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Cancer Risk: युवाओं में तेजी से बढ़ रहे हैं कैंसर के मामले, वैज्ञानिकों ने बताई इसकी मुख्य वजह, आप भी जानिए

Mon, 21 Aug 2023 10:32 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : istock
कैंसर, वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं में से एक है, जिसके कारण हर साल लाखों लोगों की मौत हो जाती है। भले ही आधुनिक चिकित्सा पद्धति के चलते कैंसर का इलाज अब आसान हो गया है हालांकि अब भी इसका मृत्युदर बड़ा जोखिम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी उम्र और लिंग के लोगों को कैंसर हो सकता है। लाइफस्टाइल के साथ कई प्रकार की पर्यावरणीय समस्याओं के कारण इस रोग का जोखिम काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। हालिया रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने 40-50 की आयु वालों में तेजी से कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट किया है।

कैंसर के खतरों को जानने के लिए किए गए अध्ययन की एक रिपोर्ट जारी की गई है, जिसमें वैज्ञानिकों ने चिंता जताई है कि 50 वर्ष से कम आयु के लोगों में कैंसर का निदान होने की आशंका अधिक होती जा रही है। 2010 से 2019 तक इस आयु वालों में कैंसर के निदान की दर बढ़ती हुई रिपोर्ट की गई है। नौ वर्षों के दौरान प्रति एक लाख लोगों पर यह दर 100 से बढ़कर 103 हो गई है, जो संकेत देती है कि युवाओं में इस जानलेवा रोग का खतरा तेजी से बढ़ रहा है।
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युवा आबादी में बढ़ते कैंसर के मामले - फोटो : istock
युवाओं में बढ़ रहा है कैंसर का खतरा

जामा नेटवर्क ओपन में प्रकाशित अध्ययन के अनुसार यह वृद्धि कुछ प्रकार के कैंसर के मामलों में अधिक रही है। लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के साथ कई प्रकार की पर्यावरणीय स्थितियां कैंसर के खतरे को बढ़ाने वाली पाई गई हैं, जिनसे बचाव को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट करते हैं। युवा महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले सबसे अधिक देखे जा रहे हैं। शोधकर्तांओं ने यह भी कहा है कि महिलाओं में कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है।
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ब्रेस्ट कैंसर का खतरा - फोटो : istock
महिलाओं में जोखिम अधिक

इस अध्ययन के लिए शोधकर्ताओं ने 5.60 लाख से अधिक लोगों को शामिल किया। इसमें पाया गया है कि महिलाओं में कैंसर के निदान की आशंका अधिक देखी जा रही है, जबकि 50 वर्ष से कम आयु के पुरुषों में कैंसर की दर में 5% की गिरावट आई है। सबसे ज्यादा मामले  30 से 39 वर्ष के लोगों में देखे जा रहे हैं। कैंसर से पीड़ित युवा लोगों के लिए सबसे बड़ी चिंता यह है कि समय रहते इसका पता नहीं चल पाता है जिसके कारण कैंसर के फैलने का खतरा अधिक हो सकता है।

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पेट की समस्याओं का खतरा - फोटो : iStock
गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर में वृद्धि

अध्ययन की रिपोर्ट में पाया गया कि स्तन कैंसर युवा आबादी को प्रभावित करने वाला सबसे आम प्रकार का कैंसर बना हुआ है, जबकि गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल (जीआई) कैंसर में सबसे अधिक वृद्धि देखी गई है। जीआई कैंसर वाले लोगों की दर (कोलन कैंसर और अपेंडिक्स का कैंसर) में 15% की बढ़ोतरी देखी गई है। शोधकर्ता कहते हैं, जहां युवाओं में कैंसर की दर बढ़ रही है वहीं वृद्ध आबादी में इसे कम होते हुए भी देखा जा रहा है। 
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कैंसर के बढ़ते जोखिमों को लेकर अलर्ट - फोटो : istock
क्या कहते हैं शोधकर्ता?

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि, जिस तरह के आंकड़े देखे जा रहे हैं इसे ध्यान में रखते हुए युवा लोगों में कैंसर की वृद्धि के कारणों को समझा जाना बहुत आवश्यक है। अगर हम यह नहीं समझते हैं कि इस जोखिम का कारण क्या हैं और इसमें बदलाव के लिए प्रयास नहीं करते हैं तो इस बात का डर है कि जानलेवा कैंसर के कारण वैश्विक स्तर पर दबाव काफी अधिक हो सकता है। कैंसर हमेशा से बड़ी चिंता रही है, इस अध्ययन की रिपोर्ट ने इसके जोखिमों को और भी बढ़ा दिया है।

अध्ययन की रिपोर्ट में यह स्पष्ट नहीं है कि युवा लोगों में कैंसर की दर क्यों बढ़ रही है, लेकिन वैज्ञानिकों ने कुछ संभावित कारणों जैसे मोटापा, शराब और धूम्रपान, नींद की कमी, गतिहीन जीवनशैली और पर्यावरण में प्रदूषण को इसके लिए प्रमुख जोखिम कारक पाया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को कैंसर के जोखिमों को लेकर अलर्ट रहने की आवश्यकता है, अगर आपमें पहले से इसके जोखिम कारक हैं या कैंसर की फैमिली हिस्ट्री रही है तो डॉक्टर से मिलकर बचाव के उपायों के बारे में जानना और भी जरूरी हो जाता है।



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स्रोत और संदर्भ
Patterns in Cancer Incidence Among People Younger Than 50 Years in the US, 2010 to 2019


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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