फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Mosquito Diseases: क्या गो मूत्र से ठीक होगा चिकनगुनिया? आईआईटी रुड़की के दावे ने खींचा लोगों का ध्यान

Mon, 22 Jun 2026 04:13 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Chikungunya Treatment: आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने दावा किया है कि आयुर्वेदिक गो मूत्र अर्क में ऐसे प्राकृतिक तत्व मिले हैं, जिन्होंने प्रयोगशाला में चिकनगुनिया वायरस के खिलाफ कारगर असर दिखाया। अर्क ने वायरल लोड को 90 प्रतिशत से अधिक कम किया। 
विज्ञापन
1 of 4
चिकनगुनिया कैसे ठीक होगा - फोटो : Amarujala.com/AI
बरसात का मौसम आते ही देशभर में मच्छरों के कारण होने वाली बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ जाता है। हर साल डेंगू-मलेरिया, चिकनगुनिया के हजारों मामले सामने आते हैं, गंभीर स्थितियों में कई लोगों की मौत भी हो जाती है। डेंगू और चिकनगुनिया जैसी बीमारियों का अब तक कोई पुख्ता इलाज भी नहीं है।

हालांकि इस दिशा में अब आईआईटी रुड़की के शोधकर्ताओं ने बड़ा दावा किया है। विशेषज्ञों ने कहा, गो मूत्र अर्क में ऐसे प्राकृतिक तत्व पाए गए हैं, जिन्होंने प्रयोगशाला में चिकनगुनिया वायरस के खिलाफ बेहतरीन असर दिखाया है। गो मूत्र के अर्क ने वायरल लोड़ को 90%  प्रतिशत तक कम करने में मदद की है। जबकि गो मूत्र से तैयार एक विशेष प्राकृतिक फॉर्मूलेशन ने 99.85 प्रतिशत तक वायरल लोड घटाने का परिणाम दिया। इन दावों के सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गई हैं। 

अब सवाल खड़े हो रहे हैं कि क्या वास्तव में गो मूत्र, मच्छरों के कारण होने वाली इस खतरनाक बीमारी में असरदार हो सकता है? आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
विज्ञापन

2 of 4
चिकनगुनिया की समस्या - फोटो : Freepik.com
गो मूत्र से चिकनगुनिया का इलाज

आईआईटी रुड़की के बायोसाइंसेज एंड बायोइंजीनियरिंग विभाग की प्रोफेसर शैली तोमर और उनकी टीम ने ये अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं का कहना है कि यह अध्ययन आयुर्वेद से जुड़े पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक विज्ञान और बायोटेक्नोलॉजी की मदद से परखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
 
  • गो मूत्र अर्क ने लैब परीक्षणों में वायरल लोड यानी शरीर या सैंपल में मौजूद वायरस की संख्या को 90% से अधिक कम किया।
 


गौरतलब है कि भारत में समय-समय पर मच्छरों से फैलने वाली बीमारियां, खासकर चिकनगुनिया लोगों के लिए बड़ी चुनौती बनती हैं। अभी तक चिकनगुनिया के लिए कोई ऐसी दवा उपलब्ध नहीं है जो सीधे इस वायरस को खत्म कर सके। इसी वजह से वैज्ञानिक नए इलाज खोजने के लिए आधुनिक चिकित्सा के साथ-साथ पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों पर भी अध्ययन कर रहे हैं।
विज्ञापन

3 of 4
चिकनगुनिया का खतरा - फोटो : Freepik.com
चिकनगुनिया और इसका खतरा

चिकनगुनिया एक वायरल बीमारी है जो चिकनगुनिया वायरस से संक्रमित मच्छरों से इंसानों में फैलती है। एडीज एजिप्टी और एडीज एल्बोपिक्टस जैसे मच्छरों को इस बीमारी का प्रमुख कारण माना जाता है।
 
  • चिकनगुनिया का संक्रमण तब होता है जब वायरस से संक्रमित मच्छर किसी इंसान को काटता है। यह वायरस एक इंसान से दूसरे इंसान में शारीरिक संपर्क या लार से नहीं फैलता।
  • इस वायरस से संक्रमित लोगों को बुखार के साथ और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण होते हैं, जो गंभीर हो सकते हैं। 
  • चिकनगुनिया के इलाज के लिए कोई खास दवा नहीं है। इलाज में रोगी के लक्षणों को मैनेज करने पर ध्यान दिया जाता है।
  • ज्यादातर लोग लगभग हफ्तेभर में बीमारी से ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों को जोड़ों में लंबे समय तक दर्द रह सकता है।
विज्ञापन

4 of 4
चिकनगुनिया में क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Adobe Stock
ठीक होने के बाद भी लंबे समय तक बने रहते हैं लक्षण

चिकनगुनिया बीमारी में मरीजों को तेज बुखार, जोड़ों-मांसपेशियों में असहनीय दर्द, सिरदर्द  और कमजोरी जैसी समस्याएं हो सकती हैं। कई मरीजों को ठीक होने के बाद भी जोड़ों का दर्द कई हफ्तों या महीनों तक बना रह सकता है।
 
  • फिलहाल इस बीमारी के लिए कोई एंटीवायरल दवा नहीं है। चिकनगुनिया होने पर इसके लक्षणों जैसे बुखार, दर्द और अन्य लक्षणों को ठीक करने के लिए दवाएं दी जाती हैं। 
  • ऐसे में यदि प्राकृतिक स्रोतों से ऐसे तत्व मिलते हैं जो वायरस के खिलाफ प्रभावी हों, तो भविष्य में नई दवाओं के विकास का रास्ता खुल सकता है।

आईआईटी रुड़की की टीम का कहना है कि यह शोध दिखाता है कि आयुर्वेद में बताए गए पारंपरिक पदार्थों का आधुनिक वैज्ञानिक तरीकों से परीक्षण किया जा सकता है। इससे यह समझने में मदद मिलती है कि उनमें मौजूद कौन से रासायनिक तत्व वास्तव में उपयोगी हो सकते हैं। हाालंकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह अध्ययन केवल प्रयोगशाला स्तर पर किया गया है, इंसानों पर नहीं।


--------------
स्रोत: 
IIT Roorkee Scientists Identify Antiviral Compounds in Ayurvedic Cow Urine Distillate Against Chikungunya virus: Ancient Ayurvedic Remedy Meets Modern Virology


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें