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Coronavirus: भारत में हुआ ऐसा तो 62 फीसदी कम हो जाएगा कोरोना संक्रमण

Sun, 29 Mar 2020 09:27 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Coronaindia - फोटो : PTI
कोरोना वायरस का संक्रमण दुनियाभर में बढ़ता ही जा रहा है। भारत समेत कई देशों में हर दिन कोरोना संक्रमण के नए मामले सामने आ रहे हैं। कोरोना से होने वाली मौतों का आंकड़ा भी हर दिन बढ़ रहा है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को रोकने के लिए सरकारें महत्वपूर्ण कदम उठा रही है। आने वाले समय में भी हर जरूरी कदम उठाने की तैयारी में है। इसी कड़ी में देश में 15 अप्रैल तक का लॉकडाउन घोषित किया गया है। लोगों से घरों में रहने की अपील की जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना संक्रमण काल खत्म होने में अभी वक्त लग सकता है। ऐसे में इस वायरस पर नियंत्रण के लिए लोगों की भूमिका अहम हो गई है। भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) कोरोना को लेकर कई तरह की स्टडी और रिसर्च कर रहा है। इसी बीच आई आईसीएमआर की ताजा स्टडी कुछ महत्वपूर्ण कदमों को जरूरी बता रही है। आइए जानते हैं इस बारे में:  
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Coronaindia - फोटो : PTI
आईसीएमआर की एक ताजा स्टडी में दावा किया गया है कि लॉकडाउन के दौरान लोगों के घरों में रहने का अगर सख्ती से पालन हो तो कोरोना संक्रमण के बढ़ते ग्राफ को काफी हद तक कम किया जा सकता है। कोरोना से जंग में देश भर में लागू लॉकडाउन का पालन करने में लोग अपनी अहम भूमिका का निर्वहन कर सकते हैं।
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आईसीएमआर की ओर से पिछले दिनों बताया गया था कि भारत में कोरोना वायरस अभी स्टेज-2 में है और स्टेज-3 की ओर बढ़ रहा है। स्टेज-3 में वायरस का कम्यूनिटी ट्रांसमिशन यानी सामुदायिक प्रसार होने लगता है और फिर नियंत्रण करना बहुत मुश्किल हो जाता है और हालात बेकाबू भी हो सकते हैं। इसे स्टेज-3 से रोकने के लिए ही तमाम जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं। 

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आईसीएमआर की स्टडी भी इस ओर इशारा कर रही है कि अगर लोग सख्ती के साथ क्वारंटीन, होम स्टे जैसे फॉर्मूले को अपनाएं तो इस कोरोना वायरस के अनुमानित संदिग्ध केसों में 62 फीसदी कमी आ सकती है। साथ ही पीक केसों की संख्या भी 89 फीसदी तक कम हो सकती है। लॉकडाउन ऐसी आपातकालीन व्यवस्था होती है, जिसके तहत सार्वजनिक यातायात, निजी प्रतिष्ठान, संस्थान वगैरह बंद कर दिए जाते हैं, हालांकि जरूरी सेवाओं को इससे छूट रहती है। 
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कोरोना वायरस - फोटो : PTI
देश में जब 24 मार्च को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लॉकडाउन की घोषणा की थी, तब भरोसा दिलाया था कि लोगों को जरूरी सेवाओं और सामानों की दिक्कत होने नहीं दी जाएगी। उन्होंने देशवासियों से इसका पालन करने की अपील की थी। स्वास्थ्य मंत्रालय के संयुक्त सचिव लव अग्रवाल ने प्रेस ब्रीफिंग में बताया था कि लॉकडाउन के दौरान जो भी कदम उठाए जा रहे हैं या आने वाले समय में उठाए जाएंगे, वे एपिडेमिक डिजीज एक्ट, डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट, आईपीसी और सीआरपीसी के तहत लिए जा रहे हैं।
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कोरोना वायरस - फोटो : social media
स्वास्थ्य मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि लॉकडाउन के दौरान बेहद जरूरी सेवाओं के अलावा अन्य चीजों को बंद किया जाएगा। इससे कोरोना वायरस संक्रमण के फैलने की दर कम की जा सकेगी। लॉकडाउन के दौरान जो भी मामले पॉजिटिव पाए जाएंगे, उन्हें नियंत्रित तरीके से मैनेज किया जा सकेगा।
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जागरुकता के लिए चेन्नई पुलिस का अनूठा तरीका( - फोटो : PTI
दुनिया के दूसरे देशों ने भी होम क्वारंटीन और लॉकडाउन अपना कर ही कोरोना वायरस पर नियंत्रण करने की कोशिश की है। सिंगापुर, हांगकांग और दक्षिण कोरिया ने समय रहते इसका सख्ती से प्रयोग किया। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी लॉकडाउन के साथ संक्रमितों की पहचान और सही तरीके से जांच को ही कोरोना वायरस से बड़ा बचाव माना है। भारत में फिलहाल 15 अप्रैल तक लॉकडाउन घोषित किया गया है और लोगों से इसका सख्ती से पालन करने की अपील की गई है।
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