प्रतीकात्मक तस्वीर
इलाज न होने पर अंसतुलन बढ़ता जाता है और आगे चलकर बांझपन की समस्या तक पैदा कर सकता है। गर्भाशय में बहुत सारे फॉलिकल या अंडे इकट्ठे हो जाते हैं। सामान्य तौर पर हर महीने एक अंडा बड़ा होकर फूटता है, जिससे हार्मोन का संतुलन बना रहता है। यह प्रक्रिया बंद हो जाने से प्रोजोस्ट्रान का बनना बंद हो जाता है और सिर्फ एंड्रोजन की मौजूदगी परेशानी पैदा करने लगती हैं। इसका नतीजा होता है पीरियड्स का अनियमित हो जाना, चेहरे पर बाल, मुहांसे और गर्भधारण में दिक्कत। आगे चलकर कैंसर का खतरा भी पैदा हो जाता है। जितना वेट ज्यादा होगा, उतनी इंसुलिन बनेगी।