डायबिटीज, वैश्विक स्तर पर बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों में से एक है। भारत के नजरिए से बात करें तो यहां यह खतरा काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओ की टीम ने देश में टाइप-1डायबिटीज के बढ़ते जोखिम को लेकर लोगों को अलर्ट किया है।द लैंसेट डायबिटीज एंड एंडोक्रिनोलॉजी जर्नल में प्रकाशित एक मॉडलिंग अध्ययन के मुताबिक साल 2021 में दुनियाभर में अनुमानित 84 लाख लोग इस प्रकार के डायबिटीज के शिकार हैं, 2040 तक यह संख्या बढ़कर 1.50 करोड़ से अधिक होने की आशंका है। भारत इस डायबिटीज के बढ़ते खतरे वाले शीर्ष 10 देशों में से एक है।
डायबिटीज मुख्यरूप से दो प्रकार का होता है, टाइप-1 और टाइप-2। टाइप-1 को इंसुलिन डिपेंडेंट डायबिटीज के रूप में जाना जाता है, जिसमें जीवनभर रोगी को इंसुलिन शॉट्स की आवश्यकता होती है।
अध्ययन की रिपोर्ट के मुताबिक भारत के अलावा अमेरिका, ब्राजील, चीन, जर्मनी, स्पेन, कनाडा, यूके, रूस और सऊदी अरब में भी इस डायबिटीज का जोखिम काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। आइए जानते हैं कि इस खतरे की समय रहते पहचान कैसे की जा सकती है, साथ ही इस प्रकार के डायबिटीज रोगियों को क्या करना चाहिए?