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Diabetes: डायबिटीज की कई दवाओं से भी ज्यादा प्रभावी इलाज की खोज; भारत में पहला मधुमेह बायोबैंक भी स्थापित

Sun, 15 Dec 2024 05:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एक अध्ययन में वैज्ञानिकों ने प्रभावी कंपाउंड एचपीएच 15 की खोज की है जो शुगर लेवल और डायबिटीज रोगियों में बढ़ने वाली फैट की समस्या को काफी हद तक कम करने में मददगार हो सकती है। आइए इस बारे में जानते हैं।
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डायबिटीज के उपचार में कामयाबी - फोटो : Adobe stock
डायबिटीज एक गंभीर और क्रोनिक बीमारी है जिसका खतरा किसी भी उम्र में हो सकता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को डायबिटीज का शिकार पाया जा रहा है। एक अनुमान के मुताबिक दुनियाभर में 830 मिलियन (83 करोड़) से अधिक लोग इस बीमारी से पीड़ित हैं, हालांकि जिस तरह से लोगों की दिनचर्या और आहार से संबंधित दिक्कतें बढ़ती जा रही हैं, ऐसे में थोड़ी सी लापरवाही आपको भी इस रोग का शिकार बना सकती है।

डायबिटीज की स्थिति शरीर में कई प्रकार की जटिलताओं को भी बढ़ाने वाली होती है। इसकी रोकथाम और इलाज के लिए विशेषज्ञ लगातार अध्ययन कर रहे हैं। इसी क्रम में किए गए एक हालिया अध्ययन में वैज्ञानिकों ने प्रभावी कंपाउंड की खोज की है जो शुगर लेवल और डायबिटीज रोगियों में बढ़ने वाली फैट की समस्या को काफी हद तक कम करने में मददगार हो सकती है।

जापान स्थित कुमामोटो यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित किए गए इस कंपाउंड को कई मामलों में विशेष प्रभावी माना जा रहा है। 
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डायबिटीज के इलाज के लिए खोज - फोटो : Freepik.com
HPH-15 नाम के कंपाउंड की खोज 

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक वैज्ञानिकों की टीम ने HPH-15 नाम के एक कंपाउंड को विकसित किया है। दावा किया जा रहा है कि ये मेटफॉर्मिन दवा की तुलना में रक्त शर्करा और वसा संचय को अधिक प्रभावी ढंग से कम करने में सहायक हो सकती है। मेटफॉर्मिन, डायबिटीज रोगियों को शुगर को कंट्रोल करने के लिए दी जाने वाली  दवा है।

इसके साथ ही इसमें एंटीफाइब्रोटिक गुण भी बताए जा रहे हैं, जो कोशिकाओं को स्वस्थ रखने, घाव भरने, ऊतकों की मरम्मत और कैंसर के खतरे को कम करने में कारगर हो सकती है। 
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डायबिटीज की दवाएं - फोटो : Freepik.com
मधुमेह के उपचार में क्रांतिकारी बदला

विशेषज्ञों का मानना है कि ये नवाचार मधुमेह के उपचार में क्रांतिकारी बदलाव ला सकता है। टाइप 2 डायबिटीज दुनियाभर में लाखों लोगों को प्रभावित करती है। इसके कारण अक्सर फैटी लिवर और इंसुलिन प्रतिरोध जैसी जटिलताएं हो जाती हैं जो वर्तमान उपचार विधियों के लिए चुनौतियां पेश करती हैं।

विजिटिंग एसोसिएट प्रोफेसर हिरोशी तातेशी और प्रोफेसर ईइची अराकी के नेतृत्व में शोधकर्ताओं की टीम ने मेटफॉर्मिन जैसी मौजूदा दवाओं के लिए एक आशाजनक विकल्प के रूप में HPH-15 की पहचान की है।

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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freepik.com
अध्ययन में क्या पता चला?

जर्नल डायबेटोलोजिया में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि एचपीएच-15 एएमपी-एक्टिव प्रोटीन किनेज (एएमपीके) को सक्रिय करके मेटफॉर्मिन से बेहतर प्रदर्शन करती है। ये प्रोटीन ऊर्जा संतुलन को रेगुलट करने वाला एक महत्वपूर्ण प्रोटीन है। शोध में पाया गया है कि एचपीएच-15 ने न केवल लिवर, मांसपेशियों और वसा कोशिकाओं में ग्लूकोज के अवशोषण में सुधार किया, बल्कि हाई फैट वाले आहार खाने वाले चूहों में वसा के संचय को भी काफी कम कर दिया।

मेटफॉर्मिन के विपरीत, एचपीएच-15 ने अतिरिक्त एंटीफाइब्रोटिक गुण भी प्रदर्शित किए, जो संभावित रूप से लिवर फाइब्रोसिस और मधुमेह रोगियों में अक्सर देखी जाने वाली अन्य जटिलताओं को भी कम करने में सहायक है।
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भारत में डायबिटीज बायोबैंक - फोटो : Freepik.com
भारत का पहला मधुमेह बायोबैंक 

वहीं दूसरी तरफ भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने मद्रास मधुमेह अनुसंधान फाउंडेशन (एमडीआरएफ) के सहयोग से चेन्नई में देश का पहला मधुमेह बायोबैंक स्थापित किया है, जो वैज्ञानिक अनुसंधान को मदद करने के उद्देश्य से जनसंख्या-आधारित जैविक सैंपल का भंडार है। इसका उद्देश्य वैज्ञानिक अध्ययनों में सहायता के लिए बाइलॉजिकल सैंपल को इकट्ठा करना, संसाधित और संग्रहीत करने के साथ वितरित करना है।

एमडीआरएफ के अध्यक्ष डॉ. वी. मोहन ने कहा कि बायोबैंक मधुमेह के कारणों, भारतीय में मधुमेह और इससे संबंधित विकारों पर उन्नत शोध की सुविधा प्रदान करेगा।



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स्रोत और संदर्भ
An antifibrotic compound that ameliorates hyperglycaemia and fat accumulation in cell and HFD mouse models


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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