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Heart Health: कहीं आपको भी तो नहीं है दिल की बीमारी का खतरा? इस कैलकुलेटर से 10 साल का रिस्क जानिए मिनटों में

Fri, 17 Apr 2026 08:04 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

दिल की बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी ने कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल की गाइडलाइंस में बड़ा बदलाव किया है। इसके मुताबिक, 19 साल की उम्र से हर 5 साल में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए।
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दिल की सेहत का कैसे लगाएं अंदाजा - फोटो : Amarujala.com/AI
दिल की बीमारियों का खतरा दुनियाभर में तेजी से बढ़ता जा रहा है। कम उम्र के लोग भी बड़ी संख्या में इसकी चपेट में देखे जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (दिल की बीमारियों) का खतरा समय रहते समझना बेहद जरूरी है, क्योंकि शुरुआती स्टेज में ही सही कदम उठाकर इसे काफी हद तक रोका भी जा सकता है। हालांकि चिंता की बात ये है कि अक्सर ज्यादातर लोग शुरुआत में इसके लक्षणों को हल्का समझकर अनदेखा करते रहते हैं, जिस वजह से ये बीमारी गंभीर रूप ले लेती है।

डॉक्टर कहते हैं, चूंकि सभी उम्र के लोगों में हार्ट की समस्याएं देखी जा रही हैं, इसलिए आपको कम उम्र से ही सावधानी बरतने की जरूरत है। ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल की नियमित जांच, धूम्रपान-शराब से दूरी और दिनचर्या में सुधार करके आप अपने खतरों को जान सकते हैं।

आपमें अगले 10 और फिर 30 साल में दिल की बीमारियों का कितना जोखिम है, इसका अब आसानी से पता लगाया जा सकता है, इसके लिए विशेषज्ञों ने एक कैलकुलेटर तैयार किया है जिसकी मदद से आप घर बैठे अपने जोखिमों का अंदाजा लगा सकते हैं।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : freepik.com
कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल रखना बहुत जरूरी

आपमें हृदय रोगों का कितना खतरा है, इसे समझने के लिए डॉक्टर आपकी उम्र, जेंडर, ब्लड प्रेशर, कोलेस्ट्रॉल लेवल, स्मोकिंग की आदत, डायबिटीज और फैमिली हिस्ट्री देखते हैं। अगर आपका ब्लड प्रेशर हाई रहता है, कोलेस्ट्रॉल की समस्या है या आप धूम्रपान करते हैं, तो जोखिम ज्यादा हो सकता है।

हृदय की बीमारियों के बढ़ते खतरे को देखते हुए अब अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी (एसीसी) कोलेस्ट्रॉल कंट्रोल से संबंधित गाइडलाइंस में बड़ा बदलाव किया है। इसके मुताबिक 19 साल की उम्र से हर 5 साल में लिपिड प्रोफाइल टेस्ट कराना चाहिए। अमर उजाला में प्रकाशित इस रिपोर्ट में आप इसे विस्तार से जान सकते हैं।
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हृदय रोग और इसका खतरा - फोटो : Adobe Stock
दिल की बीमारियों का पता लगाने के लिए कैलकुलेटर

अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजी के विशेषज्ञों ने बताया अपनी उम्र और जोखिमों को देखते हुए कोलेस्ट्रॉल की जांच जरूरी है। 
 
  • 9-11 वर्षः एक बार जांच जरूरी (जेनेटिक खतरे का आकलन )
  • 19 वर्ष से ऊपरः हर 5 साल में 'लिपिड प्रोफाइल' टेस्ट जरूर कराएं।
  • 30 वर्ष से ऊपरः ‘PREVENT कैलकुलेटर से 10 और 30 साल का रिस्क स्कोर की जांच की जा सकती है।


PREVENT कैलकुलेटर की मदद से आप घर पर ही अपने खतरे का अंदाजा लगा सकते हैं।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने 'प्रेडिक्टिंग रिस्क ऑफ कार्डियोवैस्कुलर डिजीज (PREVENT) कैलेकुलेटर तैयार किया है जिसकी मदद से अगले 10 और 30 वर्षों में अपने जोखिम का अनुमान लगा सकते हैं। इस कैलकुलेटर में आपको अपनी उम्र, लिंग, बीपी, टोटल कोलेस्ट्रॉल, बीएमआई, डायबिटीज, स्मोकिंग करते हैं या नहीं इसकी जानकारी देनी होती है। इसके आधार पर मिनटों में ही जान सकते हैं कि आप कितने खतरे में हैं। 

कैलेकुलेटर से अपनी हार्ट हेल्थ का पता लगाने के लिए यहां क्लिक करें।
 
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हृदय स्वास्थ्य को कैसे ठीक रखें? - फोटो : adobe stock
हार्ट डिजीज से बचाव कैसे करें?

डॉक्टर कहते हैं, दिल की बीमारी से बचाव के लिए लाइफस्टाइल में बदलाव सबसे असरदार तरीका है। 
 
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट एक्सरसाइज जैसे वॉकिंग या योग करें। 
  • संतुलित डाइट लें जिसमें नमक- तेल कम हो और ज्यादा फल-सब्जियां ज्यादा हों। 
  • स्मोकिंग और अल्कोहल से दूरी बनाना जरूरी है।
  • नियमित हेल्थ चेकअप कराते रहें ताकि बीपी, शुगर और कोलेस्ट्रॉल के स्तर का अंदाजा लग सके।




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स्रोत:
The American Heart Association PREVENT™ Online Calculator


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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