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Brain: इस उपाय से हफ्तेभर में सुधर सकती है दिमाग की ‘वायरिंग’, वैज्ञानिकों को मिले न्यूरोप्लास्टिसिटी के संकेत

Mon, 10 Aug 2026 05:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

गहन ध्यान और मन-शरीर अभ्यास वाले महज सात दिन के कार्यक्रम के बाद प्रतिभागियों के मस्तिष्क की गतिविधि, रक्त में मौजूद जैविक संकेतों, प्रतिरक्षा तंत्र, चयापचय और शरीर की प्राकृतिक दर्द नियंत्रण प्रणाली में मापने योग्य सार्थक बदलाव दिखाई दिए। 
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ब्रेन में देखे गए बेहतर बदलाव - फोटो : Freepik.com
शरीर को स्वस्थ और फिट रखने के लिए ब्रेन का हेल्दी रहना जरूरी माना जाता है। मस्तिष्क चूंकि पूरे शरीर का संचालक है, ऐसे में इसमें होने वाली गड़बड़ी का असर भी पूरी सेहत को प्रभावित करने वाला हो सकता है। दिमाग को हेल्दी रखने के उपायों की जब भी बात होती है तो स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को योग-मेडिटेशन की सलाह देते हैं। अध्ययनों में पाया गया है कि मेडिटेशन यानी ध्यान करने से दिमाग की सेहत को अविश्वसनीय बदलाव आ सकते हैं। 

आमतौर पर ध्यान का नाम आते ही हमारे दिमाग में तनाव कम करने, मन को शांत करने और चिंता से राहत पाने की तस्वीर उभरती है। लेकिन क्या ध्यान का असर इससे कहीं ज्यादा गहरा हो सकता है? क्या कुछ दिनों तक नियमित और गहन ध्यान करने से मस्तिष्क की गतिविधियों से लेकर प्रतिरक्षा तंत्र, मेटाबॉलिज्म और शरीर की दर्द को नियंत्रित करने की प्राकृतिक क्षमता तक में बदलाव आ सकता है? ये सवाल इसलिए खड़े हो रहे हैं क्योंकि हालिया अध्ययन में विशेषज्ञों की टीम ने इसे प्रमाणित किया है।

कैलिफोर्निया विश्वविद्यालय के एक नए अध्ययन ने इन सवालों को वैज्ञानिक नजरिए से देखने की कोशिश की है।
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ध्यान करने के कई सारे फायदे - फोटो : Freepik.com
ध्यान से दिखे मस्तिष्क में खास बदलाव

शोधकर्ताओं के अनुसार गहन ध्यान के साथ मन-शरीर के अभ्यास वाले महज सात दिन के कार्यक्रम के बाद प्रतिभागियों के मस्तिष्क की गतिविधि, रक्त में मौजूद जैविक संकेतों, प्रतिरक्षा तंत्र, मेटाबॉलिज्म और शरीर की प्राकृतिक दर्द नियंत्रण प्रणाली में मापने योग्य सार्थक बदलाव दिखाई दिए। 
 
  • शोधकर्ताओं ने न्यूरोप्लास्टिसिटी यानी मस्तिष्क की खुद को बदलने और नए तंत्रिका संबंध बनाने की क्षमता में भी बदलाव के संकेत पाए। 
  • यह अध्ययन 20 स्वस्थ वयस्कों पर किया गया। सभी प्रतिभागियों ने सात दिन के आवासीय कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्हें रोजाना ध्यान से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया और कुल करीब 33 घंटे का निर्देशित ध्यान कराया गया।
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ध्यान का ब्रेन हेल्थ पर असर - फोटो : adobe stock images
अध्ययन में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने कार्यक्रम शुरू होने से पहले और समाप्त होने के बाद प्रतिभागियों के मस्तिष्क की मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग यानी एफएमआरआई जांच की। 
 
  • इसके साथ ही उनके ब्लड के सैंपल लेकर मेटाबॉलिज्म, प्रतिरक्षा गतिविधि, आणविक संकेतों और अन्य जैविक प्रक्रियाओं में आए बदलावों का अध्ययन किया गया।
  • अध्ययन में पाया गया कि ध्यान के दौरान मस्तिष्क के उन हिस्सों की गतिविधि कम हुई जो लगातार चलने वाले आंतरिक विचारों और मानसिक बातचीत से जुड़े होते हैं। 
  • शोधकर्ताओं ने इसे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में अधिक कुशलता से जोड़कर देखा है।

अध्ययन के निष्कर्ष इसलिए खास हैं क्योंकि शोधकर्ताओं ने ध्यान के प्रभाव को केवल इस आधार पर नहीं परखा कि प्रतिभागियों को मानसिक रूप से कितना शांत या तनावमुक्त महसूस हुआ। उन्होंने शरीर और मस्तिष्क में होने वाले जैविक बदलावों को भी मापने की कोशिश की।
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ब्रेन हेल्थ पर असर - फोटो : Freepik.com
न्यूरोप्लास्टिसिटी से संबंधित बदलाव

सबसे दिलचस्प पहलू मस्तिष्क से जुड़ा है। शोधकर्ताओं को न्यूरोप्लास्टिसिटी से संबंधित बदलावों के संकेत मिले। न्यूरोप्लास्टिसिटी उस क्षमता को कहा जाता है जिसके जरिए मस्तिष्क अनुभवों और अभ्यास के आधार पर अपनी कार्यप्रणाली तथा तंत्रिका संबंधों को बदल सकता है। यही कारण है कि अध्ययन ध्यान को सिर्फ मानसिक शांति देने वाली गतिविधि के बजाय मस्तिष्क और शरीर के बीच होने वाली जटिल जैविक प्रक्रिया के संदर्भ में देखने का रास्ता खोलता है।

हालांकि, इस अध्ययन को समझते समय यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि इसमें केवल 20 स्वस्थ वयस्क शामिल थे और कार्यक्रम सिर्फ सात दिनों का था। इसलिए इसपर और विस्तार से और बड़े सैंपल साइज के साथ अध्ययन की आवश्यकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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