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International Men's Day 2022: मेनोपॉज़ से गुजरते हैं पुरुष भी, जानिए और रखिये ध्यान

Fri, 18 Nov 2022 10:52 PM IST
स्वाति शैवाल लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पुरुषों के स्वास्थ्य से जुड़ी है यह कड़ी - फोटो : iStock
मेनोपॉज शब्द को सुनते ही सबसे पहली बात जो जेहन में आती है वह है महिलाओं की हेल्थ और उनके जीवन के एक महत्वपूर्ण पड़ाव से जुड़ी स्थिति की। मेनोपॉज महिलाओं के जीवन का वह पड़ाव है जहाँ उनके जीवन की एक और महत्वपूर्ण प्रक्रिया 'पीरियड्स' का अंत होता है। इससे संबंधित कई बातें हैं जिनपर अक्सर चर्चा की जाती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि मेनोपॉज़ जैसी ही स्थिति से पुरुष भी गुजरते हैं?

मेल मेनोपॉज़ की स्थिति को लेकर भले ही विशेषज्ञों के बीच कई बहस और चर्चाएं जारी हों लेकिन इस एक बात को लेकर विशेषज्ञ भी सहमत हैं कि हार्मोन्स में उथल पुथल के साक्षी तो पुरुष भी बनते हैं। मेल मेनोपॉज़ कुछ ऐसी ही स्थिति है, जहाँ हार्मोन्स में असंतुलन सामने आता है। यही कारण है कि इसके संदर्भ में भी पुरुषों की सेहत को लेकर बातें होने लगी हैं। इस स्थिति के लक्षण भी उभरते हैं और इसके लिए बकायदा इलाज भी मौजूद है। जरूरत है केवल समय पर ध्यान देकर स्थिति को नियंत्रण में लाने और उससे भी अधिक पुरुषों को समझने और उनका साथ देने की। जानिए क्या है मेल मेनोपॉज़ और इस स्थिति में किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। 
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उम्र के बढ़ने के साथ सामने आती समस्याएं - फोटो : istock
सामान्य है उम्र के साथ चीजों का बदलना 

प्रकृति ने हमें जो शरीर दिया है वह एक रिदम या चक्र में चलता है। समय के साथ उसमें परिवर्तन होते जाते हैं और उम्र बढ़ने के साथ ये परिवर्तन तेजी से होते हैं। महिलाओं की तरह ही पुरुष भी कमजोर होती आँखों की रौशनी, जोड़ों की तकलीफों, पाचन क्षमता में कमजोरी, दांत गिरने आदि की स्थिति से गुजरते हैं। हां, इन परिवर्तनों के होने की उम्र पर कई चीजों का असर हो सकता है। इसलिए कुछ लोगों में ये परिवर्तन जल्दी दिखाई देने लग सकते हैं तो कुछ में देर से। हार्मोनल परिवर्तन भी इस प्रक्रिया का हिस्सा हैं। यही परिवर्तन पुरुषों में मेनोपॉज़ जैसी स्थिति को जन्म देते हैं। 
 
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धीरे धीरे सामने आते हैं लक्षण - फोटो : Pixabay
क्या है मेल मेनोपॉज़?

महिलाओं में होने वाली मेनोपॉज़ की प्रक्रिया के लक्षण एकदम स्पष्टता से सामने आते हैं। इसलिए हमेशा इस एंगल पर चर्चा भी बहुत होती है। महिलाएं चूंकि उम्र के एक बड़े हिस्से में पीरियड्स की प्रक्रिया से गुजरती हैं इसलिए उनके मेनोपॉज़ को लेकर बहुत स्पष्टता होती है। पुरुषों को पीरियड्स नहीं आते इसलिए पुरुषों में यह इतना स्पष्ट नहीं होता। पुरुषों में उम्र के साथ होने वाले हार्मोनल असंतुलन को ही इससे जोड़कर देखा जाता है। लगभग वैसे ही जैसे महिलाओं में मेनोपॉज़ के दौरान होने वाला हार्मोनल असंतुलन। यही कारण है कि पुरुषों और महिलाओं में कुछ लक्षण समान भी दिख सकते हैं। 

