Side Effects of Using Folded Pillow: रात में अच्छी नींद के लिए तकिया बहुत जरूरी है, लेकिन क्या आप भी ज्यादा ऊंचा करने के चक्कर में तकिए को मोड़ कर सोते हैं? अगर हां, तो यह आदत आपकी सेहत के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। अक्सर लोग गर्दन को सपोर्ट देने या मोबाइल देखते हुए दोहरे तकिए का इस्तेमाल करते हैं, लेकिन डॉक्टरों के अनुसार तकिए को फोल्ड करने से शरीर में तमाम दिक्कतें बढ़ जाती हैं। अगर आपको इन दिक्कतों की जानकारी नहीं है तो इस लेख को आखिर तक पढ़ें। यहां हम आपको इसके नुकसान बताएंगे, ताकि जब आप रात को सोएं, तो अपने तकिए का खास ध्यान रखें।
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तकिया मोड़कर सोने के क्या नुकसान हैं?
- फोटो : AI
1. गर्दन में अकड़न और सर्वाइकल का खतरा
जब आप तकिए को मोड़कर सोते हैं तो आपकी गर्दन की ऊंचाई 4-6 इंच तक बढ़ जाती है और गर्दन 45 डिग्री तक आगे की ओर झुक जाती है। इस स्थिति में पूरी रात गर्दन की मांसपेशियों और सर्वाइकल नसों पर लगातार खिंचाव बना रहता है। ब्लड सर्कुलेशन सही से नहीं हो पाता, जिससे सुबह उठते ही गर्दन जाम लगती है, घुमाने में दर्द होता है। रोज-रोज ऐसा होने से सर्वाइकल स्पॉन्डिलाइटिस और गर्दन की डिस्क में गैप की समस्या शुरू हो सकती है।
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2. कमर और पीठ दर्द की बड़ी वजह
हमारी रीढ़ की हड्डी का आकार अंग्रेजी के 'S' अक्षर जैसा होता है, सोते वक्त इसका सीधा रहना बहुत जरूरी है। फोल्ड किया हुआ तकिया सिर को बहुत ज्यादा ऊपर उठा देता है, जिससे पीठ का ऊपरी हिस्सा झुक जाता है और लोअर बैक पर दबाव पड़ता है। इस गलत अलाइनमेंट के कारण रीढ़ की हड्डियों के बीच की डिस्क पर प्रेशर आता है। लंबे समय तक ऐसा करने से क्रॉनिक बैक पेन, कमर में जकड़न और स्लिप डिस्क जैसी गंभीर समस्या हो सकती है।
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3. सांस लेने में दिक्कत और खर्राटों का कारण
तकिया मोड़कर सोने से आपकी ठुड्डी छाती की तरफ झुक जाती है, जिससे गले का एयरवे यानी सांस की नली आधी दब जाती है। इससे फेफड़ों तक पूरी ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती। शरीर को ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है, जिससे नींद के दौरान खर्राटे तेज हो जाते हैं। जिन लोगों को पहले से अस्थमा या स्लीप एपनिया है, उनके लिए यह आदत और भी ज्यादा खतरनाक है, रात में घुटन और बेचैनी बढ़ सकती है।
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4. कंधे और हाथों का सुन्न हो जाना
ऊंचे तकिए पर सोने से कंधे अंदर की ओर सिकुड़ जाते हैं और कंधे से हाथ तक जाने वाली नसें दब जाती हैं। पूरी रात एक ही पोजीशन में दबाव रहने से हाथों में ब्लड सप्लाई रुक-रुक कर होती है। इसी वजह से सुबह उठने पर कंधा भारी लगना, हाथ का सुन्न पड़ जाना, उंगलियों में सुई चुभने जैसी झनझनाहट महसूस होती है। अगर इसे नजरअंदाज किया तो धीरे-धीरे कंधे में फ्रोजन शोल्डर की दिक्कत भी शुरू हो सकती है।
एक्सपर्ट्स के अनुसार हमेशा एक ही तकिया इस्तेमाल करें जो ज्यादा सख्त या ज्यादा सॉफ्ट न हो, मीडियम सॉफ्ट और गर्दन के कर्व को सपोर्ट करने वाला हो। आदर्श तकिए की ऊंचाई 4 से 6 इंच होनी चाहिए। सोते वक्त आपकी गर्दन, कंधे और रीढ़ की हड्डी एक सीधी लाइन में होनी चाहिए। कोशिश करें कि पीठ के बल या करवट लेकर सोएं, पेट के बल सोने से पूरी तरह बचें। अपने तकिए को हर 6 महीने में धूप दिखाएं और 1 से 2 साल में बदल देना चाहिए।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।