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Infertility Risk: माता-पिता बनने में हो रही देरी? कहीं ज्यादा स्ट्रेस लेना तो नहीं है इसका कारण

Tue, 30 Jun 2026 07:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

माता-पिता बनने की तैयारी केवल शारीरिक स्वास्थ्य तक सीमित नहीं है। मानसिक शांति, संतुलित जीवनशैली, अच्छा खानपान, नियमित व्यायाम और सकारात्मक सोच भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं। 
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स्ट्रेस का सेहत पर असर - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आप भी लंबे समय से माता-पिता बनने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसमें सफलता नहीं मिल पा रही? कहीं इसका कारण आपका बहुत ज्यादा स्ट्रेस लेना तो नहीं है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ऑफिस के कामकाज, करियर, रिश्तों और भविष्य की चिंता को लेकर हम सभी परेशान रहते हैं। हालांकि अगर ये तनाव बहुत ज्यादा और अक्सर बना रहता है तो आपको अलर्ट हो जाना चाहिए। इसका फर्टिलिटी पर भी सीधा असर हो सकता है।

विशेषज्ञों कहते हैं कि लंबे समय तक रहने वाला तनाव शरीर में ऐसे हार्मोनल बदलाव पैदा करता है, जो पुरुषों और महिलाओं दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित कर सकता है। लगातार चिंता करने से शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है। इसका असर उन हार्मोन्स पर पड़ता है जो अंडाणु बनने, ओव्यूलेशन, शुक्राणुओं के निर्माण और यौन इच्छा को नियंत्रित करते हैं। यही वजह है कि लोगों में इंफर्टिलिटी की समस्या बढ़ती जा रही है।
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स्ट्रेस का सेहत पर असर - फोटो : Freepik.com
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानते हैं कि फर्टिलिटी केवल शरीर का मामला नहीं है, बल्कि यह शरीर, दिमाग और भावनात्मक स्वास्थ्य का भी परिणाम है। इसलिए यदि कोई दंपती लंबे समय से गर्भधारण की कोशिश कर रहा है, तो केवल मेडिकल जांच ही नहीं, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य पर भी उतना ही ध्यान देना जरूरी है। 

अच्छी बात यह है कि सही जीवनशैली, तनाव कम करने की तकनीक, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम और समय पर विशेषज्ञ की सलाह से इस जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।


स्ट्रेस का फर्टिलिटी पर असर

स्ट्रेस शरीर में कोर्टिसोल और एड्रेनालिन जैसे हार्मोन बढ़ा देता है। जब ये लंबे समय तक अधिक मात्रा में बने रहते हैं, तो दिमाग का हाइपोथैलेमस और पिट्यूटरी ग्लैंड प्रभावित होते हैं। 
 
  • ये ग्रंथियां प्रजनन हार्मोन को नियंत्रित करती हैं। इनके असंतुलन से महिलाओं में ओव्यूलेशन अनियमित हो सकता है।
  • ये पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर और शुक्राणुओं की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर देता है।

महिलाओं में अत्यधिक तनाव मासिक धर्म चक्र को प्रभावित कर सकता है। कई बार पीरियड्स अनियमित हो जाते हैं या ओव्यूलेशन समय पर नहीं होता। कुछ मामलों में अंडाणु बनने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। तनाव के कारण हार्मोनल असंतुलन बढ़ने से गर्भधारण में देरी हो सकती है। 
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पुरुषों की प्रजनन क्षमता पर असर - फोटो : Freepik.com
पुरुषों की फर्टिलिटी पर क्या असर पड़ता है?

पुरुषों में लंबे समय तक तनाव रहने से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है। इसके अलावा शुक्राणुओं की संख्या, उनकी गति और गुणवत्ता पर भी इसका असर हो सकता है। 
 
  • तनाव के कारण ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, जो स्पर्म डीएनए को नुकसान पहुंचा सकता है। 
  • कई पुरुषों में तनाव के चलते इरेक्टाइल डिसफंक्शन जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं।
  •  यदि तनाव के साथ धूम्रपान, शराब और खराब जीवनशैली भी जुड़ जाए, तो फर्टिलिटी पर असर और अधिक गंभीर हो सकता है।
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नींद की कमी का सेहत पर असर - फोटो : Freepik.com
ये चीजें भी बढ़ा देती हैं खतरा
 
  • अच्छी गुणवत्ता वाली नींद शरीर के हार्मोन संतुलन के लिए बेहद जरूरी है। लगातार कम नींद लेने से कोर्टिसोल बढ़ता है और मेलाटोनिन सहित कई महत्वपूर्ण हार्मोन प्रभावित होते हैं। इससे महिलाओं में ओव्यूलेशन और पुरुषों में शुक्राणु निर्माण पर असर पड़ सकता है। 
  • जंक फूड, अधिक चीनी, ट्रांस फैट और प्रोसेस्ड फूड शरीर में सूजन और ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ा सकते हैं। इसके साथ धूम्रपान, शराब और शारीरिक गतिविधि की कमी फर्टिलिटी को और नुकसान पहुंचाते हैं।

यदि एक साल तक नियमित प्रयास के बावजूद गर्भधारण नहीं कर पा रहा है, तो फर्टिलिटी विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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