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लड़कियों के मन में पीरियड्स को लेकर होते हैं कई सवाल, मां के नाते देना होगा जवाब

Wed, 11 Apr 2018 09:35 AM IST
दीप्ति अंगरीश
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पीरियड्स यानी माहवारी। कई लोग इसे वो और उन दिनों की बात भी कहते हैं। वो कच्ची उम्र की है। यदि उसे थोड़ा-बहुत मालूम भी हो, तो वो आपको बताने में झिझकती है। प्लान इंटरनेशनल यूके के एक शोध में 1000 लड़कियों को शामिल किया गया। शोध में पाया गया कि लड़कियां पीरियड्स की बात पर झिझकती हैं। उनमें से एक तिहाई लड़कियों को पता ही नहीं कि उन्हें पीरियड्स कब होगा? बेटी की परवरिश की जिम्मेदारी आपकी है। उसे बताना होगा कि टीनएज में आते ही उसके शरीर में तरह-तरह के बदलाव होंगे, जिसे उसे स्वीकारना होगा। 
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कब शुरू करें बात 
पीरियड्स को लेकर कब बात करनी चाहिए ? यह बड़ा सवाल है। अमेरिका, दक्षिण कोरिया और पश्चिम यूरोप के कुछ विकसित देशों में, लड़कियों को 12 या 13 साल की उम्र में पहला पीरियड होता है। मगर कुछ लड़कियों को जल्दी यानी 8 साल की उम्र में या फिर देर से यानी 16 या 17 साल में पहला पीरियड होता है।

नाइजीरिया की लड़कियों में लगभग 15 साल की उम्र में पीरियड होता है। भारत में 12 से 14 साल के बीच पीरियड शुरू होता है। असल में, एक लड़की को किस उम्र में पीरियड होगा, यह कई बातों पर निर्भर करता है, जैसे उसके जीन्स की रचना, उसके परिवार की आर्थिक हालत, खानपान, वह किस तरह का काम करती है और वह जिस जगह पर रहती है, उसकी ऊंचाई कितनी है?
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अपनी बेटी को इसके बारे में बताना कब अच्छा होगा? 
उसकी पहली माहवारी से पहले। इसका मतलब है कि जब आपकी बेटी लगभग 8 साल की हो जाती है, तब आप उसे शरीर में होने वाले बदलाव और मासिक धर्म के बारे में बता सकती हैं। अगर आपकी बेटी 8 से 10 साल की है, तो मुमकिन है कि हार्मोन के बढ़ने की वजह से अंदर-ही-अंदर उसमें बदलाव होने शुरू हो गए होंगे,  जैसे ब्रेस्ट का बढ़ना, शरीर में ज्यादा बाल आना आदि। ज्यादातर लड़कियों का पहला पीरियड शुरू होने से ठीक पहले, उनका कद व वजन अचानक बढ़ जाता है।

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सहजता से रखें बात 
बेटी हो या बेटा माता-पिता को दोनों से ही पीरियड्स की बात करनी चाहिए। यहां बात सहजता और दोस्ताना रूप में करें। यह जरूरी इसलिए है कि बेटी अपने शारीरिक बदलावों से रूबरू होगी। दूसरी ओर बेटे से यह बात करने पर वह महिलाओं की इज्जत करना सीखेगा।

बेटे को लड़कियों को पीरियड्स होने का वैज्ञानिक तथ्य बताएं और बताएं कि हर महीने लड़कियों को पीरियड होते हैं। इस दौरान लड़कियां मूड स्विंग और दर्द से गुजरती हैं। आप यह इंतजार नहीं करें कि बेटी को पीरियड्स होने पर ही बताएंगी। पहले से वाकिफ होने पर उसे कुछ अटपटा नहीं लगेगा। 
 
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साधारणतया पीरियड्स 28 दिन पर होता है, लेकिन शुरू-शुरू में ये कभी-कभी 21 से 45 दिन के अंतर पर भी हो सकता है। यह बात अपनी बेटी को बताएं।  ज्यादातर लोग नहीं जानते हैं कि अगर शरीर में फैट की मात्रा 8 से 12 प्रतिशत से भी नीचे चली जाए, तो पीरियड का होना बंद हो जाता है। दरअसल, फैट की कोशिकाएं एस्ट्रोजन के मुख्य स्रोत होते हैं। शरीर में इसकी कमी हो जाने से पीरियड्स रुक जाती है। अपनी बेटी को यह भी बताएं कि वह इसको लेकर चिंतित न हो। 
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हाइजीन की भी हो बात 
अपनी बेटी को बेसिक हाइजीन की जानकारी भी दें। पीरियड्स से जुड़ी सारी बातें बताने के साथ ही अपनी बेटी को पीरियड्स के दौरान बेसिक हाइजीन की जानकारी भी अवश्य दें, जैसे- सैनिटरी नैपकिन का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? कब और कितने समय के बाद नैपकिन बदलना जरूरी है?

सैनिटरी नैपकिन के इस्तेमाल के बाद हाथ क्यों धोना चाहिए? इस्तेमाल किए हुए सैनिटरी नैपकिन को कैसे और कहां फेंकना उचित है? इंफेक्शन से बचने के लिए पीरियड्स के दौरान प्राइवेट पार्ट्स की सफाई पर किस तरह ध्यान देना चाहिए? साथ ही पैंटी की साफ-सफाई पर भी विशेष ध्यान देना क्यों जरूरी है?
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