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विशेषज्ञ से जानिए ब्लैक फंंगस के लक्षण से लेकर इलाज खर्च तक, हर सवाल का जवाब 

Tue, 25 May 2021 02:45 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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यह त्वचा पर प्रकट होता है - फोटो : अमर उजाला

Medically Reviewed by
डॉ रविंदर गेरा, 
ईएनटी और हेड एंड नेक सर्जरी विभाग , निदेशक
मैक्स हेल्थकेयर, गुरुग्राम 
डिग्री- एमबीबीएस, एम.एस, डीएनबी
अनुभव- 20 वर्ष
हाल ही के दिनों में म्यूकोर्मिकोसिस नामक एक दुर्लभ लेकिन घातक फंगल संक्रमण के बारे में लगातार चर्चा हो रही है जिसे बोलचाल की भाषा में "ब्लैक फंगस" कहा जाता है। यह त्वचा पर प्रकट होता है और फेफड़ों और मस्तिष्क को भी प्रभावित करता है। कोविड -19 रोगियों का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने मौजूदा कोरोनावायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में इस नई जटिलता के आने के संभावित जोखिमों की ओर ध्यान केंद्रित किया है। कोविड -19 के लिए नेशनल टास्क फोर्स ने इस संक्रमण के बारे में सामने आए सबूतों के आधार पर एक एडवाइजरी जारी की है। जैसे-जैसे संक्रमण पूरे देश में फैल रहा है, इससे कितना खतरा होने की आशंका है? क्या इसका कोविड से संबंध है? यह कितना फैल सकता है? इससे जुड़ी सच्चाई क्या है? अगली स्लाइड्स में इन सारे सवालों का जवाब दे रहे हैं विशेषज्ञ। 

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फंगस के संपर्क में आने का काफी जोखिम होता है - फोटो : iStock

म्यूकोर्मिकोसिस क्या है?
म्यूकोर्मिकोसिस एक आम फंगस है, जो ज्यादातर मिट्टी और सड़ रही वनस्पति में मौजूद होता है, लेकिन शायद ही कभी मनुष्यों को प्रभावित करता है। हम सभी को अपने दिन-प्रतिदिन के कार्यों के दौरान इस फंगस के संपर्क में आने का काफी जोखिम होता है, लेकिन हमारी प्रतिरक्षा प्रणाली इसके संक्रमण को रोकने में बेहद प्रभावी है। हालांकि, अनियंत्रित मधुमेह और इम्यूनोसप्रेशन दो सबसे सामान्य स्थितियां हैं जिसमें रोगियों को यह संक्रमण होता है।


 

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मृत्यु दर लगभग 50% है - फोटो : iStock/Pixabay

इसका प्रकोप अभी क्यों हो रहा है? 
अनियंत्रित मधुमेह और इम्यूनोसप्रेशन दो ऐसी स्थितियां हैं जिसमें रोगियों को यह संक्रमण होता है। चूंकि इसकी मृत्यु दर लगभग 50% है, इसलिए इस संक्रमण को लेकर डर होना स्वाभाविक है और यह कोविड– 19 से होने वाली मौतों को कई गुना बढ़ा सकता है। ऐसा लगता है कि भारत एकमात्र ऐसा देश है, जहां कोविड- 19 महामारी में इन मामलों में भारी वृद्धि देखी जा रही है। इस घातक संक्रमण का कोई निश्चित कारण नहीं है, लेकिन इसका संबंध रोगी की स्वास्थ्य स्थितियों (मधुमेह, स्टेरॉयड का उपयोग) और वायरस की उग्रता (रोगी की प्रतिरक्षा को दबाना और कम लिम्फोसाइट काउंट) से हो सकता है। 

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उन्हें स्टेरॉयड दिया गया था - फोटो : PIB

