारण इसका जोखिम हो सकता है। उम्र बढ़ने के साथ इस समस्या के कारण अस्पताल में भर्ती होने की दर काफी बढ़ जाती है।
 
  • आम आबादी में जहां प्रति 1,000 लोगों में से एक-दो लोगों को छाती में संक्रमण के कारण अस्पताल में भर्ती होना पड़ता है वहीं 75 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में यह दर लगभग 12 है। 

छाती में संक्रमण होने पर खांसी, बलगम आने, बुखार, सांस लेने में परेशानी और सीने में दर्द जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। इंफेक्शन के कई कारण हो सकते हैं। ये सामान्य वायरल संक्रमण से लेकर निमोनिया जैसी गंभीर बीमारियों की वजह से हो सकता है इसलिए इसके लक्षणों को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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बुजुर्गों में छाती का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
आखिर क्यों बढ़ जाती है बुजुर्गों में ये दिक्कत?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती जाती है, शरीर की बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी कमजोर होने लगती है। 
 
  • उम्र बढ़ने के साथ शरीर का इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है, ऐसे में वायरस और बैक्टीरिया के संक्रमण का जोखिम काफी बढ़ जाता है। बुजुर्गों में सर्दी-जुकाम या फ्लू जैसे आम संक्रमण के कारण भी छाती में संक्रमण होने का खतरा हो सकता है।
  • इसके अलावा जिन लोगों को पहले से डायबिटीज, अस्थमा, सीओपीडी और दिल की बीमारी की दिक्कत रही है, उनमें निमोनिया जैसे संक्रमण का जोखिम ज्यादा देखा जाता है। 
  • बुजुर्गों में समय के साथ खांसी की ताकत भी कम हो जाती है, जिससे बलगम बाहर निकालने में कठिनाई हो सकती है। इससे भी फेफड़ों में बलगम जमा होने पर बीमारी के बढ़ने का खतरा हो सकता है। 
  • कई बार भोजन या पानी निगलते समय सांस की नली में चले जाने से भी फेफड़ों में संक्रमण हो सकता है।

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खांसी की समस्या - फोटो : Freepik.com
छाती के इंफेक्शन की पहचान कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कम उम्र वालों में छाती में संक्रमण होने पर ज्यादा दिक्कत नहीं होती है, लेकिन उम्रदराज लोगों में ये गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ाने वाली समस्या हो सकती है।
 
  • छाती में संक्रमण होने लगातार खांसी की दिक्कत होती रहती है। कई लोगों को खांसी के साथ पीले-हरे रंग का बलगम भी आ सकता है।
  • छाती में संक्रमण सांस लेने में परेशानी भी बढ़ा देती है जिससे सांस फूलना, घरघराहट या तेजी से सांस चलने की दिक्कत हो सकती है।
  • संक्रमण के कारण बुखार और सीने में दर्द और ठंड लगने जैसी दिक्कत भी देखी जाती रही है।
  • संक्रमण के कारण बुजुर्गों में बहुत ज्यादा कमजोरी, भूख कम लगने, सुस्ती जैसी समस्याएं भी बढ़ जाती हैं।
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फेफड़ों में संक्रमण की समस्या - फोटो : Freepik.com
छाती के इंफेक्शन हो जाए तो क्या करें?

बुजुर्गों में छाती में संक्रमण के लक्षण दिखने पर समय रहते इलाज जरूरी हो जाता है। संक्रमण के कारण तेजी से सेहत बिगड़ने का खतरा हो सकता है। सांस लेने में दिक्कतों के साथ होंठ नीले पड़ने या अचानक भ्रम होने पर इमरजेंसी में डॉक्टर की मदद लेना जरूरी है।
 
  • डॉक्टर की सलाह पर गुनगना पानी और अन्य तरल पदार्थ दें।
  • आराम करते समय सिर थोड़ा ऊंचा रखने से सांस लेने में राहत मिल सकती है।
  • हर बार छाती का इंफेक्शन बैक्टीरिया की वजह से नहीं होता। वायरल संक्रमण भी इसका कारण हो सकता है जिसमें एंटीबायोटिक की जरूरत नहीं होती है।  
  • हाथों की सफाई रखना, धूम्रपान से दूरी और फ्लू, कोविड-19 तथा न्यूमोकोकल टीके लगवाने से संक्रमण से बचाव हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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