How Microplastics Affect Human Health: आज के समय में चाय-कॉफी से लेकर गर्म खाना सर्व होने तक में पेपर के कप-प्लेट्स का इस्तेमाल होता है। ये कितना सही है और इसका स्वास्थ्य पर क्या प्रभाव पड़ता है, आइए जानते हैं इस लेख में।
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शरीर के किन-किन अंगों को प्रभावित कर सकता है माइक्रोप्लास्टिक?
- फोटो : AI
How Microplastics Affect Human Health: आजकल चाय, कॉफी और गर्म खाना परोसने के लिए डिस्पोजेबल पेपर कप और बाउल का इस्तेमाल आम हो गया है। देखने में ये कागज से बने और सुविधाजनक लगते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि इनकी अंदरूनी परत से माइक्रोप्लास्टिक आपके शरीर तक पहुंच सकता है?
यही माइक्रोप्लास्टिक शरीर में पहुंचकर स्वास्थ्य को लेकर वैज्ञानिक चिंता पैदा करता है। आज के इस लेख में हम आपसे इसी बारे में बात करेंगे कि आखिर ये माइक्रोप्लास्टिक हैं क्या और इनका हमारे शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है।
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शरीर के किन-किन अंगों को प्रभावित कर सकता है माइक्रोप्लास्टिक?
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माइक्रोप्लास्टिक क्या है?
माइक्रोप्लास्टिक प्लास्टिक के बेहद छोटे कण होते हैं, जिनका आकार आमतौर पर 5 मिलीमीटर से कम होता है। ये प्लास्टिक के बड़े टुकड़ों के टूटने से भी बन सकते हैं और कुछ औद्योगिक प्रक्रियाओं में सीधे भी पैदा होते हैं।
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गर्म पेपर कप से माइक्रोप्लास्टिक कैसे शरीर तक पहुंच सकता है?
पेपर कप की मजबूती और पानी रोकने के लिए उसकी अंदरूनी सतह पर अक्सर एक पतली कोटिंग होती है। गर्म चाय या कॉफी इस सतह के सीधे संपर्क में रहती है। गर्मी, पेय का तापमान और संपर्क का समय ऐसे कारक हैं जो पैकेजिंग से पदार्थों के निकलने को प्रभावित कर सकते हैं। इसी वजह से गर्म पेय के लिए इस्तेमाल होने वाले डिस्पोजेबल कप को लेकर माइक्रोप्लास्टिक पर चर्चा बढ़ी है।
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शरीर के किन-किन अंगों को प्रभावित कर सकता है माइक्रोप्लास्टिक?
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क्या माइक्रोप्लास्टिक शरीर के लिए खतरनाक है?
माइक्रोप्लास्टिक हमारे शरीर में भोजन, पानी और सांस के जरिए प्रवेश कर सकते हैं। आकार बेहद छोटा होने के कारण इनके शरीर के विभिन्न ऊतकों और अंगों तक पहुंचने की संभावना को लेकर वैज्ञानिक शोध जारी है।
अध्ययनों में माइक्रोप्लास्टिक के संभावित प्रभावों को मस्तिष्क, हृदय और रक्त वाहिकाओं, प्रजनन अंगों, फेफड़ों, पाचन तंत्र, लिवर और प्लेसेंटा जैसे हिस्सों से जोड़कर देखा गया है।
मस्तिष्क में इनके पहुंचने से न्यूरोइन्फ्लेमेशन और तंत्रिका तंत्र पर संभावित असर की जांच की जा रही है, जबकि हृदय और रक्त वाहिकाओं में इनके पाए जाने को हृदय संबंधी घटनाओं के जोखिम से जोड़ने वाला शोध भी सामने आया है।
प्रजनन अंगों में माइक्रोप्लास्टिक और उनसे जुड़े रसायनों के संभावित हार्मोनल प्रभाव तथा प्रजनन स्वास्थ्य पर असर को लेकर भी अध्ययन हो रहे हैं।
सांस के जरिए फेफड़ों में पहुंचने वाले कण सूजन और श्वसन संबंधी समस्याओं से जुड़े हो सकते हैं।
पाचन तंत्र और लिवर में इनके कारण ऑक्सीडेटिव तनाव और सूजन की संभावना पर भी शोध जारी है।
गर्भवती महिलाओं के प्लेसेंटा में माइक्रोप्लास्टिक मिलने की रिपोर्ट ने भ्रूण के विकास को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं।
इनमें से कई संभावित प्रभावों के लिए अभी मजबूत मानव-आधारित प्रमाण सीमित हैं, इसलिए इन्हें निश्चित स्वास्थ्य नुकसान के बजाय संभावित दीर्घकालिक जोखिम के रूप में देखना अधिक उचित है।
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क्या रोज पेपर कप में चाय पीना सही है?
अगर कोई व्यक्ति कभी-कभार पेपर कप में चाय या कॉफी पीता है, तो उससे निश्चित स्वास्थ्य नुकसान होने का निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता। लेकिन अगर दिन में कई बार गर्म पेय डिस्पोजेबल कप में लेने की आदत है, तो अनावश्यक प्लास्टिक संपर्क को कम करना एक सावधानीपूर्ण कदम हो सकता है। रोजाना इस्तेमाल के लिए स्टील, कांच या सिरेमिक के कप बेहतर विकल्प हो सकते हैं।
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पेपर बाउल में गर्म खाना और माइक्रोप्लास्टिक
सिर्फ पेपर कप ही नहीं, बल्कि पेपर बाउल और डिस्पोजेबल फूड कंटेनर भी माइक्रोप्लास्टिक की चर्चा में आते हैं। खासकर गर्म, तैलीय या लंबे समय तक रखे जाने वाले भोजन के मामले में कंटेनर की अंदरूनी कोटिंग महत्वपूर्ण होती है। इसलिए किसी भी डिस्पोजेबल बाउल को सिर्फ इसलिए पूरी तरह सुरक्षित नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि वह बाहर से कागज का दिखाई देता है।
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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