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Health Tips: क्या हर किसी के लिए 8 घंटे सोना जरूरी है? जानें 'स्लीप साइकिल' का साइंस

Tue, 30 Sep 2025 08:30 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

क्या 8 घंटे सोने के बाद भी आप थका हुआ महसूस करते हैं? अगर हां तो आपको ये लेख जरूर पढ़ना चाहिए। आइए इस लेख में विस्तार से जानते हैं कि स्लिप साइकिल का क्या महत्व है?

 
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गहरी नींद - फोटो : adobe stock
Is 8 Hours of Sleep a Myth?: बचपन से ही हमें सिखाया जाता है कि स्वस्थ रहने के लिए रोजाना 8 घंटे की नींद लेना अनिवार्य है। यह एक ऐसा नियम है जिसे लगभग हर कोई जानता है, लेकिन क्या यह हर किसी पर लागू होता है? आपने अक्सर महसूस किया होगा कि कभी-कभी 7 घंटे सोकर भी आप तरोताजा महसूस करते हैं, जबकि किसी दिन 8-9 घंटे सोने के बाद भी थकान और आलस बना रहता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार इसका कारण नींद के घंटे नहीं, बल्कि 'स्लीप साइकिल' का साइंस है। नींद की क्वालिटी कुल सोने के समय से कहीं ज्यादा महत्वपूर्ण है। यह समझना जरूरी है कि हमारी नींद एक सीधी रेखा में नहीं चलती, बल्कि यह कई चरणों के साइकिल में पूरी होती है।
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गहरी नींद - फोटो : adobe stock
क्या है स्लीप साइकिल का विज्ञान?
एक स्लीप साइकिल यानी नींद का चक्र लगभग 90 मिनट का होता है। जब हम सोते हैं, तो हमारा मस्तिष्क नींद के विभिन्न चरणों से गुजरता है। इसमें हल्की नींद, गहरी नींद और रैपिड आई मूवमेंट नींद शामिल है, जिसमें हम सपने देखते हैं। एक रात में हम ऐसे 4 से 6 चक्र पूरे करते हैं। शारीरिक और मानसिक रूप से तरोताजा महसूस करने के लिए इन चक्रों का पूरा होना जरूरी है।

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गहरी नींद - फोटो : adobe stock
क्यों जरूरी है गहरी नींद?
हर 90 मिनट के चक्र में 'गहरी नींद' का चरण सबसे महत्वपूर्ण होता है। इसी दौरान हमारा शरीर मांसपेशियों की मरम्मत करता है, ऊतकों को ठीक करता है और ग्रोथ हार्मोन जारी करता है। यदि आपकी नींद इस गहरी अवस्था के बीच में टूटती है, तो आप घंटों सोने के बावजूद थका हुआ और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं। इसी को 'स्लीप इनर्शिया' कहते हैं।

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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock
8 घंटे की जगह 7.5 घंटे क्यों हो सकते हैं बेहतर?
स्लीप साइकिल के 90 मिनट के सिद्धांत के अनुसार, 5 चक्र पूरे करने का मतलब है 450 मिनट, यानी 7.5 घंटे। जब आप 7.5 घंटे बाद उठते हैं, तो आप एक साइकिल के अंत में होते हैं, जो आमतौर पर हल्की नींद का चरण होता है, जिससे उठना आसान और ताजगी भरा होता है। जबकि 8 घंटे सोने का मतलब है कि आप अपनी छठी स्लीप साइकिल के बीच में, संभवतः गहरी नींद में, अलार्म से उठ रहे हैं, जिससे आपको थकान महसूस हो सकती है।

 
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सुबह की हेल्दी रूटीन - फोटो : adobe
कैसे करें अपनी नींद की प्लानिंग?
अपनी नींद की योजना घंटों के हिसाब से नहीं, बल्कि 90 मिनट के चक्र के हिसाब से करें। सोने का ऐसा समय चुनें कि आप 6 घंटे, 7.5 घंटे या 9 घंटे बाद उठ सकें। उदाहरण के लिए, यदि आपको सुबह 6 बजे उठना है, तो रात 10:30 बजे सोने की कोशिश करें ताकि आप 7.5 घंटे में 5 स्लीप साइकिल पूरी कर सकें। अंत में सबसे जरूरी यह है कि आप अपनी सुविधा के हिसाब से जागने सोने का समय चुनें और उतने ही चक्र पूरे करें जितने में आप सुबह तरोताजा महसूस कर सकें।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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