चिकनगुनिया की समस्या
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गो मूत्र से चिकनगुनिया का इलाज
आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर शैली तोमर और उनकी टीम ने ये अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन आयुर्वेद से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी की मदद से परखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
- गो मूत्र अर्क ने लैब परीक्षणों में वायरल लोड यानी शरीर या सैंपल में मौजूद वायरस की संख्या को 90% से अधिक कम किया।
गौरतलब है कि भारत में समय-समय पर मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां, खासकर चिकनगुनिया लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनती हैं। अभी तक चिकनगुनिया के लिए कोई ऐसी दवा उपलब्ध नहीं है जो सीधे इस वायरस को खत्म कर सके। इसी वजह से वैज्ञानिक नए इलाज खोजने के लिए आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भी अध्ययन कर रहे हैं।