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मच्छर के काटने से होता है जापानी बुखार, जानें लक्षण और बचाव

Sat, 08 Sep 2018 09:35 AM IST
लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला
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Japanese encephalitis
डेंगू मलेरिया जैसी जानलेवा बीमारियों के अलावा मच्छर एक और ऐसी बीमारी फैलाते हैं जिसका सीधा असर रोगी के हाथ पैरों पर नहीं बल्कि रोगी के दिमाग पर पड़ता है। इतना ही नहीं इस बीमारी में मरीज को दौरा पड़ने के बाद वो कोमा तक में जा सकता है। जी हां इस बीमारी का नाम है जापानी बुखार। यह एक प्रकार का दिमागी बुखार है जो वाइरल संक्रमण की वजह से होता है। बता दें, यह एक खास किस्म के वायरस की वजह से होता है जो मच्छर या सूअर की वजह से होता है। इसके अलावा ये गंदगी से भी उत्पन्न हो सकता है। 
 
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headache
जापानी बुखार का वायरस शरीर के संपर्क में आते ही सबसे पहले सीधे दिमाग पर असर करता है। दिमाग में इस वायरस के पहुंचते ही ये रोगी के सोचने, समझने, देखने और सुनने की क्षमता को प्रभावित कर देता है। इस वायरस में ज्यादातर 1 से 14 साल के बच्चे और 65 वर्ष से ज्यादा के लोग ही चपेट में आते हैं। गौर करने वाली बात यह है कि इस बीमारी का प्रकोप सबसे ज्यादा साल के इन तीन महीनों में अगस्त, सितंबर और अक्टूबर में अधिक बना रहता है।
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Japanese encephalitis
मच्छर से पैदा होने वाले इस वायरस का नाम अमरीका के विस्कॉन्सिन राज्य के ला क्रोसे शहर के नाम पर पड़ा, जहां पहली बार 1963 में, इसका पता चला था। यह एक दुर्लभ बीमारी है। इस बीमारी में पीड़ित व्यक्ति को बुखार, सिरदर्द, उल्टी, थकान और सुस्ती रहती है। इस बीमारी के गंभीर होने पर कब्ज, बेहोशी, कोमा और लकवे के साथ यह लिंफटिक फाइलेरिया या हाथीपांव तक के शिकार हो सकते हैं। इस बीमारी के लार्वा के कृमि बनने में करीब एक साल का समय लगता है। 

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सिर दर्द
बीमारी के लक्षण 
-
तेज बुखार 
-सिरदर्द 
-गर्दन में जकड़न 
-कमजोरी 
-उल्टी होना 
-हमेशा सुस्त रहना 
-भूख कम लगना 
-अतिसंवेदनशील होना 
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healthy food
ऐसे करें बचाव 
-गंदे पानी के संपर्क में आने से बचें 
-मच्छरों से बचाव के लिए घर के आसपास पानी न जमा होने दें 
-बारिश के मौसम में बच्चों को बेहतर खान-पान दें 
-मच्छरदानी या कीटनाशक दवा का उपयोग करें 
-बच्चों को पूरे कपड़े पहनाएं ताकि शरीर का हर हिस्सा ढका रहे 
-इन्सेफेलाइटिस से बचने के लिए टीकाकरण भी मौजूद है
 
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