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जानना जरूरी: जंक फूड छोड़ने पर शरीर में क्या होता है? जानें शुरुआती दिनों से लेकर लंबे समय तक के असर

Wed, 16 Sep 2026 05:10 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Quitting Junk Food Effects: अक्सर लोगों के मन में ये सवाल उठता है कि अगर आपने जंक फूड खाना छोड़ दिया तो आपकी सेहत पर क्या असर पड़ेगा। यहां हम आपको इसी बारे में जानकारी देंगे।
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जंक फूड छोड़ने के 21 दिन बाद शरीर में क्या होता है? - फोटो : AI
 Quitting Junk Food Effects:  जंक फूड आज की व्यस्त जीवनशैली का आसान हिस्सा बन चुका है। पिज्जा, बर्गर, फ्रेंच फ्राइज, चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स और मीठे पेय स्वाद में भले ही अच्छे लगें, लेकिन इनका नियमित सेवन शरीर पर असर डाल सकता है। ऐसे में अगर कोई व्यक्ति अचानक जंक फूड खाना छोड़ दे, तो शरीर में कई सकारात्मक बदलाव देखने को मिल सकते हैं। 

शुरुआत में पसंदीदा खाने की इच्छा बढ़ना या चिड़चिड़ापन महसूस होना संभव है, लेकिन समय के साथ स्वाद की आदत बदल सकती है। हालांकि, सिर्फ जंक फूड छोड़ना पर्याप्त नहीं है। आइए जानते हैं कि जंक फूड छोड़ने के बाद शरीर में दिन-दर-दिन क्या बदलाव आ सकते हैं और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
 
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जंक फूड छोड़ने के 21 दिन बाद शरीर में क्या होता है? - फोटो : AI
1. शुरुआती दिनों में बढ़ सकती है जंक फूड की क्रेविंग

 अगर आप लंबे समय से पिज्जा, बर्गर, फ्राइज, चिप्स या मीठे पेय का सेवन करते रहे हैं, तो इन्हें अचानक छोड़ने पर शुरुआत में बार-बार इन्हें खाने का मन कर सकता है। इसकी वजह स्वाद और खाने की आदत हो सकती है। ऐसे समय में भूख लगने पर फल, मखाने, भुने चने, नट्स या दही जैसे विकल्प रख सकते हैं। इससे जंक फूड की जगह धीरे-धीरे हेल्दी स्नैक्स की आदत विकसित करने में मदद मिल सकती है।

 
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जंक फूड छोड़ने के 21 दिन बाद शरीर में क्या होता है? - फोटो : AI
2. पाचन तंत्र को मिल सकता है फायदा

 जंक फूड की जगह फल, सब्जियां, दालें और साबुत अनाज जैसे फाइबर युक्त खाद्य पदार्थ डाइट में शामिल करने से खाने की गुणवत्ता बेहतर होती है। फाइबर पाचन के लिए महत्वपूर्ण है और पर्याप्त पानी के साथ इसका सेवन कब्ज जैसी समस्या से बचाव में मदद कर सकता है। हालांकि, अगर आपकी डाइट में पहले फाइबर बहुत कम था, तो इसे धीरे-धीरे बढ़ाना बेहतर रहता है।

 

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जंक फूड छोड़ने के 21 दिन बाद शरीर में क्या होता है? - फोटो : AI
3. कैलोरी और वजन को नियंत्रित करने में मदद

 पिज्जा, बर्गर, फ्राइज और मीठे पेय जैसे कई फास्ट फूड में कैलोरी अधिक हो सकती है। इन्हें कम करके घर का संतुलित भोजन लेने से कुल कैलोरी सेवन कम हो सकता है। इसका असर वजन पर भी पड़ सकता है, लेकिन यह व्यक्ति की पूरी डाइट, शारीरिक गतिविधि और पोर्शन पर निर्भर करता है। सिर्फ जंक फूड छोड़ने के बजाय खाने की मात्रा और पोषण पर भी ध्यान देना जरूरी है।

 
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जंक फूड छोड़ने के 21 दिन बाद शरीर में क्या होता है? - फोटो : AI
5. ऊर्जा और मूड में हो सकता है बदलाव

 जंक फूड कम करने के साथ अगर आप नियमित समय पर संतुलित भोजन लेते हैं, तो आपकी डाइट ज्यादा व्यवस्थित हो सकती है। दाल, अंडे, दूध-दही, साबुत अनाज, फल और सब्जियों जैसे खाद्य पदार्थों से शरीर को अलग-अलग जरूरी पोषक तत्व मिलते हैं। इससे दिनभर के भोजन को बेहतर तरीके से संतुलित किया जा सकता है। वहीं, बहुत ज्यादा मीठे या प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों की जगह पौष्टिक विकल्प लेना लंबे समय के लिए बेहतर खान-पान की आदत बनाने में मदद कर सकता है।

 
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जंक फूड छोड़ने के 21 दिन बाद शरीर में क्या होता है? - फोटो : AI
 6. त्वचा और नींद पर भी पड़ सकता है असर

 जंक फूड कम करने के साथ अगर आप पर्याप्त पानी पीते हैं, पौष्टिक भोजन लेते हैं और रोजाना पर्याप्त नींद लेते हैं, तो आपकी पूरी लाइफस्टाइल बेहतर हो सकती है। इससे त्वचा और नींद में भी सकारात्मक बदलाव महसूस हो सकते हैं। हालांकि, इसका असर हर व्यक्ति में अलग हो सकता है और त्वचा या नींद से जुड़ी समस्याओं की कई दूसरी वजहें भी हो सकती हैं।
 
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जंक फूड छोड़ने के 21 दिन बाद शरीर में क्या होता है? - फोटो : AI

  ध्यान रखें

 जंक फूड छोड़ने का मतलब केवल पिज्जा-बर्गर बंद करना नहीं है। इसकी जगह क्या खाया जा रहा है, यह ज्यादा महत्वपूर्ण है। फल, सब्जियां, साबुत अनाज, दालें, प्रोटीन वाले खाद्य पदार्थ और पर्याप्त पानी को डाइट का हिस्सा बनाना बेहतर विकल्प है। अगर वजन, डायबिटीज या किसी अन्य स्वास्थ्य समस्या के कारण डाइट में बड़ा बदलाव करना चाहते हैं, तो डॉक्टर या योग्य डाइटिशियन से सलाह लेना उचित है।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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