Packaged Juice Side Effects: इस लेख में जानें कि पैकेट वाला जूस कितना हेल्दी है, इसमें मौजूद शुगर सेहत पर कैसे असर डाल सकती है और जूस की जगह पूरा फल खाना क्यों बेहतर विकल्प माना जाता है।
Packaged Juice Side Effects: पैकेट वाला फ्रूट जूस अक्सर हेल्दी ड्रिंक के तौर पर देखा जाता है। सुबह नाश्ते के साथ या बच्चों के टिफिन में इसे शामिल करना कई घरों में आम है। लेकिन पैकेट पर लिखे ‘फ्रूट जूस’ या ‘100% जूस’ को देखकर इसे ताजे फल का विकल्प मान लेना सही नहीं है।
पैक्ड जूस में प्राकृतिक फल के साथ उसकी प्रोसेसिंग, फाइबर की मात्रा और शुगर कंटेंट को समझना भी जरूरी है। खासकर तब, जब एक छोटे पैकेट में काफी मात्रा में प्राकृतिक या अतिरिक्त शुगर मौजूद हो सकती है। पूरे फल और जूस के बीच सबसे बड़ा अंतर फाइबर और खाने की मात्रा को लेकर होता है। पूरा फल खाने पर चबाने और फाइबर की वजह से पेट लंबे समय तक भरा महसूस हो सकता है, जबकि जूस आसानी से और जल्दी पी लिया जाता है।
ऐसे में रोजाना पैकेट वाला जूस पीने से पहले लेबल पढ़ना और इसकी मात्रा पर ध्यान देना जरूरी है। आइए जानते हैं पैक्ड जूस से जुड़ी जरूरी बातें।
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पैकेट वाला जूस कितना हेल्दी?
- फोटो : AI
पैकेट वाले जूस में कितनी चीनी होती है?
पैक्ड जूस में चीनी की मात्रा ब्रांड, फ्लेवर और पैक के आकार के अनुसार अलग-अलग होती है। इसलिए हर जूस में एक जैसी मात्रा मानना सही नहीं है। जूस खरीदते समय लेबल पर कुल शुगर और ऐडेड शुगर की मात्रा जरूर देखें। अगर किसी 200 ml ड्रिंक में 24 ग्राम शुगर है, तो यह करीब 6 चम्मच चीनी के बराबर होती है। हालांकि प्राकृतिक रूप से मौजूद शुगर और अलग से डाली गई चीनी को अलग-अलग समझना जरूरी है।
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पूरे फल और जूस में क्या अंतर है?
पूरा फल फाइबर का अच्छा स्रोत होता है। फाइबर पाचन को धीमा करने और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद करता है। वहीं जूस में फल का फाइबर कम या काफी हद तक अलग हो सकता है, खासकर जब जूस को छानकर तैयार किया गया हो। इसी वजह से रोजाना फल खाने को प्राथमिकता देना बेहतर माना जाता है। फल खाने से चबाने की प्रक्रिया भी होती है, जिससे एक ही समय में बहुत अधिक मात्रा में शुगर लेना मुश्किल होता है।
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क्या पैकेट वाला जूस कोल्ड ड्रिंक से ज्यादा खतरनाक है?
ऐसा कहना सही नहीं है कि हर पैकेट वाला जूस कोल्ड ड्रिंक से ज्यादा खतरनाक होता है। दोनों की पोषण संरचना अलग हो सकती है। कुछ जूस में प्राकृतिक पोषक तत्व मौजूद होते हैं, लेकिन उनमें शुगर भी काफी हो सकती है। इसलिए किसी भी ड्रिंक को सिर्फ ‘फ्रूट’ या ‘हेल्दी’ लिखे होने के आधार पर रोजाना बड़ी मात्रा में पीना सही नहीं है।
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बच्चों को पैकेट वाला जूस देना कितना सही?
बच्चों को रोजाना मीठे पेय देने की आदत उनकी कुल शुगर खपत बढ़ा सकती है। मीठे पेय की जगह बच्चों को पूरा फल और सामान्य पानी देना बेहतर विकल्प हो सकता है। जूस देना हो तो मात्रा और लेबल पर ध्यान देना जरूरी है।
सबसे बेहतर विकल्प पूरा फल खाना है। अगर जूस पीना पसंद है तो बिना अतिरिक्त चीनी वाला जूस चुनें और मात्रा सीमित रखें। पैक खरीदते समय Nutrition Facts लेबल पर कुल शुगर, Added Sugar और सर्विंग साइज जरूर देखें। डायबिटीज, मोटापे या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे लोगों को अपनी डाइट में मीठे पेय शामिल करने से पहले डॉक्टर या डाइटीशियन की सलाह लेना बेहतर है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।