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गर्भावस्था में मधुमेह के मरीज इन बातों का रखें विशेष ख्याल, जच्चा-बच्चा दोनों रहेंगे स्वस्थ

Thu, 08 Apr 2021 12:44 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आपके बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है - फोटो : Social Media

डॉ अजय शुक्ला
एंडोक्राइनोलॉजिस्ट एंड डायबिटोलॉजिस्ट, हार्मोन इंडिया
डिग्री- एम.बी.बी.एस, एम.डी मेडिसीन (गोल्ड मेडल)
अनुभव- 12 वर्ष
Medically Reviewed by Dr.Ajay Shukla

हाई ब्लड ग्लूकोज लेवल गर्भावस्था के पहले सप्ताह से ही आपके बच्चे के स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकता है, इसका ये मतलब है कि आपको पता होने से पहले कि आप गर्भवती हैं ये आपके बच्चे को नुकसान पहुंचा सकता है। अगर आपको मधुमेह है और आप गर्भवती हैं, तो अपने मधुमेह को नियंत्रित रखने के लिए तुरंत अपने चिकित्सक से मिलें। बहुत जरूरी है कि इसके लिए चिकित्सक द्वारा सुझाए गए डायबिटीज मैनेजमेंट प्लान को आप अमल में लाएं। अगली स्लाइड्स से डॉ अजय शुक्ला से जानिए मधुमेह और गर्भावस्था के साथ में होने पर होने वाली समस्याओं और उपचार के बारे में।  

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चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बदलना होगा - फोटो : Social media

बदलना होगा डायबिटीज मैनेजमेंट प्लान
गर्भावस्था के दौरान हार्मोन्स में होने वाले बदलावों से ब्लड शुगर लेवल प्रभावित होता है इसलिए गर्भावस्था से पहले का जो डायबिटीज का प्लान है, उसे चिकित्सक के परामर्श के अनुसार बदलना होगा। अगर मां को वर्षों से मधुमेह है, तो उन्हें गर्भावस्था के दौरान अपना डाइट प्लान, शारीरिक गतिविधि, दिनचर्या और दवाइयों को बदलने की जरूरत हो सकती है। बच्चे की जन्म की नियत तारीख करीब आने पर भी डायबिटीज मैनेजमेंट प्लान बदला जा सकता है।

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गर्भावस्था में किडनी और आंखों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं - फोटो : Pixabay

गर्भावस्था के दौरान मधुमेह की वजह से होने वाली स्वास्थ्य समस्याएं
मधुमेह के होने से गर्भावस्था में किडनी और आंखों से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं। मां का रक्तचाप बढ़ने से प्रीक्लेम्प्सिया विकसित होने की संभावना बढ़ जाती है और गर्भावस्था की दूसरी छमाही में मां को यूरिन के माध्यम से प्रोटीन उत्सर्जन होने लगता है।

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पहले आठ सप्ताह के दौरान उसके लिए हानिकारक हो सकता है - फोटो : Pixabay

शिशु को इस तरह करता है प्रभावित 
हाई ब्लड शुगर लेवल शिशु के विकास के शुरुआती चरण से ही, यानी पहले आठ सप्ताह के दौरान उसके लिए हानिकारक हो सकता है। यह हृदय, रीढ़ और मस्तिष्क में विकार के रूप में जन्मजात विसंगतियां पैदा कर सकता है। यह बच्चे के बहुत जल्दी पैदा होने, बहुत अधिक वजनी, और जन्म के तुरंत बाद सांस लेने में समस्या होने या कम ब्लड शुगर लेवल जैसी समस्याओं की संभावना को भी बढ़ा सकता है।

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पूरा चेकअप करवाएं - फोटो : Social media

पूरा चेकअप अवश्य करवाएं
सबसे अहम बात यह है कि गर्भावस्था के पहले और इसके दौरान अपने ब्लड शुगर लेवल को सामान्य बनाए रखना बहुत जरूरी है। गर्भवती होने से पहले या जैसे ही आपको इसका पता चले, पूरा चेकअप करवाएं। गर्भावस्था के पहले, इसके दौरान और बाद में वजन को सामान्य बनाए रखने के लिए स्वस्थ और संतुलित भोजन लें। यदि पहले से आप कोई दवा ले रही हैं, तो अपने चिकित्सक को इसके बारे में अवश्य बताएं।

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ब्लड ग्लूकोज लेवल को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है - फोटो : social media
इन बीमारियों पर रखें नजर
हाई ब्लड प्रेशर, नेत्र रोग, हृदय और रक्त वाहिनियों से संबंधित रोग, नर्व डैमेज, किडनी से संबंधित रोग और थायराइड की समस्याओं पर नजर रखना आवश्यक है। शारीरिक रूप से सक्रिय रहने से आपको अपने ब्लड ग्लूकोज लेवल को संतुलित रखने में मदद मिल सकती है। यह आपके रक्तचाप और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को स्वस्थ सीमा में रखने, तनाव को दूर करने, हृदय और हड्डियों को मजबूत बनाने, मांसपेशियों की ताकत में सुधार करने और जोड़ों को लचीला रखने में भी मददगार साबित हो सकता है इसलिए सप्ताह में पांच दिन, रोजाना लगभग 30 मिनट एक्सरसाईज करें।

नोट- यह लेख हार्मोन इंडिया के एंडोक्राइनोलॉजिस्ट एवं डायबिटोलॉजिस्ट डॉक्टर अजय शुक्ला से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। डॉक्टर अजय शुक्ला पिछले 12 सालों से प्रैक्टिस कर रहे हैं। उन्होंने अपनी डिग्री एस.जी.पी.आई, लखनऊ से ली है।

अस्वीकरण- अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।

 

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