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अध्ययन: डेस्क जॉब करने वालों में हार्ट अटैक का खतरा 20% अधिक, अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने बताए बचाव के तरीके

Tue, 12 Jul 2022 04:27 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हृदय रोग की समस्याओं का जोखिम - फोटो : Pixabay
वैश्विक स्तर पर पिछले एक दशक में जिन बीमारियों के मामले सबसे अधिक रिपोर्ट किए गए हैं, हृदय रोग उनमें से एक हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि आश्चर्यजनक रूप से देखा गया है कि युवाओं में पिछले कुछ वर्षों में हृदय रोग और हार्ट अटैक जैसी जानलेवा समस्याओं के मामले काफी तेजी से बढ़े हैं। यह खतरा उन लोगों में और भी अधिक देखा जा रहा है जिनकी डेस्क जॉब है, यानी कि जिनके दिन का 7-8 घंटे का समय ऑफिस में बैठे-बैठे निकल जाता है।

शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया है कि अन्य लोगों की तुलना में ऐसे लोगों में  स्ट्रोक या दिल का दौरा पड़ने की आशंका भी काफी अधिक होती है।

अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि निष्क्रिय जीवनशैली ने वैसे तो कई प्रकार की बीमारियों के जोखिम को बढ़ा दिया है पर इसमें भी हृदय रोग के मामले काफी अधिक देखे जा रहे हैं। ऑफिस जाने वाले सभी लोगों को इस खतरे को ध्यान में रखते हुए बचाव के उपाय करते रहने की आवश्यकता है। आपकी गड़बड़ जीवनशैली, हृदय की सेहत को गंभीरत रूप से प्रभावित कर रही है, इस खतरे को नजर अंदाज नहीं किया जाना चाहिए। आइए जानते हैं कि विशेषज्ञों ने इससे बचाव के लिए कौन से उपाय करने की सलाह दी है?
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निष्क्रिय जीवनशैली के कारण बढ़ते हृदय रोग - फोटो : istock
अध्ययन में क्या पता चला?

ऑफिस में डेस्क जॉब करने वाले लोगों में हृदय रोगों के बढ़ते जोखिमों को जानने के लिए चाइनीज एकेडमी ऑफ मेडिकल साइंसेज और पेकिंग यूनियन मेडिकल कॉलेज द्वारा एक अध्ययन किया गया। इसमें विशेषज्ञों ने पाया कि जिन कर्मचारी की नौकरी दिन में आठ-नौ घंटे डेस्क पर बैठे रहने वाली होती है उनमें दिल का दौरा या स्ट्रोक होने की आशंका 20% अधिक हो सकती है।

11 वर्षों के दौरान शोधकर्ताओं ने 21 देशों के 105,677 लोगों के रिकॉर्ड की जांच की। अध्ययन के अंत तक 6,200 से अधिक लोगों की मृत्यु हो गई, इसमें से 2,300 को दिल के दौरे पड़े, 3,000 स्ट्रोक और 700 लोगों को हार्ट फेलियर की समस्या हुई।
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कुर्सी पर लगातार बैठे रहने की आदत नुकसानदायक - फोटो : istock
लंबे समय तक बैठने की आदत के कई खतरे

अध्ययनकर्ताओं ने बताया कि लंबे समय तक बैठे रहने वाली आदत ने कई तरह की समस्याओं को बढ़ा दिया है। डेस्क पर बिताए जाने वाले समय को कम करके दिनचर्या में शारीरिक गतिविधियों को बढ़ाने से आपको बिल्कुल उसी तरह के लाभ मिल सकते हैं, जैसे सिगरेट छोड़ने से मिलता है।

भारत के नजरिए से भी यह काफी तेजी से बढ़ता हुआ खतरा है। दुनियाभर होने वाले हृदय रोगों के 60% मामले भारत से रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। हृदय रोगों के अलावा लंबे समय तक बैठने की आदत शारीरिक मुद्रा, मानसिक स्वास्थ्य और तनाव के स्तर को भी प्रभावित कर देती है।

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हार्ट अटैक-स्ट्रोक की बढ़ती समस्या - फोटो : pixaby
क्या कहता है अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन? 

हृदय रोगों के बढ़ते वैश्विक जोखिम को देखते हुए हाल ही में अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन ने इसे कम करने के उपाय के बारे में बताया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि ज्यादातर हृदय रोगियों में नींद की कमी के मामले सबसे कॉमन देखे जा रहे हैं। सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के साथ नींद की कमी के मामले आपमें हृदय संबंधी बीमारियों के जोखिम को कई गुना तक बढ़ा देते हैं। ऐसे में यदि हम सभी दैनिक व्यायाम और अच्छी नींद लेने पर ध्यान दे लें तो हृदय की समस्याओं के खतरे को काफी हद तक कम करने में मदद मिल सकती है। 
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हृदय को स्वस्थ रखने वाले उपाय करें - फोटो : iStock
क्या है विशेषज्ञों की सलाह?

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के विशेषज्ञों का कहना है कि नींद की गुणवत्ता और अवधि में सुधार करने के साथ दैनिक रूप से योग-व्यायाम की आदत बनाकर 80 प्रतिशत हृदय रोगों के मामलों को कम किया जा सकता है। जिन लोगों के दिन का ज्यादातर समय बैठे-बैठे निकल जाता है, उन्हें कुछ बातों का ध्यान रखना चाहिए।

थोड़ी-थोड़ी देर पर जगह से उठकर वॉक करते रहें। ब्रेक के दौरान साधारण स्ट्रेच करने और सीढ़ियों से चढ़ने उतरने की आदत बनाएं, इससे समस्याओं को कम करने में मदद मिल सकती है। हृदय रोगों के जोखिम को कम करने के लिए आहार का भी विशेष ध्यान रखें, अधिक वसा वाली चीजों से बचाव करें। छुट्टी के बाद रोजाना वॉक करने की आदत बनाए। सबसे जरूरी बात ऑफिस में जाने के लिए लिफ्ट की जगह सीढ़ियों पर चढ़ने की आदत डालें। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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