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बच्चों की परेशानियों को समझने के लिए उनसे कीजिए दोस्ती, पर इन बातों का रखें विशेष ख्याल

Thu, 23 Sep 2021 12:42 PM IST
Abhilash Srivastava लाइफ स्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों से बढ़ाइए दोस्ती - फोटो : istock
ये भागदौड़ और तेज रफ्तार से भरा दौर है। हम सभी एक ऐसी दौड़ में शामिल हैं जिसके परिणाम को लेकर सोचने की फुरसत भी हमारे पास नहीं है। इस रफ्तार का बुरा असर जिस चीज पर सबसे ज्यादा हो रहा है वह है- आपसी रिश्ते और संवाद। परिवारों में साथ बैठकर बिताए जाने वाले समय में लगातार कटौती हो रही है और इसका सबसे बुरा असर हो रहा है बच्चों पर। उनके पास अपनी बात कहने, अपनी समस्याएं बताने या अपनी जिज्ञासाओं के जवाब पाने के लिए कोई नहीं है। खासकर सिंगल फैमिलीज में जहां माता-पिता दोनों ही कामकाजी हैं।

यह स्थिति तब और भी विकट हो जाती है, जब बच्चे टीनएज में आते हैं क्योंकि इस समय उनके दिमाग में सवालों का समंदर होता है और उनको समझने के लिए परिजनों के पास समय नहीं होता। तब शुरू होता है टकराव दो जेनरेशन के बीच। माता- पिता अपने जेनरेशन के नियम और कानून लादकर बच्चे के मैच्योर होने की अपेक्षा भी करते हैं और सवाल पूछने पर उसे बच्चा बने रहने की ताकीद भी देते हैं। सैंडविच बना बच्चा समझ ही नहीं पाता कि वह क्या करे? ऐसे में उसके भीतर असंतोष, गुस्सा, चिड़चिड़ापन जैसी समस्याएं पनपने लगती हैं और इससे बात और भी बिगड़ जाती है। अगर आपके घर में भी हैं टीनएजर बच्चे, तो बस इन पांच बातों पर फोकस करें। इससे आपका और बच्चों का रिश्ता भी मजबूत रहेगा और उन्हें सही ग्रूमिंग भी मिलेगी। 
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बच्चों के साथ करें बातचीत - फोटो : istock
सवाल टालें नहीं, पूछने को प्रोत्साहित करें
इस उम्र में बच्चों के दिमाग में हजार सवाल चल रहे होते हैं। अगर पहली बार सवाल पूछने पर उसे जवाब में यह सुनने को मिलेगा- कि फ़िजूल सवाल मत किया करो, ये तुम्हारे मतलब की बात नहीं। तो अगली बार से वह आपसे सवाल पूछेगा ही नहीं। इतना ही नहीं वह उस सवाल का जवाब घर से बाहर ढूंढने की कोशिश करेगा/करेगी, जहां उसका फायदा उठाने वाले भी मिल सकते हैं। बजाय इसके यदि उसका सवाल आपको अटपटा लगता है या आप उस समय उसको जवाब नहीं देना चाहते तो उसे कारण बताते हुए समय मांगें और जवाब जरूर दें। उसे यह भी कहें कि वह अपनी समस्याएं और सवाल हमेशा पूछ सकता है/सकती है। 
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बच्चों को बनाएं जिम्मेदार - फोटो : istock
घर के काम में बच्चों की बढ़ाएं भागीदारी
घर का बजट हो या कोई महत्वपूर्ण निर्णय, प्रयास करें कि इसमें बच्चा भी शामिल हो और महत्वपूर्ण भूमिका निभाए। उसे महीने का बजट बनाने का काम सौंपें या घर का छोटा-मोटा हिसाब रखने की जिम्मेदारी दें। जैसे दूध वाले का हिसाब या इस्त्री के लिए दिए गए कपड़ों का हिसाब। इससे उसे इस बात की समझ आएगी कि माता-पिता घर को कैसे मैनेज करते हैं। यह भावना उसमे जिम्मेदारी पैदा करेगी और उसे फिजूलखर्च करने से भी बचाएगी। 

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बच्चों पर नजर रखें पर ध्यान से - फोटो : istock
बच्चों पर हावी न हों
हर समय बच्चे के सिर पर सवार न रहें न ही पूरे समय उसकी जासूसी करें। इसकी बजाय उसे थोड़ी निजता दें। वह कहाँ जा रहा है यह अगर वह आपको बता कर जाता है तो उसके लौटने का समय आप निश्चित कर सकते हैं। आप सतर्क रह सकते हैं, उस पर नजर भी रख सकते हैं लेकिन इस तरह नहीं कि वह बन्धन महसूस करने लगे। अगर आपको लगता है कि उसकी दोस्ती, रूटीन आदि में कहीं सुधार की जरूरत है तो उसे शांति से बैठा कर समझाएं। डांटने-मारने से बचें। महीने में कम से कम एक बार उससे क्या चल रहा है, यह जरूर पूछें। इससे उसके मन में यह भाव रहेगा कि आपको उसकी परवाह है। यह बात उसे आपसे जोड़े रखेगी।
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बच्चों के अच्छे दोस्त बनें - फोटो : Parents bond
बच्चों के साथ दोस्ती करें, लेकिन दायरे में
अक्सर लोग कहते हैं कि बड़े होते बच्चों से दोस्त जैसा व्यवहार करना चाहिए। यह एक हद तक सही है लेकिन हमेशा याद रखिए कि दोस्त वही अच्छा होता है जो सही-गलत का फर्क बताए। इसलिए दोस्ती करें लेकिन इस दोस्ती में सही सीमा रेखा भी खींचें। उसे यह ध्यान रहे कि आप दोस्त के साथ साथ पैरेंट भी हैं, तभी वह आपको रिस्पेक्ट करना सीखेगा। इस दोस्ती में पारदर्शिता की बहुत जरूरत है। इसलिए बच्चे के सामने झूठ बोलने, अपशब्द बोलने, गलत व्यवहार करने से बचें। इससे बाहर भी वह ऐसे ही दोस्त चुनेगा जो इस दायरे में फिट बैठते होंगे। 
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बच्चों से सीखें नई चीजें - फोटो : istock
बच्चों की बातों पर ध्यान दें
आजकल बच्चे बहुत तेजी से नई तकनीक और साधनों के बारे में सीख जाते हैं। कोशिश करें कि आप भी उससे नया कुछ सीख सकें। इससे उसे अपनी सीखी हुई चीज पर और खुद पर विश्वास होगा और वह आगे सीखने को प्रेरित होगा। साथ ही जब बच्चा कोई बात बता रहा हो तो उसे ध्यान से सुनें। हो सकता है उसकी जानकारी आपके किसी काम आ जाए। बच्चे को इससे यह आश्वासन भी मिलेगा कि आप उसकी बात को महत्व देते हैं।
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