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शरीर में होती कमी देती है संकेत - फोटो : iStock
एण्ड्रोजन या टेस्टोस्टेरॉन का घटना 

पुरुषों के शरीर का एक मुख्य हार्मोन होता है टेस्टोस्टेरॉन यानी एण्ड्रोजन। इस हार्मोन का उत्पादन पुरुषों में टेस्टिकल्स में होता है। यह हार्मोन प्रजनन के मामले में तो महत्वपूर्ण भूमिका निभाता ही है, इसके अलावा यह बोन डेंसिटी बनाये रखने, पूरे शरीर में फैट का डिस्ट्रीब्यूशन करने, मांसपेशियों को मजबूती देने, लाल रक्त कोशिकाओं के उत्पादन में मदद करने आदि में भी सहायता करता है। उम्र के साथ इस हार्मोन के स्तर में कमी आ जाने से इन तमाम फायदों का मिलना कम होने लगता है। कई बार उम्र के अलावा डायबिटीज जैसी स्थितियां भी इस हार्मोन की कमी का कारण बन जाती हैं। यही कमी मेल मेनोपॉज़ के रूप में देखी जाती है। 
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लक्षणों पर रखें नजर
ये हो सकते हैं लक्षण 

एक खास बात यह भी है कि महिलाओं की तरह पुरुषों में एकदम हार्मोन का उत्पादन रुकता नहीं है। टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में कमी धीरे धीरे आती है। इसलिए लक्षण भी उसी तरह उभरते हैं। कुछ पुरुषों में यह स्थिति 45 की उम्र के बाद भी बन सकती है तो कुछ में 70 साल तक नहीं बनती। मेल मेनोपॉज़ के कुछ लक्षण महिलाओं में होने वाले लक्षण जैसे भी हो सकते हैं। इसमें सबसे आम है-
* थकान 
* कमजोरी
* डिप्रेशन जैसी स्थिति 
* यौन संबंधों के लिए अनिच्छा 
इसके अलावा हॉट फ्लैशेस, ब्रेस्ट व उसके आस पास सूजन या असहजता, इरेक्टाइल डिस्फंक्शन आदि लक्षण भी सामने आ सकते हैं। ये लक्षण अक्सर नजरअंदाज कर दिए जाते हैं क्योंकि एक तो अधिकांश लोगों को मेल मेनोपॉज़ की जानकारी ही नहीं होती और दूसरे इन लक्षणों को अक्सर पुरुषों के व्यवहार से जोड़कर देखा जाता है न कि स्वास्थ्य से। कुछ पुरुषों में लक्षण उभरकर सामने आते ही नहीं। 
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नियमित व्यायाम देता है राहत - फोटो : iStock
ध्यान रखने लायक बातें 

* 40 वर्ष की उम्र के बाद नियमित चैकअप जरूरी है। इससे आपको शरीर की स्थिति का पता चलता रहेगा

* यदि डॉक्टर आपमें टेस्टोस्टेरॉन के स्तर में कमी डायग्नोज करते हैं तो डॉक्टर से पूछें कि यह सामान्य इलाज से ठीक हो सकेगी या इसके लिए हार्मोन थैरेपी लेनी होगी

* हार्मोन थैरेपी कुछ मामलों में बहुत मददगार हो सकती है लेकिन इसके साथ कई दिक्कतें भी जुड़ी हैं। इसलिए इसका उपयोग बहुत सोच समझकर और विशेषज्ञ से परामर्श से ही करें 

* डिप्रेशन, तनाव, कॉन्सन्ट्रेशन में कमी, फोकस न कर पाना, चिड़चिड़ापन, आदि जैसे लक्षण भी सामने आते हैं, इनको लेकर सतर्क रहें और काउंसिलिंग या थैरेपी लें 

* नियमित व्यायाम, संतुलित व पौष्टिक खान-पान व पूरी नींद लें। इससे शरीर को भीतर और बाहर दोनों स्तरों पर मजबूत बनाने में मदद मिलेगी 
 
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बढ़ती उम्र में भी रहें स्वस्थ - फोटो : Pixabay
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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