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अलर्ट: आने वाले वर्षों में कितना संक्रामक हो जाएगा कोरोना? किन्हें होगा ज्यादा खतरा? अध्ययन में बड़ा खुलासा

Thu, 12 Aug 2021 03:52 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस का संक्रमण (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
दुनियाभर में करीब डेढ़ साल से जारी कोरोना का कहर फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना वायरस में म्यूटेशन के कारण सामने आ रहे नए वैरिएंट्स को वैज्ञानिक काफी संक्रामक और घातक मान रहे हैं, यही कारण है कि दूसरी लहर के खत्म होने के साथ ही तीसरी लहर को लेकर आशंकाएं तेज हो गई हैं। चूंकि कोरोना, हर म्यूटेशन के साथ लगातार खतरनाक होता जा रहा है, ऐसे में लोगों के मन में सवाल हैं कि आने वाले वर्षों में यह और कितना गंभीर रूप ले सकता है? हाल ही में किए गए शोध में वैज्ञानिकों ने इसी को लेकर बड़ा खुलासा किया है। 
एक मॉडलिंग अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ वर्षों में कोरोनावायरस भी सामान्य जुकाम वाले वायरस की तरह ही व्यवहार कर सकता है, यानी कि वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोनावायरस की गंभीरता आने वाले कुछ वर्षों में कमजोर होती जाएगी। मॉडलिंग अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि ऐसे संकेत मिले हैं कि आने वाले वर्षों में कोरोनावायरस का संक्रमण ज्यादातर उन्हीं छोटे बच्चों में होगा जिन्हें टीका नहीं लगा होगा या फिर जो पहले कभी इस वायरस के संपर्क में नहीं आए होंगे।
तो क्या आने वाले वर्षों में कोरोना को लेकर चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी? आइए आगे की स्लाइडों में अध्ययन की महत्वपूर्ण बातों को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।
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आने वाले दिनों में कैसा होगा कोरोना का असर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
बच्चों में ही ज्यादा हो सकता है संक्रमण का खतरा
अध्ययनकर्ता यूएस-नॉर्वेजियन की टीम का कहना है कि चूंकि अब तक के तमाम अध्ययनों में देखने को मिला है कि कोरोना की गंभीरता आमतौर पर बच्चों में कम होती है, इसलिए उम्मीद की जा रही है कि आने वाले वर्षों में सार्स-सीओवी-2 वायरस का प्रभाव कम हो जाएगा और संक्रमण वैश्विक आबादी में कुछ हिस्सों तक ही सिमटकर रह जाएगा। नॉर्वे स्थित ओस्लो विश्वविद्यालय के प्रोफेसर ओटार ब्योर्नस्टैड कहते हैं, अभी कोरोना वायरस से संक्रमण के बाद गंभीर मामलों को संकेत जरूर मिल रहे हैं लेकिन इस अध्ययन में सामने आया है कि इसका असर आने वाले समय में कम होने वाला है।
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बच्चों तक रह जाएगा कोरोना का असर (सांकेतिक) - फोटो : i stock
छोटे बच्चों में स्थानांतरित हो जाएगा संक्रमण 
'साइंस एडवांसेज' जर्नल में प्रकाशित अध्ययन में वैज्ञानिकों बताते हैं, अध्ययन के आधार पर कहा जा सकता है कि आने वाले वर्षों में दुनियाभर में ज्यादा से ज्यादा वयस्कों और उम्रदराज लोगों का या तो टीकाकरण हो चुका होगा या संक्रमण की चपेट में आने के कारण शरीर में इम्यूनिटी बन चुकी होगी, ऐसे में यह लोग वायरस के संपर्क में आने से प्रतिरक्षित हो जाएंगे। इस वजह से संक्रमण का जोखिम छोटे बच्चों में स्थानांतरित हो जाएगा। वैज्ञानिकों का कहना है कि पहले भी कोरोनावायरस और इन्फ्लूएंजा वायरस के मामलों को इसी तरह से दुनिया के कुछ हिस्सों में सिमटते हुए देखे गए हैं। 

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कम होता जाएगा कोरोना वायरस का खतरा (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
क्या कहते हैं अध्ययनकर्ता? 
प्रोफेसर ओटार ब्योर्नस्टैड कहते हैं, श्वसन रोगों के ऐतिहासिक रिकॉर्ड देखें तो पता चलता है कि समय के साथ महामारी कमजोर होकर उन लोगों पर शिफ्ट होती गई है जिनका  वैक्सीनेशन नहीं हुआ था। साल 1889-1890 में रूसी फ्लू की माहामारी इसका एक उदाहरण है। हालांकि, ब्योर्नस्टैड ने आगाह किया कि यदि शरीर में कोरोना के खिलाफ बनी प्रतिरक्षा किन्हीं कारणों से कमजोर हो जाती है तो यह अन्य आयुवर्ग के लोगों के लिए ज्यादा मुश्किलें खड़ी कर सकती है, हालांकि तब भी पिछले संक्रमण की तुलना में बीमारी की गंभीरता कम रहने के ही आसार हैं।
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जल्द से जल्द लोगों का टीकाकरण जरूरी - फोटो : Pixabay
क्या हैं अध्ययन के निष्कर्ष?
अध्ययन के लिए वैज्ञानिकों ने 'रियलिस्टिक-ऐज स्ट्रक्चर' (आरएएस) गणितीय मॉडल के आधार पर कोरोना के भविष्य के खतरे को जानने की कोशिश की। इसके लिए चीन, जापान, स्पेन, यूके, फ्रांस जैसे 11 देशों पर बीमारी के बोझ को लेकर जांच की गई। अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों का कहना है कि प्रतिरक्षा और जनसांख्यिकी के आधार पर किए गए इस शोध से पता चलता है कि कोरोना की महामारी आने वाले कुछ वर्षों में थम जाएगी। हालांकि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए फिलहाल जल्द से जल्द सभी लोगों का टीकाकरण कराना आवश्यक है।


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स्रोत और संदर्भ: 
A general model for the demographic signatures of the transition from pandemic emergence to endemicity

अस्वीकरण नोट: यह लेख साइंस एडवांसेज जर्नल में प्रकाशित अध्ययन के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। ज्यादा जानकारी के लिए आप अपने चिकित्सक से संपर्क कर सकते हैं।
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