स्ट्रेस का सेहत पर असर
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स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि फर्टिलिटी केवल शरीर का मामला नहीं है, बल्कि यह शरीर, दिमाग और भावनात्मक स्वास्थ्य का भी परिणाम है। इसलिए यदि कोई दंपती लंबे समय से गर्भधारण की कोशिश कर रहा है, तो केवल मेडिकल जांच ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है।
अच्छी बात यह है कि सही जीवनशैली, तनाव कम करने की तकनीक, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और समय पर विशेषज्ञ की सलाह से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
स्ट्रेस का फर्टिलिटी पर असर
स्ट्रेस शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ा देता है। जब ये लंबे समय तक अधिक मात्रा में बने रहते हैं, तो दिमाग का हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्लैंड प्रभावित होते हैं।
- ये ग्रंथियां प्रजनन हार्मोन को नियंत्रित करती हैं। इनके असंतुलन से महिलाओं में ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है।
- ये पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर और शुक्राणुओं की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर देता है।
महिलाओं में अत्यधिक तनाव मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकता है। कई बार पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या ओव्यूलेशन समय पर नहीं होता। कुछ मामलों में अंडाणु बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। तनाव के कारण हार्मोनल असंतुलन बढ़ने से गर्भधारण में देरी हो सकती है।