इसका कोविड-19 से क्या संबंध है?
पश्चिमी वैज्ञानिक साहित्य में, कोविड- 19 का म्यूकोर्मिकोसिस से संबंध का जिक्र किया गया है और टोर्नेडो (तूफान) या सुनामी के बाद केवल क्लस्टर मामलों (50 से कम) की सूचना मिली है। हाल में हो रहे इसके मामले हमारी स्वास्थ्य प्रणाली और स्वच्छता की स्थिति में कमी को दर्शाती है। म्यूकोर्मिकोसिस के अधिकांश मामले एक सामान्य स्थिति में ही देखे जा रहे हैं - सभी रोगियों को कोविड– 19 था, उन्हें स्टेरॉयड दिया गया था, और इलाज के दौरान उनका मधुमेह या शुगर अनियंत्रित था। उनका लिम्फोसाइट काउंट कम था जिससे पता चलता है कि उनमें प्रतिरक्षा का स्तर कम था। स्टेरॉयड या तो बहुत जल्दी, बहुत अधिक या बहुत लंबे समय तक दिए जाने से रक्त शर्करा और प्रतिरक्षा पर हानिकारक प्रभाव पड़ सकता है, जिसके कारण आगे चलकर म्यूकोर्मिकोसिस हो सकता है।


 

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फेफड़ों, त्वचा और मस्तिष्क में आश्चर्यजनक रूप से फैल सकता है - फोटो : social media

आप इसके लक्षणों को कैसे पहचानेंगे?
इसके शुरुआती लक्षणों में आंखों में सूजन, जबड़े या दांतों में दर्द, नाक से खून निकलना, गंभीर सिरदर्द या नजर में परिवर्तन‚ जैसे– दोहरा दिखाई देना या अचानक अंधापन आदि शामिल हैं। ये लक्षण इस बीमारी की शीघ्र पहचान और शीघ्र उपचार में सहायता कर सकते हैं। ऐसा माना जाता है कि म्यूकोर्मिकोसिस रक्त वाहिकाओं के माध्यम से फैलता है और अगर इसकी जल्दी पहचान नहीं की जाती है तो यह फेफड़ों, त्वचा और मस्तिष्क में आश्चर्यजनक रूप से फैल सकता है। ईएनटी विशेषज्ञ, नेत्र विशेषज्ञ और एमआरआई इमेजिंग द्वारा जांच से इसकी पुष्टि होती है।

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घरेलू ग्लूकोमीटर से रक्त शर्करा की बारीकी से निगरानी रखने पर अधिक जोर नहीं दिया जाना चाहिए - फोटो : iStock

ब्लैक फंगस के विकास में योगदान देने वाले अन्य कारक?
कोविड उपचार दिशानिर्देश में उस स्थिति में स्टेरॉयड का उपयोग नहीं करने की चेतावनी दी गयी है जब रोगी का ऑक्सीजन सैचुरेशन कमरे की हवा में 95% से अधिक है। स्टेरॉयड के साथ खुद दवा लेने या चिकित्सक के मार्गदर्शन के बिना उनका उपयोग करने से बिल्कुल बचना चाहिए। कोविड -19 के उपचार में स्टेरॉयड लेने वाले प्रत्येक रोगी की अस्पताल की बजाय घरेलू ग्लूकोमीटर से रक्त शर्करा की बारीकी से निगरानी रखने पर अधिक जोर नहीं दिया जाना चाहिए। ब्लैक फंगस होने में योगदान करने वाले अन्य कारक हैं, कोविड 19 संक्रमण के कारण रक्त में फेरिटिन का उच्च स्तर, डायलिसिस की आवश्यकता और IL6 इनहीबिटर दवा द्वारा लंबे समय तक इम्युनोसप्रेशन।


 

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सभी कोविड रोगी इसके लिए अतिसंवेदनशील नहीं होते हैं - फोटो : iStock

