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काम की बात: उम्र बढ़ने पर भी दिमाग को रख सकते हैं जवान, पर कैसे? मिल गया इसका जवाब

Mon, 07 Sep 2026 05:26 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त, सोचने और जानकारी को प्रोसेस करने की गति में बदलाव आ सकता है, लेकिन इसे पूरी तरह अपरिहार्य नहीं माना जा सकता। नियमित एक्सरसाइज, अच्छी नींद, संतुलित खान-पान, मानसिक गतिविधियां ब्रेन हेल्थ बनाए रखने में मदद कर सकती हैं। अध्ययनों में इसका एक असरदार तरीका बताया गया है।
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याददाश्त को कैसे ठीक रखें? - फोटो : Amarujala.com/AI
उम्र बढ़ना शरीर की एक स्वाभाविक प्रक्रिया है। उम्र के साथ आप मानसिक और शारीरिक दोनों तरह से कमजोर होने लग जाते हैं। आमतौर पर 60 की उम्र के बाद चीजें याद रखने में थोड़ी ज्यादा मुश्किल होने लगती है, किसी का नाम तुरंत याद नहीं आता और एक साथ कई काम करने में पहले जैसी आसानी का अनुभव नहीं होता है। लेकिन हर भूलने की समस्या को बढ़ती उम्र का सामान्य असर मान लेना सही नहीं है।

हमारा ब्रेन उम्र के साथ कई बदलावों से गुजरता है। कुछ हिस्सों में संरचनात्मक बदलाव हो सकते हैं, न्यूरॉन्स के बीच कनेक्शन की क्षमता प्रभावित हो सकती है और सूचनाओं को प्रोसेस करने की गति भी कुछ कम हो सकती है। यही वजह है कि उम्र बढ़ने पर आप पहले जैसे दिमागी मेहनत वाले काम नहीं कर पाते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बुढ़ापे में भी मस्तिष्क की सेहत को ठीक रखने लिए कम उम्र से ही लाइफस्टाइल-खानपान में सुधार जरूरी है। इसके अलावा अध्ययनों में कुछ ऐसी गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी  गई है जो आपको मानसिक स्वास्थ्य और दिमागी क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकती है।
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बुजुर्गों में याददाश्त की समस्या - फोटो : Freepik.com
ब्रेन एट्रोफी की समस्या

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि उम्र बढ़ने के साथ मानव मस्तिष्क में धीरे-धीरे संरचनात्मक बदलाव आने लगते हैं। 40 वर्ष की आयु के बाद ये बदलाव अधिक स्पष्ट हो सकते हैं। इस प्रक्रिया को ब्रेन एट्रोफी या ब्रेन श्रिंकेज कहा जाता है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि मानसिक रूप से सक्रिय जीवनशैली और विशेष रूप से किसी संगीत वाद्य यंत्र को सीखना दिमागी क्षमता में गिरावट की रफ्तार को धीमा करने में मदद कर सकता है।
 
  • नेशनल इंस्टीट्यूट ऑन एजिंग सहित कई अन्य संस्थानों द्वारा किए गए अध्ययन के अनुसार उम्र बढ़ने के बावजूद मस्तिष्क में नई तंत्रिका कड़ियां बनाने की क्षमता बनी रहती है। 
  • संगीत सीखना दिमाग के कई हिस्सों को एक साथ सक्रिय करता है, इसलिए इसे फुल-ब्रेन वर्कआउट माना जाता है।
  • मसलन अगर आप संगीत सीखते हैं और कोई वाद्य यंत्र बजाते हैं तो ये आपकी दिमागी क्षमता को बुढ़ापे में भी मजबूत बनाए रखने में मददगार हो सकती है।
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उम्र बढ़ने के साथ ब्रेन पर असर - फोटो : Freepik.com
म्यूजिक सीखने से याददाश्त और एकाग्रता से जुड़े हिस्से होते हैं सक्रिय

विशेषज्ञों के अनुसार जब आप पियानो, गिटार, तबला, वायलिन या अन्य वाद्य यंत्र सीखते हैं, तब दिमाग के कई हिस्से एक साथ काम करते हैं। 
 
  • हाथों और अंगुलियों की गतिविधि के लिए मोटर कॉर्टेक्स सक्रिय होता है। स्वर और ताल पहचानने के लिए ऑडिटरी सिस्टम काम करता है।
  • याददाश्त और एकाग्रता से जुड़े हिस्से लगातार सक्रिय रहते हैं। 
  • भावनात्मक प्रतिक्रिया और रचनात्मकता भी इसमें शामिल होती है।
  •  यही कारण है कि संगीत प्रशिक्षण को मानसिक लचीलापन बढ़ाने वाली गतिविधियों में शामिल किया जाता है।

बढ़ती उम्र के साथ मस्तिष्क की कोशिकाओं के बीच संचार धीमा पड़ सकता है। विशेष रूप से स्मृति, निर्णय क्षमता और ध्यान नियंत्रित करने वाले हिस्सों में बदलाव देखे जाते हैं। एमआरआई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि उम्र के साथ ग्रे मैटर और व्हाइट मैटर दोनों में धीरे-धीरे कमी आ सकती है। हालांकि वैज्ञानिक स्पष्ट करते हैं कि यह प्रक्रिया हर व्यक्ति में समान नहीं होती। जीवनशैली, शिक्षा, तनाव, सामाजिक सक्रियता और शारीरिक स्वास्थ्य जैसे कई कारक इसकी गति को प्रभावित करते हैं।
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महिलाओं के ब्रेन पर असर - फोटो : Freepik.com
महिलाओं को जरूर जाननी चाहिए ये बातें

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में भी उम्र बढ़ने के साथ दिमागी सिकुड़न की प्रक्रिया होती है, लेकिन रजोनिवृत्ति के बाद हार्मोनल बदलाव इसमें अतिरिक्त भूमिका निभा सकते हैं। विशेष रूप से एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर घटने से स्मृति और संज्ञानात्मक क्षमता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि शोध यह भी बताते हैं कि नियमित मानसिक गतिविधियां, संगीत, योग, ध्यान और सामाजिक जुड़ाव महिलाओं में भी दिमागी स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में मददगार हो सकते हैं।



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स्रोत:
Never too late to start musical instrument training: Effects on working memory and subcortical preservation in healthy older adults across 4 years


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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