हमारे शरीर के अंदर मौजूद डीएनए को आमतौर पर एक ऐसी किताब समझा जाता है, जिसमें शरीर के काम करने की पूरी आनुवंशिक जानकारी दर्ज होती है। लेकिन इस किताब में कुछ ऐसे हिस्से भी हैं, जो हमेशा एक ही जगह टिके नहीं रहते। वे डीएनए के अंदर एक जगह से दूसरी जगह जा सकते हैं। इन्हें वैज्ञानिक ‘जंपिंग जीन’ कहते हैं।
कॉर्नेल यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने एक ऐसा इंसानी आनुवंशिक तत्व खोजा है, जिसने इस कहानी को और दिलचस्प बना दिया है। बीसी200 नाम का यह जीन एक तरफ दिमाग की कोशिकाओं में पाया जाता है और शरीर की सामान्य जैविक प्रक्रियाओं में भूमिका निभाता है, वहीं दूसरी तरफ इसमें डीएनए के अंदर अपनी जगह बदलने की क्षमता भी बनी हुई है।
दिलचस्प बात यह है कि इसकी कहानी इंसानों तक सीमित नहीं है। वैज्ञानिकों को यही आनुवंशिक तत्व मोलस्कम कॉन्टेजियोसम वायरस, यानी त्वचा को संक्रमित करने वाले एक पॉक्सवायरस में भी मिला। शोधकर्ताओं के मुताबिक बीसी200 की जड़ करीब 4 करोड़ साल पुराने एक ‘जंपिंग जीन’ तक जाती है।