ये भागदौड़ और तेज रफ्तार से भरा दौर है। हम सभी एक ऐसी दौड़ में शामिल हैं जिसके परिणाम को लेकर सोचने की फुरसत भी हमारे पास नहीं है। इस रफ्तार का बुरा असर जिस चीज पर सबसे ज्यादा हो रहा है वह है- आपसी रिश्ते और संवाद। परिवारों में साथ बैठकर बिताए जाने वाले समय में लगातार कटौती हो रही है और इसका सबसे बुरा असर हो रहा है बच्चों पर। उनके पास अपनी बात कहने, अपनी समस्याएं बताने या अपनी जिज्ञासाओं के जवाब पाने के लिए कोई नहीं है। खासकर सिंगल फैमिलीज में जहां माता-पिता दोनों ही कामकाजी हैं।
यह स्थिति तब और भी विकट हो जाती है, जब बच्चे टीनएज में आते हैं क्योंकि इस समय उनके दिमाग में सवालों का समंदर होता है और उनको समझने के लिए परिजनों के पास समय नहीं होता। तब शुरू होता है टकराव दो जेनरेशन के बीच। माता- पिता अपने जेनरेशन के नियम और कानून लादकर बच्चे के मैच्योर होने की अपेक्षा भी करते हैं और सवाल पूछने पर उसे बच्चा बने रहने की ताकीद भी देते हैं। सैंडविच बना बच्चा समझ ही नहीं पाता कि वह क्या करे? ऐसे में उसके भीतर असंतोष, गुस्सा, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं पनपने लगती हैं और इससे बात और भी बिगड़ जाती है। अगर आपके घर में भी हैं टीनएजर बच्चे, तो बस इन पांच बातों पर फोकस करें। इससे आपका और बच्चों का रिश्ता भी मजबूत रहेगा और उन्हें सही ग्रूमिंग भी मिलेगी।