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व्यक्तित्व के साथ कैरियर संवारती है आपकी शानदार आवाज, इन उपायों से दूर करें भारीपन 

Sat, 11 Apr 2020 02:04 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Voice Modulation - फोटो : Pixabay
नाम गुम जाएगा....मेरी आवाज ही पहचान है, गर याद रहे....यह गीत तो आपने जरूर सुना होगा। दरअसल, हमारा व्यक्तित्व निखारने में हमारे लुक के साथ आवाज की भी अहम भूमिका होती है। आवाज हमारी पहचान होती है। सेल्समैन से लेकर कंपनी के सीईओ तक, शिक्षक से लेकर वकील तक और मीडियापर्सन से लेकर गायक तक, इन प्रोफेशनों में आवाज का अहम रोल होता है। हम सभी चाहते हैं कि हमारी आवाज स्पष्ट और मधुर हो। आवाज में भारीपन के कारण हम लोगों पर प्रभाव नहीं छोड़ पाते हैं। यह हमारे वोकल कॉर्ड पर निर्भर करता है। कुछ उपायों के जरिए हम अपनी आवाज का भारीपन दूर कर सकते हैं और जिनकी आवाज पहले से ही मधुर है, वे उसे मधुर बनाए रख सकते हैं।  
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विशेषज्ञ बताते हैं कि आवाज में भारीपन के दो कारण होते हैं- वोकल पोलिप और वोकल नोड्यूल्स। वोकल कॉर्ड में होने वाली इन दो समस्याओं के कारण हमारी आवाज खराब हो सकती है। वोकल कॉर्ड नोड्यूल्स की समस्या की समस्या केवल पुरुषों में नहीं होती, बल्कि महिलाओं में अपेक्षाकृत ज्यादा देखी जाती है। खासकर 20 से 50 वर्ष की महिलाओं में। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर हमारी वोकल कॉर्ड कैसे काम करती है!
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प्रतीकात्मक तस्वीर
दरअसल, आवाज हमारे गले से निकलती है, जहां स्थित स्वरयंत्र में दो तारनुमा वोकल कॉर्ड होते हैं। इन्हीं के आपस में मिलने से आवाज पैदा होती है। ये सही से काम करें तो आवाज मीठी होती है और ठीक से काम न करें तो कर्कश या भारी आवाज निकलती है। यह संरचना बहुत ही नाजुक होती है, जोकि ज्यादा बेरुखी नहीं सह पाती। कई बार तेज बोलने और लगातार बोलते रहने के कारण भी इनमें सूजन आ जाती है और वोकल नोड्यूल बनने से आवाज खराब हो जाती है। 

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mic
किसी आयोजन, सभा, भीड़ आदि में जोर से बोलने पर अक्सर लोगो का गला बैठ जाता है, यानी उनकी आवाज खराब हो जाती है। खासकर ऐसे पेशे में, जहां तेज और लगातार बोलने की जरूरत पड़ती है, यह समस्या ज्यादा हो सकती है। आवाज में भारीपन वोकल पोलिप के कारण भी हो सकता है। ऐसा होने पर आवाज में भारीपन तो होता ही है, बोलने या बात करने का मन नहीं करता है। बोलने में दर्द होता है या फिर कम बोलकर भी थकान महसूस होती है। आवाज फटने लगती है, गले में असहज महसूस होता है। अब बात करते हैं कि इस समस्या से दूर कैसे रहा जाए! 
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वोकल हाइजीन से जुड़ी अच्छी आदतें हमारी आवाज की मधुरता बनाए रख सकती है। 
  • चिल्लाकर या जोर से बोलने से बचें और लंबे समय तक लगातार न बोलें।
  • अगर लंबा बोलना जरूरी है तो बीच-बीच पानी की कुछ घूंट पीते रहें। 
  • कई लोगों की आदत होती है, अनावश्यक खांसकर गला साफ करने की। यह आदत छोड़ें। 
  • खानपान संयमित रखें। ठंडे मौसम में, खासकर रात में ठंडी चीजें खाने से बचें। पर्याप्त पानी पिएं। 
  • चाय, कॉफी, कोकाकोला या अन्य कैफीन युक्त पदार्थ का ज्यादा सेवन न करें। यह वोकल नोड्यूल्स और पोलिप की आशंका बढ़ाता है।
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पेट में होने वाला एसिड रिफ्लेक्स भी गले में पहुंचकर वोकलकाॅर्ड को नुकसान पहुंचाता है, इसलिए एसिडिटी न हो, इसका ख्याल रखें।
  • जब सभा को, भीड़ को संबोधित करना है, तो माइक का उपयोग करें और अपनी वॉल्यूम सामान्य रखें। 
  • बैकग्राउंड में यदि कोई शोर हो रहा हो तो अपनी आवाज तेज करने की बजाय, स्पीकर की वॉल्यूम बढ़वाएं। 
  • आवाज का भारीपन दूर करने क लिए वाष्प यानी भाप का प्रयोग करना लाभकारी है। 
  • इसके अलावा स्पीच थैरेपी की मदद से मधुर और प्रभावी बोलने की प्रैक्टिस कराई जाती है। 
  • नोडयूल्स की समस्या गंभीर हो तो, इसे माइक्रोलेरिंजियल सर्जरी से हटाया जा सकता है।
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