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Hypersomnia: पर्याप्त नींद लेने के बाद भी शरीर में बनी रहती सुस्ती, हो सकता है इन बीमारियों का संकेत

Mon, 14 Jul 2025 04:54 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अगर किसी को पूरी नींद लेने के बाद भी थकान और सुस्ती बनी रहे, तो यह हाइपरसोमनिया हो सकता है, जहां व्यक्ति लगातार नींद महसूस करता है। यह किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का संकेत भी हो सकती है। आइए इस लेख में इसी के  बारे में जानते हैं।  
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हाइपरसोमनिया - फोटो : इंस्टाग्राम
Hypersomnia: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में थकान या सुस्ती महसूस करना आम बात है, यह एक ऐसी समस्या है, जिससे कई लोग परेशान रहते हैं। आमतौर पर यह माना जाता है कि अगर आपने पर्याप्त नींद नहीं ली है, तो थकान या सुस्ती बनी रहती है। लेकिन क्या हो जब भरपूर नींद लेने के बाद भी आप दिनभर अत्यधिक नींद और आलस महसूस करें? यह सिर्फ सामान्य सुस्ती नहीं, बल्कि एक गंभीर स्थिति हो सकती है जिसे हाइपरसोमनिया कहते हैं। यह ऐसी अवस्था है जहां व्यक्ति को पर्याप्त आराम मिलने के बावजूद, दिन के समय लगातार सुस्ती और थकान बनी रहती है।

हाइपरसोमनिया से जूझ रहे लोग अक्सर दिन में बार-बार झपकी लेते हैं, चाहे वे काम कर रहे हों, पढ़ रहे हों या ड्राइव कर रहे हों। यह उनकी दैनिक गतिविधियों, कार्यक्षमता और सामाजिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित करता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि यह स्थिति केवल नींद की समस्या नहीं, बल्कि मानसिक या शारीरिक स्वास्थ्य से जुड़ी किसी गंभीर अंतर्निहित समस्या का संकेत भी हो सकती है। इसलिए, इसके लक्षणों को समझना और समय पर सही उपचार के लिए किसी चिकित्सक से परामर्श लेना बेहद जरूरी है, ताकि जीवन की गुणवत्ता को सुधारा जा सके।
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नींद की समस्या - फोटो : Freepik.com
हाइपरसोमनिया के प्रमुख लक्षण
हाइपरसोमनिया के लक्षणों में दिन में अत्यधिक नींद आना, लंबे समय तक सोने के बाद भी ताजगी न महसूस करना, ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई और चिड़चिड़ापन शामिल हैं। कुछ लोग सुबह जागने में परेशानी या नींद में अचानक गिरने जैसी स्थिति का अनुभव करते हैं। यह स्थिति सामान्य नींद की कमी से अलग है, क्योंकि यह तब भी होती है जब व्यक्ति रात में 8-10 घंटे की नींद लेता है। इन लक्षणों को नजरअंदाज करना खतरनाक हो सकता है।

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नींद की समस्या - फोटो : Freepik.com
हाइपरसोमनिया के संभावित कारण
हाइपरसोमनिया के कई कारण हो सकते हैं, जिनमें नींद की बीमारियां जैसे स्लीप एपनिया या नार्कोलेप्सी शामिल हैं। स्लीप एपनिया में रात में सांस रुकने से नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है, जिससे दिन में सुस्ती रहती है। 

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थाइरॉइड की समस्या - फोटो : Freepik.com
इसके अलावा, थायरॉइड की समस्या, डिप्रेशन, चिंता, मधुमेह या आयरन की कमी भी हाइपरसोमनिया का कारण बन सकती हैं। कुछ दवाएं, जैसे एंटी-डिप्रेसेन्ट्स या एंटीहिस्टामिन्स, भी अत्यधिक नींद का कारण बन सकती हैं। अनियमित जीवनशैली और तनाव भी इस स्थिति को बढ़ाने में प्रमुख भूमिका निभाते हैं।
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अधिक नींद से परेशान - फोटो : Adobe Stock
बचाव के उपाय
हाइपरसोमनिया का उपचार इसके कारणों और मरीज के मेडिकल हिस्ट्री पर निर्भर करता है। स्लीप एपनिया के लिए CPAP मशीन, जबकि नार्कोलेप्सी के लिए दवाएं दी जा सकती हैं। इस समस्या से बचाव का सबसे सरल और प्रभावी उपाय यही है कि, हर दिन 7-8 घंटे की पूरी नींद लें।इसके अलावा, नियमित नींद का समय, तनाव प्रबंधन और संतुलित आहार हाइपरसोमनिया को कम करने में मदद करते हैं। कैफीन और शराब का सेवन सीमित करें। योग, मेडिटेशन और हल्का व्यायाम को अपनी दिनचर्या में शामिल करें। यदि लक्षण लगातार बने रहें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। 

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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