फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Health Tips: एल्युमिनियम फॉयल में खाना पैक करना कितना सुरक्षित? जानें क्या कहती है स्टडी

Sun, 15 Feb 2026 01:45 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Side Effects Of Aluminum Foil: आज के समय एल्युमिनियम फॉयल में खाना पैक करना बहुत आम बात हो गया है, मगर क्या आप जानते हैं कि ये आदत आपके सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।  
विज्ञापन
1 of 5
एल्युमीनियम फॉयल - फोटो : Adobe Stock
Is Aluminum Foil Safe For Food: आज के दौर में ज्यादातर लोग किचन में गरमा-गरम रोटी या लंच बॉक्स में पराठों को लपेटने के लिए एल्युमिनियम फॉयल का इस्तेमाल करते हैं। अक्सर लोगों को लगता है कि इसमें खाना सुरक्षित और ताजा रहता है, लेकिन कुछ स्टडी के मुताबिक एल्युमिनियम फॉयल में खाना रखना सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। दरअसल जब भी आप अत्यधिक गर्म या खट्टा खाना इस फॉयल में पैक करते हैं, तो एल्युमिनियम के सूक्ष्म कण घुलकर आपके भोजन का हिस्सा बन जाते हैं।

इस प्रक्रिया को विज्ञान की भाषा में 'लीचिंग' कहा जाता है, जो धीरे-धीरे हमारे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को नुकसान पहुंचा सकती है। लंबे समय तक एल्युमिनियम युक्त भोजन का सेवन न केवल किडनी और लिवर पर दबाव डालता है, बल्कि यह मस्तिष्क की सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने वाले लोगों के लिए यह समझना जरूरी है कि जिसे हम सुविधा समझ रहे हैं, वह कहीं अनजाने में हमारी सेहत से खिलवाड़ तो नहीं कर रहा? आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
एल्युमीनियम फॉयल में खाना रखना कितना खतरनाक? - फोटो : Adobe Stock
क्या कहते हैं अध्ययन? 
विभिन्न शोधों और प्रयोगशाला परीक्षणों में एल्युमिनियम फॉयल के उपयोग को लेकर कुछ चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं-
  • लीचिंग की प्रक्रिया: गर्म खाने के संपर्क में आते ही एल्युमिनियम भोजन में घुलने लगता है।
  • अत्यधिक मात्रा: एक स्टडी के अनुसार खट्टे और मसालेदार भोजन में एल्युमिनियम का रिसाव सामान्य से कहीं अधिक होता है।
  • स्वास्थ्य जोखिम: शरीर में एल्युमिनियम की अधिकता हड्डियों को कमजोर करने और अल्जाइमर जैसी भूलने की बीमारी का कारण बन सकती है।

ये भी पढ़ें- Cancer Risk: हर साल भारत में 50 हजार बच्चे हो रहे कैंसर का शिकार, जानिए किस कैंसर का खतरा सबसे ज्यादा
 
विज्ञापन

3 of 5
एल्युमीनियम फॉयल - फोटो : Adobe Stock
क्यों बढ़ जाता है स्वास्थ्य का खतरा?
भोजन में एल्युमिनियम के मिलने के पीछे मुख्य रूप से रासायनिक प्रतिक्रियाएं जिम्मेदार होती हैं-
  • हाई टेंपरेचर: भोजन जितना अधिक गर्म होगा, फॉयल से एल्युमिनियम के कण उतनी ही तेजी से बाहर निकलेंगे।
  • अम्लीय खाद्य पदार्थ: टमाटर, नींबू या सिरके वाले भोजन एल्युमिनियम के साथ तुरंत प्रतिक्रिया करते हैं।
  • धातु का संचय: हमारा शरीर बहुत कम मात्रा में एल्युमिनियम को बाहर निकाल पाता है, बाकी शरीर के ऊतकों में जमा होने लगता है।
 

4 of 5
एल्युमीनियम फॉयल में खाना रखना कितना खतरनाक? - फोटो : Adobe Stock
बचाव के लिए क्या हैं सुरक्षित विकल्प?
विशेषज्ञों का मानना है कि सावधानी बरतकर हम इस खतरे को कम कर सकते हैं। भोजन पैक करने के लिए एल्युमिनियम फॉयल की जगह 'बटर पेपर' या सूती कपड़े का इस्तेमाल सबसे सुरक्षित माना जाता है। अगर आपको फॉयल का उपयोग करना ही है, तो खाना पूरी तरह ठंडा होने के बाद ही उसे पैक करें। इसके अलावा, कभी भी एल्युमिनियम फॉयल में लपेटकर खाना ओवन में गर्म न करें, क्योंकि अधिक तापमान खतरे को कई गुना बढ़ा देता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
एल्युमीनियम फॉयल में खाना रखना कितना खतरनाक? - फोटो : Adobe Stock
सेहत के प्रति जागरूकता ही बचाव है
तकनीक और सुविधा के इस दौर में हमें इस मामले में अपनी पारंपरिक आदतों की ओर लौटने की जरूरत है। एल्युमिनियम फॉयल का सीमित उपयोग और सही जानकारी ही हमें इससे होने वाली बीमारियों से बचा सकती है। अपने परिवार के स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और छोटी-छोटी सावधानियों को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं। ध्यान रखें आज का एक छोटा सा बदलाव कल की बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं से आपकी रक्षा कर सकता है।

स्रोत और संदर्भ 
Wrapping food in aluminum foil can be harmful
The Health Effects of Aluminum Exposure
Effects of different pH, temperature and foils on aluminum leaching from baked fish 

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें