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आज ही के दिन मिली थी पोलियो से जंग में बड़ी जीत, जानें डॉ. साल्क का क्या है योगदान 

Sun, 12 Apr 2020 01:16 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Dr Salk, Jonas Salk, Polio Vaccine - फोटो : Social Media
दुनियाभर में फैली कोविड-19 महामारी की रोकथाम में कई देशों की सरकारें, चिकित्सक और वैज्ञानिक लगे हुए हैं। इस बीच कई महामारियां याद आ रही हैं, जिसे दुनिया ने अपने प्रयासों से मात दिया और दूर भगाया। 12 अप्रैल का दिन भी एक भयंकर बीमारी के खिलाफ बड़ी जीत के रूप में याद किया जाता है। जी हां, कोरोना की लाइलाज महामारी से जूझ रही दुनिया के लिए यह जान लेना उपयोगी होगा कि डॉक्टर जोनास साल्क ने साल 1955 में 12 अप्रैल को ही पोलियो से बचाव की दवा को सुरक्षित करार दिया था और दुनिया के सामने प्रस्तुत किया था। एक समय यह बीमारी सारी दुनिया के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई थी और डॉ. साल्क ने इसके रोकथाम की दवा ईजाद करके मानव जाति को इस घातक बीमारी से लड़ने का हथियार दिया था। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से:  
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polio drops - फोटो : अमर उजाला
पोलियो या पोलियोमेलाइटिस, एक अपंग यानी विकलांग करने वाली घातक बीमारी है। पोलियो वायरस के कारण यह बीमारी होती है। व्यक्ति से व्यक्ति में फैलने वाला यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी पर हमला कर सकता है, जिससे पक्षाघात होने की आशंका होती है। पक्षाघात की स्थिति में शरीर को हिलाया नहीं जा सकता और व्यक्ति हाथ, पैर या अन्य किसी अंग से विकलांग हो सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के प्रयासों और विभिन्न देशों की सरकारों की दृढ़ता के साथ टीकाकरण अभियान ने दुनिया को पोलियो से बचाया। भारत पिछले 7-8 वर्षों से पोलियो मुक्त हो चुका है। हालांकि दुनिया के कुछ हिस्सों में विकलांगता के कुछ केस सामने आते हैं। 
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दुनियाभर में पोलियो का मुकाबला करने के लिए दो तरह की पोलियो वैक्सीन का ईजाद हुआ। पहला जोनास सॉल्क द्वारा विकसित किया गया टीका, जिसका साल 1952 में पहला परीक्षण किया गया और 12 अप्रैल 1955 को इसे प्रमाणित कर दुनियाभर में उपयोग के लिए प्रस्तुत किया गया। यह निष्क्रिय या मृत पोलियो वायरस की खुराक थी। वहीं, एक ओरल टीका अल्बर्ट साबिन ने भी तनु यानी कमजोर किए गए पोलियो वायरस का उपयोग करके विकसित किया था, जिसका साल 1957 में परीक्षण शुरू हुआ और 1962 में लाइसेंस मिला। सबसे पहले टीका विकसित करने के लिए दुनिया डॉक्टर साल्क का योगदान याद करती है।

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डॉ. जोनास सॉल्क एक चिकित्सक और महान शोधकर्ता थे - फोटो : Social Media
28 अक्तूबर, 1914 को अमेरिका की न्यूयॉर्क सिटी में जन्मे डॉ. जोनास सॉल्क एक चिकित्सक और महान शोधकर्ता थे। डॉ. सॉल्क द्वारा ईजाद की गई पोलियो वैक्सीन के उपलब्ध होने के ठीक दो साल पहले तक अमेरिका में 45,000 से भी ज्यादा लोग पोलियो के शिकार हो चुके थे, लेकिन टीके की खोज के बाद 1962 तक मात्र 910 पोलियो संक्रमित रह गए। 
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सॉल्क ने साल 1939 में एमडी की डिग्री हासिल की - फोटो : Social Media
जोनास सॉल्क ने साल 1939 में दवा क्षेत्र में एमडी की डिग्री हासिल की और फिर वे माउंट सिनाई अस्पताल में चिकित्सक के रूप में काम करने लगे। शोध में उनकी दिलचस्पी के कारण मिशिगन विश्वविद्यालय में उन्हें एक खास तरह के शोध पर काम करने का मौका दिया। इसके बाद उन्होंने पिट्सबर्ग में रिसर्च लैब प्रमुख रहते हुए पोलियो की दवा बनाने की तकनीक सीखी। आखिरकार विभिन्न चिकित्सा और शोध संस्थानों में काम करते हुए उन्होंने पोलियो का तोड़ ढूंढने में कामयाबी हासिल की। 
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पोलियो - फोटो : pixabay
डॉ. साल्क की इस खोज को सबसे पहले बंदरों पर आजमाया गया और फिर इसके बाद इसे पोलियोग्रस्त कुछ मरीजों पर आजमाया गया। इसका परिणाम सकारात्मक रहा और फिर इसके बाद डॉ. सॉल्क की इस महान खोज की खबर पूरी दुनिया में फैल गई। साल 1954 में इसे लाखों बच्चों पर आजमाया गया। साल 1955 में पोलियो की इस दवा को सुरक्षित और असरदार करार दिया गया। 23 जून, 1995 में 80 वर्ष की उम्र में डॉ. जोनास सॉल्क का निधन हो गया। आज दुनिया पोलियो से लगभग मुक्त हो चुकी है, जिसमें डॉ. साल्क के योगदान को कभी नहीं भुलाया जा सकता। 
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