म्यूकोर्मिकोसिस के बारे में कुछ मिथक क्या हैं?
म्यूकोर्मिकोसिस ब्लैक फंगस नहीं है। चिकित्सकीय रूप से, ब्लैक फंजाई एक प्रकार का ईस्ट है जिसकी दीवारों में काले मेलेनिन पिगमेंट होते हैं। म्यूकोर्मिकोसिस रक्त की आपूर्ति को निष्क्रिय करके ऊतक को काला कर देता है और इस काले रंग के कारण मीडिया में इसे ब्लैक फंगस के रूप में गलत तरीके से पेश किया गया है। इस बात का कोई वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है कि इसके प्रसार या इसकी शुरुआत के लिए ऑक्सीजन पाइप, ऑक्सीजन की आपूर्ति या ह्यूमिडिफायर जिम्मेदार हैं। कोविड -19 के विपरीत, यह संक्रामक नहीं है और एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में नहीं फैलता है। सभी कोविड रोगी इसके लिए अतिसंवेदनशील नहीं होते हैं और यह उन कोविड रोगियों में अत्यंत असामान्य है जिन्हें स्टेरॉयड नहीं दिया गया था या उनका मधुमेह पूरी तरह से नियंत्रण में था।


 

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दैनिक खर्च प्रति दिन 20,000-40,000 रुपये तक आ सकता है - फोटो : अमर उजाला

इसके उपचार में कितना खर्च आता है?
म्यूकोर्मिकोसिस रोगियों के इलाज में काफी खर्च आता है। उन्हें आम तौर पर कई सर्जरी की आवश्यकता होती है जिनमें मौत या अधिक अस्वस्थ होने की संभावना काफी हो सकती है। आंख निकालने से मरीज में अंधापन हो सकता है। यदि फंगस ने मस्तिष्क पर आक्रमण (राइनो सेरेब्रल म्यूकोर्मिकोसिस) किया है, तो उसकी मृत्यु की संभावना 80% होती है। सर्जरी के बाद मरीजों को अक्सर महंगे आईसीयू संसाधनों और वेंटिलेटर बेड की जरूरत होती है। एंटीफंगल उपचार और एंटीबायोटिक दवाओं का दैनिक खर्च प्रति दिन 20,000-40,000 रुपये तक आ सकता है और सर्जरी के बाद कम से कम दो-तीन सप्ताह तक अस्पताल में उपचार जारी रहेगा। मरीजों को एक बहु-विषयक दृष्टिकोण की भी आवश्यकता होती है, जो सभी स्थानों पर उपलब्ध नहीं होते हैं और इस तरह पर्याप्त जरूरी उपचार नहीं मिलने के कारण मार्बिडिटी की संभावना बढ़ सकती है।

 

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प्रारंभिक उपचार करने में मदद मिल सकती है - फोटो : iStock

म्यूकोर्मिकोसिस को रोकने के लिए क्या करना चाहिए?
सभी ध्यान म्यूकोर्मिकोसिस की रोकथाम पर होना चाहिए। कोविड के उपचार के साथ निवारक रणनीतियों को शामिल किया जाना चाहिए। संक्रमण से बचने के लिए मधुमेह की अच्छी देखभाल और प्रीडायबिटीज देखभाल महत्वपूर्ण है।टीकाकरण कोविड की गंभीरता को कम कर स्टेरॉयड की आवश्यकता को कम करता है। कोविड -19 संक्रमण के दौरान एक अच्छा ग्लाइसेमिक नियंत्रण, स्टेरॉयड को केवल हाइपोक्सिक रोगियों तक सीमित करना और शुगर पर सख्त निगरानी महत्वपूर्ण है। कोविड के रिकवरी वाले चरण में, लक्षणों पर सक्रिय निगरानी और ईएनटी विशेषज्ञ द्वारा जांच से म्यूकोर्मिकोसिस को रोकने या इसका प्रारंभिक उपचार करने में मदद मिल सकती है।

नोट- यह लेख मैक्स हेल्थकेयर के डॉक्टर रविंदर गेरा से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर गेरा पिछले 20 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्री मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज, नई दिल्ली से ली है। 

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित अस्वीकरण- बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 

 

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