दुनियाभर में करीब डेढ़ साल से जारी कोरोना का कहर फिलहाल थमने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना वायरस में म्यूटेशन के कारण सामने आ रहे नए वैरिएंट्स को वैज्ञानिक काफी संक्रामक और घातक मान रहे हैं, यही कारण है कि दूसरी लहर के खत्म होने के साथ ही तीसरी लहर को लेकर आशंकाएं तेज हो गई हैं। चूंकि कोरोना, हर म्यूटेशन के साथ लगातार खतरनाक होता जा रहा है, ऐसे में लोगों के मन में सवाल हैं कि आने वाले वर्षों में यह और कितना गंभीर रूप ले सकता है? हाल ही में किए गए शोध में वैज्ञानिकों ने इसी को लेकर बड़ा खुलासा किया है।
एक मॉडलिंग अध्ययन के आधार पर वैज्ञानिकों का कहना है कि अगले कुछ वर्षों में कोरोनावायरस भी सामान्य जुकाम वाले वायरस की तरह ही व्यवहार कर सकता है, यानी कि वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोनावायरस की गंभीरता आने वाले कुछ वर्षों में कमजोर होती जाएगी। मॉडलिंग अध्ययन में वैज्ञानिकों ने बताया है कि ऐसे संकेत मिले हैं कि आने वाले वर्षों में कोरोनावायरस का संक्रमण ज्यादातर उन्हीं छोटे बच्चों में होगा जिन्हें टीका नहीं लगा होगा या फिर जो पहले कभी इस वायरस के संपर्क में नहीं आए होंगे।
तो क्या आने वाले वर्षों में कोरोना को लेकर चिंता करने की कोई आवश्यकता नहीं होगी? आइए आगे की स्लाइडों में अध्ययन की महत्वपूर्ण बातों को विस्तार से समझने की कोशिश करते हैं।