आज (26 जून) अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस है। नशे की आदत हमारी पूरी सेहत के लिए खतरनाक मानी जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नशा शरीर का नाश करती है। ये ऐसा जहर जो धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला कर देता है, दिमाग की सोचने-समझने की क्षमता को कम करता है यहां तक कि आपके रिश्तों में भी दरार डाल देता है। चिंता की बात ये है कि देश में बड़ी संख्या में लोग इसका शिकार हैं और ये आदत किशोरों में भी बढ़ती देखी जा रही है।
- अंतरराष्ट्रीय नशामुक्ति दिवस पर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 'नशामुक्त भारत' का संकल्प दोहराया। शाह ने ड्रग तस्करी पर सख्ती और नशे के शिकार लोगों के पुनर्वास पर जोर दिया।
- उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर लिखा 'मैं उन विश्वविद्यालयों, शिक्षण संस्थानों और संगठनों की सराहना करता हूं जो इस अभियान को सक्रिय रूप से आगे बढ़ा रहे हैं। उनके प्रयास एक मजबूत, स्वस्थ और नशा-मुक्त भारत बनाने की दिशा में सार्थक योगदान दे रहे हैं।
आज नशा केवल शराब, सिगरेट या ड्रग्स तक सीमित नहीं रह गया है। सिंथेटिक ड्रग्स, नशीली गोलियां, वेपिंग, निकोटिन पाउच और अन्य मादक पदार्थों का इस्तेमाल कम उम्र के किशोरों और युवाओं में भी तेजी से बढ़ रहा है। ये गंभीर खतरे का कारण बन सकते हैं।