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अलर्ट: मीठी चीजों की ही तरह ये एक आदत भी डायबिटीज रोगियों के लिए हो सकती है नुकसानदायक, रहें सावधान

Wed, 30 Sep 2026 10:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ब्लड शुगर पर सिर्फ खाने का असर नहीं पड़ता। लगातार नींद की कमी शरीर की आंतरिक घड़ी और इंसुलिन के काम को प्रभावित कर सकती है। सीडीसी के अनुसार रोजाना 7 घंटे से कम की नींद टाइप-2 डायबिटीज के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है।
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
जब भी बात ब्लड शुगर को कंट्रोल करने की आती है तो सबसे पहले मिठाई, चीनी और कार्बोहाइड्रेट वाली चीजों की मात्रा कम करने की सलाह दी जाती है। लेकिन शरीर में शुगर का संतुलन सिर्फ खाने से तय नहीं होता। क्या आप जानते हैं कि नींद भी इसमें अहम भूमिका निभाती है?

अगर रात में लगातार कम नींद मिल रही है या सोने-जागने का समय रोज बदल रहा है, तो इसका असर शरीर के हार्मोन्स और अंदरूनी घड़ी पर पड़ सकता है। इससे इंसुलिन के काम करने का तरीका भी प्रभावित हो सकता है। इंसुलिन वह हार्मोन है जो खून में मौजूद ग्लूकोज को शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचाने में मदद करता है। जब शरीर इंसुलिन का सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाता, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है और ब्लड शुगर बढ़ सकता है।

शरीर को स्वस्थ रखना हो या ब्लड शुगर कंट्रोल करना, नींद सभी के लिए बहुत जरूरी है।
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नींद की कमी का असर - फोटो : Freepik.com
नींद की कमी से इंसुलिन पर असर

जब आपकी नींद लगातार कम होती है, तो शरीर की सामान्य हार्मोनल लय प्रभावित हो सकती है। इसका असर इंसुलिन और ब्लड शुगर के संतुलन पर भी पड़ सकता है।
 
  • नींद की कमी या रात में काम करने जैसी स्थिति में शरीर के हार्मोन्स में बदलाव हो सकता है। इससे इंसुलिन रेजिस्टेंस और ब्लड शुगर को नियंत्रित करना मुश्किल हो सकता है। 
  • रोज कम सोना सिर्फ थकान की वजह नहीं बनता, बल्कि शरीर के मेटाबॉलिज्म और हार्मोन्स पर भी असर डाल सकता है।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
कम सोने से डायबिटीज का खतरा?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि अगर आप एक रात भी अच्छी नींद नहीं लेते हैं तो इसका असर अगले दिन के कामकाज पर पड़ सकता है। वहीं लंबे समय तक नींद की रहने वाली समस्या आपके लिए गंभीर समस्याओं का कारण बन सकती है। अगर लगातार नींद पूरी नहीं हो रही है, तो इसका असर शरीर के शुगर कंट्रोल पर भी देखा जा सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रोजाना 7 घंटे से कम नींद लेना टाइप-2 डायबिटीज के जोखिमों को बढ़ाने वाला हो सकता है। इसलिए नींद को अपनी प्राथमिकता बनाना जरूरी है।
 
  • देर रात तक जागने की आदत कई बार खाने का समय भी बदल देती है। इससे भूख वाले हार्मोन्स में भी असंतुलन हो सकता है। 
  • रात में बार-बार कुछ खाना, देर से भारी भोजन करना या रोज अलग-अलग समय पर खाना ब्लड शुगर को कंट्रोल करना मुश्किल कर सकता है।
  • खासकर रात की शिफ्ट में काम करने वालों में सोने और खाने का समय बिगड़ जाता है। इससे आपकी मुश्किलें और भी बढ़ सकती हैं।
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अच्छी नींद सभी के लिए जरूरी - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज में नींद को भी दें जरूरी जगह

अगर आप डायबिटीज का शिकार हैं तो सिर्फ आहार और व्यायाम पर ध्यान देना काफी नहीं है। अच्छी नींद भी स्वस्थ दिनचर्या का हिस्सा होना चाहिए।

कोशिश करें कि रोज लगभग एक ही समय पर सोएं और जागें और शरीर को पर्याप्त नींद दें। अगर लगातार नींद की समस्या है या नींद पूरी करने के बावजूद दिनभर बहुत थकान रहती है, तो डॉक्टर से सलाहकार जरूर ले लें। डायबिटीज में खाने की प्लेट के साथ-साथ अपनी रात की नींद पर भी बहुत जरूरी है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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