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करवा चौथ 2026: निर्जला व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? जानें तुरंत राहत के उपाय

Wed, 28 Oct 2026 09:55 AM IST
श्रुति गौड़ हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Karwa Chauth Fasting: करवा चौथ के व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? इस लेख में जानें तुरंत राहत पाने के उपाय, जरूरी सावधानियां और कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
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निर्जला व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? - फोटो : AI
Karwa Chauth Fasting: करवा चौथ का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद खास माना जाता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। हालांकि, पूरे दिन बिना पानी और भोजन के रहने के कारण कुछ महिलाओं को चक्कर आना, कमजोरी महसूस होना, सिरदर्द, घबराहट या थकान जैसी समस्याएं हो सकती हैं। 

ऐसे में यह जानना जरूरी है कि करवा चौथ के व्रत के दौरान तबीयत बिगड़ने पर क्या करना चाहिए और किन लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। इस लेख में जानें कि व्रत के दौरान चक्कर या कमजोरी महसूस होने पर तुरंत कौन-से कदम उठाने चाहिए?
 
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निर्जला व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? - फोटो : AI
चक्कर आने पर तुरंत बैठ जाएं या लेट जाएं

अगर करवा चौथ का व्रत रखते समय अचानक चक्कर आने लगे, आंखों के सामने अंधेरा छाने लगे या शरीर में कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत बैठ जाएं या सुरक्षित जगह पर लेट जाएं। अचानक खड़े होने या चलने से बचें, क्योंकि इससे गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ सकता है। संभव हो तो किसी परिजन की मदद लें और पूरी तरह ठीक महसूस होने तक आराम करें।

 
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निर्जला व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? - फोटो : AI
 कमजोरी और घबराहट होने पर परिजनों को बताएं

व्रत के दौरान कमजोरी, बेचैनी या घबराहट महसूस होने पर इसे छिपाने की कोशिश न करें। अपने पति या परिवार के किसी सदस्य को तुरंत अपनी स्थिति बताएं। लंबे समय तक खाली पेट रहने और पानी न पीने से शरीर पर असर पड़ सकता है। ऐसे में अकेले रहने या घरेलू काम जारी रखने के बजाय आराम करें। यदि लक्षण बढ़ते हैं या बार-बार महसूस होते हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।

 

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निर्जला व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? - फोटो : AI
शरीर में पानी की कमी के लक्षण पहचानें

निर्जला व्रत के दौरान पानी न पीने से शरीर में डिहाइड्रेशन यानी पानी की कमी हो सकती है। इसके कारण मुंह सूखना, बहुत प्यास लगना, पेशाब कम आना, गहरे पीले रंग का पेशाब, सिरदर्द और चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
  • अत्यधिक कमजोरी या खड़े होने पर चक्कर आने को नजरअंदाज न करें।
  •  यदि तबीयत बिगड़ रही है, तो केवल व्रत पूरा करने के लिए पानी पीने में देरी न करें।
  •  व्रत तोड़ने की जरूरत पड़े, तो होश में होने और सुरक्षित रूप से निगल पाने की स्थिति में धीरे-धीरे पानी पिएं।

गंभीर डिहाइड्रेशन होने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लें।

 
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निर्जला व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? - फोटो : AI
 जरूरत पड़ने पर व्रत तोड़ने से न हिचकिचाएं

करवा चौथ का व्रत आस्था और परंपरा से जुड़ा है, लेकिन तबीयत खराब होने पर स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना जरूरी है। अगर लगातार चक्कर आ रहे हैं, बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो रही है, कंपकंपी हो रही है या बेहोशी जैसा लग रहा है, तो व्रत जारी रखने के लिए खुद पर दबाव न डालें।

ऐसी स्थिति में पानी पीना और कुछ हल्का खाना जरूरी हो सकता है। यदि लक्षण गंभीर हैं, तो घरेलू उपायों पर निर्भर रहने के बजाय डॉक्टर की मदद लें।

 
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निर्जला व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? - फोटो : AI
व्रत तोड़ने के बाद पानी और हल्का भोजन लें

अगर कमजोरी या चक्कर आने के कारण व्रत तोड़ना पड़े, तो शरीर को धीरे-धीरे सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश करें।
  •  सबसे पहले धीरे-धीरे पानी पिएं, एक साथ बहुत अधिक पानी पीने से बचें।
  •  हल्का और आसानी से पचने वाला भोजन लें, जैसे खिचड़ी, केला या टोस्ट।
  • बहुत तला-भुना, मसालेदार भोजन एक साथ ज्यादा मात्रा में न खाएं।
  •  यदि उल्टी हो रही है या पानी नहीं पी पा रही हैं, तो चिकित्सकीय सलाह लें।

यदि बेहोशी हो या व्यक्ति ठीक से निगल न पा रहा हो, तो उसे पानी या भोजन न दें और तुरंत आपातकालीन सहायता लें।

 
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निर्जला व्रत में चक्कर, कमजोरी या घबराहट होने पर क्या करें? - फोटो : AI
बेहोशी, सीने में दर्द या सांस की परेशानी को गंभीरता से लें

कुछ लक्षण सामान्य कमजोरी से ज्यादा गंभीर समस्या का संकेत हो सकते हैं। अगर व्रत के दौरान या बाद में बेहोशी, सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी, भ्रम, दौरा या अचानक बहुत ज्यादा कमजोरी महसूस हो, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।
 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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