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अलर्ट: वेट लॉस के चक्कर में सेहत से खिलवाड़ तो नहीं कर रहे हैं आप, जान लें इंटरमिटेंट फास्टिंग के ये नुकसान

Mon, 14 Sep 2026 10:20 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंटरमिटेंट फास्टिंग वजन कम करने में मदद कर सकती है लेकिन यह हर किसी के लिए सुरक्षित नहीं है। डायबिटीज, अन्य स्वास्थ्य समस्याओं या नियमित दवाइयां लेने वालों को डॉक्टर की सलाह जरूरी लेनी चाहिए।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग - फोटो : Amarujala.com
वजन कम करने के लिए आजकल लोग तरह-तरह के तरीके आजमा रहे हैं। इनमें इंटरमिटेंट फास्टिंग भी काफी लोकप्रिय है। इसमें खाने के समय को सीमित किया जाता है और दिन के कुछ घंटों में ही भोजन किया जाता है। माना जाता रहा है कि इससे वजन घटाने में मदद मिलती है। इतनी ही नहीं, कुछ अध्ययनों में इससे ब्लड प्रेशर और आराम की स्थिति में दिल की धड़कन कम होने जैसे फायदे भी सामने आए हैं। लेकिन क्या वास्तव में इंटरमिटेंट फास्टिंग हर किसी के लिए सही है? 

ये सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि कुछ रिपोर्ट्स में अलर्ट किया जा रहा है कि इससे कुछ स्थितियों में फायदे की जगह नुकसान हो सकता है। खासकर अगर आपको पहले से कोई बीमारी है या आप नियमित रूप से दवाइयां लेते हैं, तो बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक खाना छोड़ना नुकसानदायक हो सकता है।

इसके अलावा लंबे समय तक खाली पेट रहने पर सिरदर्द, कमजोरी और ब्लड शुगर से जुड़ी परेशानी हो सकती है। इसलिए वजन घटाने के चक्कर में इसे आंख बंद करके अपनाना सही नहीं है।
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इंटरमिटेंट फास्टिंग - फोटो : Amarujala.com/AI
इंटरमिटेंट फास्टिंग से क्या फायदे हो सकते हैं?

इंटरमिटेंट फास्टिंग का सबसे ज्यादा इस्तेमाल वजन कम करने के लिए किया जाता है। जब खाने का समय सीमित होता है तो आपके दिन की टोटल कैलोरी कम हो सकती है, जिससे वजन घटाने में मदद मिल सकती है।
 
  • कुछ शोध में यह भी पाया गया है कि इंटरमिटेंट फास्टिंग से ब्लड प्रेशर और आराम की स्थिति में दिल की धड़कन को कम करने में मदद मिल सकती है। 
  • एक अध्ययन में 16 घंटे के उपवास वाले पुरुषों में फैट कम होने के संकेत मिले थे। हालांकि, ऐसे परिणाम जानवरों पर हुए अध्ययनों में भी देखे गए हैं, इसलिए इन्हें हर व्यक्ति पर सीधे लागू नहीं किया जा सकता।
  • यानी इंटरमिटेंट फास्टिंग कुछ लोगों के लिए फायदेमंद हो सकती है, लेकिन इसका असर व्यक्ति की उम्र, खान-पान, वजन और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करता है।
     
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तनाव-सिरदर्द की समस्या - फोटो : Freepik.com
लंबे समय तक खाली पेट रहने से हो सकता है सिरदर्द

इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के बाद कुछ लोगों को सिरदर्द की शिकायत हो सकती है। इसकी एक वजह लंबे समय तक खाना न खाना हो माना जाता है। जब शरीर को लंबे समय तक भोजन नहीं मिलता तो कुछ लोगों में सिरदर्द या चक्कर जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं।
 
  • 2020 में प्रकाशित एक समीक्षा में भी इंटरमिटेंट फास्टिंग करने वाले लोगों में सिरदर्द की समस्या सामने आई थी। हालांकि हर व्यक्ति में इसकी गंभीरता एक जैसी नहीं होती। किसी को हल्का सिरदर्द हो सकता है तो किसी में परेशानी ज्यादा महसूस हो सकती है।
  • अगर फास्टिंग के दौरान बार-बार सिरदर्द हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

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डायबिटीज और फास्टिंग - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज है तो बिना सलाह के फास्टिंग न करें

डायबिटीज वाले लोगों के लिए इंटरमिटेंट फास्टिंग थोड़ी जटिल हो सकती है। लंबे समय तक खाना न खाने से ब्लड शुगर में उतार-चढ़ाव हो सकता है। खासकर जो लोग ब्लड शुगर कम करने वाली दवाइयां या इंसुलिन लेते हैं, उनमें हाइपोग्लाइसीमिया यानी ब्लड शुगर बहुत कम होने का खतरा बढ़ सकता है।

इसलिए डायबिटीज के मरीजों को सिर्फ वजन कम करने के लिए अपने मन से फास्टिंग शुरू नहीं करनी चाहिए। पहले अपने डॉक्टर से बात करके यह समझना चाहिए कि आपके लिए खाने का कौन सा पैटर्न सुरक्षित है?
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दवाएं लेते हैं तो न करें फास्टिंग - फोटो : Freepik.com
दवाइयां लेते हैं तो भी सावधानी जरूरी

अगर आप ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या किसी दूसरी बीमारी की नियमित दवा लेते हैं, तो इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।
 
  • फास्टिंग के दौरान खाने का समय बदलने से कुछ दवाइयों को लेने का समय भी बदल सकता है। लंबे समय तक भोजन न लेने से कमजोरी, चक्कर या दूसरी परेशानी हो सकती है। कुछ दवाइयां भोजन के साथ लेने की जरूरत भी होती है।
  • इसलिए अगर आपको कोई बीमारी है या रोजाना दवा लेनी पड़ती है, तो खुद से इंटरमिटेंट फास्टिंग शुरू करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लें। वजन कम करना जरूरी है, लेकिन सुरक्षित तरीके से करना उससे भी ज्यादा जरूरी है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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