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सावधान! मच्छर मारने वाली दवाओं का इस्तेमाल दे सकता है आपको ये बड़ी बीमारी

Wed, 03 Oct 2018 10:24 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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अगर आप भी अक्सर चीजें रखकर भूल जाते हैं तो सतर्क हो जाइए कहीं इसकी वजह मच्छरों को भगाने वाली कीटनाशक दवाईयां तो नहीं। मौसम बदलते ही मच्छरों से होने वाली बीमारियां जैसे डेंगू, मलेरिया अपने पैर पसारने लगती हैं।मच्छर न सिर्फ शरीर से आपका खून चूसते हैं बल्कि कई जानलेवा बीमारियों के वायरस भी आपके शरीर में छोड़ जाते हैं। ऐेसे में अगर आप अपनी सेहत के इन दुश्मनों को भगाने के लिए कीटनाशक दवाओं का इस्तेमाल करते हैं तो सतर्क हो जाइए। ऐसा करना आपकी दिमागी सेहत पर असर डालकर आपको इस बड़ी बीमारी का शिकार बना सकता है।जानिए कैसे।     
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अमेरीकी शोधकर्ताओं के अनुसार कीटनाशक दवा डीडीटी (डायक्लोरो-डायफिनायल-ट्रायक्लोरोएथेन) के अधिक सम्पर्क में आने से अल्जाइमर होने का खतरा बढ़ जाता है।अल्जाइमर से पीड़ित व्यक्ति में भ्रमित रहने, बिना वजह आवेश में आने, मूड में तेजी से बदलाव आने और दीर्घकाल में याददाश्त चले जाने जैसे लक्षण देखे जाते हैं।जामा न्यूरोलॉजी में प्रकाशित एक अध्ययन में दिखाया गया है कि अल्जाइमर्स के मरीजों के शरीर में डीडीटी का स्तर किसी स्वस्थ इंसान की तुलना में चार गुना अधिक पाया गया।कुछ देशों में डीडीटी का इस्तेमाल मलेरिया के लिए जिम्मेदार मच्छर को मारने के लिए अभी भी किया जाता है।

दूसरा विश्वयुद्ध खत्म होने के बाद मलेरिया नियंत्रण के लिए डीडीटी का बड़े पैमाने पर सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया गया था। 'अल्जाइमर रिसर्च यूके' का कहना है कि अल्जाइमर और डीडीटी के संबंध की अभी और पड़ताल करने की जरूरत है।
 
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डीडीटी पर प्रतिबंध
दूसरा विश्वयुद्ध खत्म होने के बाद कुछ खास तरह की फसलों को कीड़ों से बचाने के लिए भी डीडीटी का बड़े स्तर पर उपयोग किया गया। हालांकि इंसानी स्वास्थ्य और पर्यावरण, खासतौर पर शिकारी परिंदों पर इसके दुष्प्रभाव के बारे में सवाल उठाए जाते रहे हैं।अमेरीका में डीडीटी के इस्तेमाल पर वर्ष 1972 में प्रतिबंध लगा दिया गया है। कई अन्य देशों में भी ऐसा ही किया गया। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन मलेरिया की रोकथाम के लिए डीडीटी के इस्तेमाल पर अभी भी जोर देता है। डीडीटी इंसानों के शरीर में भी पाया जाता है जहां यह डीडीई (डायक्लोरो-डायफिनायल-डायक्लोरो-एथिलीन) में तब्दील हो जाता है।

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रटगर्स और एमोरी यूनिवर्सिटी में शोधकर्ताओं के एक दल ने अल्जाइमर से पीड़ित 86 मरीजों के रक्त में डीडीई के स्तर की जांच की। उन्होंने पाया कि अल्जाइमर के मरीजों में डीडीई का स्तर तीन गुना अधिक मिला। लेकिन फिर भी यह मामला अभी एकदम स्पष्ट नहीं है क्योंकि कुछ ऐसे लोगों में भी डीडीई की मात्रा अधिक पाई गई है जो एकदम स्वस्थ हैं।

 
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'अल्जाइमर रिसर्च यूके' के शोध प्रमुख डॉक्टर साइमन रिडले कहते हैं, ''डीडीटी की वजह से अल्जाइमर का खतरा बढ़ता है, इसकी पुष्टि के लिए अभी और अधिक शोध किए जाने की जरूरत है।''

 
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