फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

आईसीएमआर ने बताया: एच1एन1 और फ्लू वायरस से बचाव के लिए कौन सी वैक्सीन लें? किन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत

Fri, 11 Sep 2026 08:21 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आईसीएमआर ने स्पष्ट किया है कि भारत में मौसमी फ्लू की वैक्सीन उपलब्ध है। नॉर्दर्न हेमिस्फियर वैक्सीन को प्राथमिकता दी गई है, लेकिन उपलब्ध न होने पर सदर्न हेमिस्फियर वैक्सीन भी ली जा सकती है। बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, अन्य बीमारियों वाले और कमजोर रोग प्रतिरोधक क्षमता वाले लोगों को विशेष सावधानी की सलाह दी गई है।
विज्ञापन
1 of 3
स्वाइन फ्लू की वैक्सीन - फोटो : Amarujala.com/AI
राजधानी दिल्ली-एनसीआर में बीते दिनों एच1एन1 यानी स्वाइन फ्लू का गंभीर असर देखा गया। सिर्फ दिल्ली ही नहीं दूसरे प्रदेशों जैसे मध्य-प्रदेश, उत्तर-प्रदेश, राजस्थान में भी इसके मरीजों के बढ़ने की खबरें सुर्खियों में थीं। कई स्थानों से संक्रमितों के मौत की खबरें भी सामने आईं, हालांकि अब संक्रमण का ग्राफ थोड़ा नीचे गिरता दिख रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, एच1एन1 भी इंफ्लूएंजा-ए वायरस का ही एक प्रकार है, जो समय-समय पर फैलता रहता है। वायरस अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए म्यूटेट भी होते रहते हैं, जिससे सामने आने वाले नए स्ट्रेन कुछ लोगों में संक्रमण की गंभीरता को बढ़ाने वाले हो सकते हैं। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि संक्रमण से बचाव के लिए सलाना दी जाने वाली इंफ्लूएंजा वैक्सीन संक्रमण के खतरे को कम करने में मददगार हो सकती है। स्वाइन फ्लू के खतरे से बचाने के लिए भी फ्लू की वैक्सीन को असरदार पाया गया है।

मौसम बदलने के साथ फ्लू संक्रमण का खतरा भी बढ़ने लग जाता है, ऐसे में लोगों के बीच एक सवाल बहुत कॉमन रहता है कि क्या इससे बचने के लिए हर साल टीके लगवाने चाहिए और अगर लगवाना है तो कौन-सा टीका सही रहेगा? आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते हैं।
विज्ञापन

2 of 3
फ्लू के संक्रमण को कैसे कम करें? - फोटो : Freepik.com
फ्लू के वैक्सीन उपलब्ध

भारत में स्वाइन फ्लू के जारी जोखिमों के बीच सोशल मीडिया और कुछ रिपोर्ट्स में यह दावा सामने आया कि भारत में फ्लू के टीके ही उपलब्ध नहीं हैं। इससे लोगों के बीच भ्रम और बीमारी को लेकर चिंता बढ़ने लगी। लेकिन अब भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद यानी आईसीएमआर ने इस पूरे मामले पर स्थिति साफ कर दी है।
 
  • आईसीएमआर ने स्पष्ट किया है कि भारत में मौसमी फ्लू की वैक्सीन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। वैसे तो इसके लिए नॉर्दर्न हेमिस्फियर वैक्सीन को प्राथमिकता दी जाती है, लेकिन अगर ये उपलब्ध न हो तो सदर्न हेमिस्फियर वैक्सीन भी ली जा सकती है।
  • बुजुर्गों, गर्भवती महिलाओं, अन्य बीमारियों वालों के अलावा कमजोर इम्युनिटी वालों को डॉक्टर की सलाह पर ये वैक्सीन लेनी चाहिए ताकि फ्लू के किसी भी स्ट्रेन से होने वाली जटिलताओं को कम किया जा सके।

गुरुवार (10 सितंबर) को आईसीएमआर ने बताया है कि भारत में मौसमी फ्लू से बचाव के लिए जरूरी वैक्सीन उपलब्ध हैं और इन्हें प्रमुख फार्मेसी के जरिए लिया जा सकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

3 of 3
फ्लू का टीकाकरण - फोटो : Freepik.com
फ्लू के लिए कौन सी वैक्सीन लें?

एक और अहम बात है, जिसकी वजह से लोगों का भ्रम और बढ़ा। करीब दो महीने पहले आईसीएमआर ने डॉक्टरों के लिए मौसमी फ्लू की वैक्सीन को लेकर एक नोट जारी किया था। यह डॉक्टरों को मरीजों के इलाज और वैक्सीन से जुड़े फैसलों में चिकित्सकीय मार्गदर्शन देने के लिए था। कुछ रिपोर्टों में इसी पुराने नोट को हाल की सलाह के तौर पर पेश किया जा रहा था।

अब सवाल उठता है कि आखिर आईसीएमआर ने कौन-सी वैक्सीन को प्राथमिकता दी है और कौन से दूसरे विकल्प मौजूद हैं?
 
  • आईसीएमआर के मुताबिक, नॉर्दर्न हेमिस्फीयर को मौसमी फ्लू वैक्सीन को प्राथमिकता दी जाती है। 
  • लेकिन अगर यह उपलब्ध न हो तो सदर्न हेमिस्फीयर वैक्सीन भी ली जा सकती है। 
  • दोनों मौजूदा समय में फैल रहे एच1एन1 वायरस के खिलाफ प्रभावी हैं।
  • नॉर्दर्न हेमिस्फियर वैक्सीन समेत उपयुक्त मौसमी फ्लू वैक्सीन भारत में प्रमुख फार्मेसी के जरिए उपलब्ध हैं। लोग इन्हें अपनी इच्छा से लगवा सकते हैं।
  • आईसीएमआर ने खास तौर पर उन लोगों के लिए मौसमी फ्लू वैक्सीन की सलाह दी है जिनमें फ्लू होने पर गंभीर बीमारी का खतरा ज्यादा रहता है।
  • बुजुर्ग और गर्भवती महिलाएं, पहले से किसी बीमारी के शिकार लोग और इम्यूनोकॉम्प्रोमाइज्ड यानी जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर है उन्हें डॉक्टरी सलाह पर वैक्सीन जरूर लेनी चाहिए।


--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें