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Heart Problem: सिर्फ नमक को ही मानते आ रहे हैं दिल का दुश्मन? असली खतरा तो यहां छिपा है, डॉक्टर ने किया सावधान

Thu, 06 Aug 2026 06:38 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ज्यादा चीनी खाने का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के मन में डायबिटीज का खतरा आता है। हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं ज्यादा शुगर शरीर में अतिरिक्त कैलोरी के रूप में जमा होने लगती है, जिससे वजन बढ़ता है और मोटापे का खतरा पैदा होता है।
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दिल की बीमारियों का बढ़ता जोखिम - फोटो : Amarujala.com/AI
हृदय रोग आज दुनिया के सामने सबसे बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक बन चुके हैं। पहले जहां दिल की बीमारियों को बढ़ती उम्र से जोड़कर देखा जाता था, वहीं अब कम उम्र के युवा और यहां तक कि किशोर भी इसकी चपेट में आ रहे हैं। भारत में भी हर साल बड़ी संख्या में लोग हार्ट अटैक, स्ट्रोक और अन्य हृदय संबंधी समस्याओं के कारण अस्पताल पहुंच रहे हैं।

आमतौर पर जब दिल की सेहत की बात होती है तो सबसे पहले नमक कम खाने की सलाह दी जाती है। हाई सोडियम हाई ब्लड प्रेशर का प्रमुख कारण माना जाता है। लेकिन स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ नमक ही नहीं, बल्कि रोजमर्रा की डाइट में छिपी अतिरिक्त चीनी भी दिल के लिए उतनी ही खतरनाक साबित हो सकती है।

सॉफ्ट ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, मिठाइयां, बेकरी और प्रोसेस्ड फूड में मौजूद 'ऐडेड शुगर' भी लंबे समय में आपके दिल का दुश्मन साबित हो सकती हैं।
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ज्यादा चीनी खाने के नुकसान - फोटो : Freepik.com
सिर्फ डायबिटीज नहीं, दिल भी होता है प्रभावित

ज्यादा चीनी खाने का नाम आते ही ज्यादातर लोगों के मन में डायबिटीज का खतरा आता है। हालांकि विशेषज्ञ बताते हैं कि चीनी का असर इससे कहीं खतरनाक हो सकता है।
 
  • जरूरत से ज्यादा शुगर शरीर में अतिरिक्त कैलोरी के रूप में जमा होने लगती है, जिससे वजन बढ़ता है और मोटापे का खतरा पैदा होता है।
  • मोटापा अपने आप में हाई ब्लड प्रेशर, टाइप-2 डायबिटीज और हृदय रोगों का बड़ा जोखिम कारक माना जाता है।
  • यही वजह है कि लंबे समय तक अधिक चीनी का सेवन दिल की बीमारियों के खतरे को काफी बढ़ाने वाला हो सकता है।
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हार्ट के लिए खतरे - फोटो : Adobe stock Images
कैसे होता है दिल को खतरा?

अध्ययनों के अनुसार, जब आप जरूरत से ज्यादा चीनी खाने लगते हैं तो इससे ट्राइग्लिसराइड्स बढ़ने का खतरा रहता है। इससे खून में बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ सकता है और गुड कोलेस्ट्रॉल का स्तर घटने लगता है।
 
  • ऐसी स्थिति में धमनियों के भीतर फैट जमा होने लगता है, जिससे रक्त प्रवाह प्रभावित होता है।
  • समय के साथ यह प्रक्रिया एथेरोस्क्लेरोसिस का कारण बन सकती है, जो हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर स्थितियों का जोखिम बढ़ाती है।

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बॉडी इंफ्लेमेशन का खतरा - फोटो : Adobe Stock Images
मीठी चीजें बढ़ा सकती हैं सूजन

विशेषज्ञ बताते हैं कि अधिक मात्रा में चीनी वाली चीजें खाने से शरीर में इंफ्लेमेशन की समस्या बढ़ सकती है। यह सूजन रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाती है और उनकी कार्यक्षमता को प्रभावित करती है। जब रक्त वाहिकाएं स्वस्थ तरीके से काम नहीं कर पातीं तो हृदय को पूरे शरीर में रक्त पहुंचाने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ती है। इससे भी हृदय की कार्यक्षमता पर भी असर पड़ सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, सिर्फ मिठाई खाने से ही चीनी अधिक होती है। कोल्ड ड्रिंक, पैकेट वाले फ्रूट जूस, एनर्जी ड्रिंक, केक-पेस्ट्री का नियमित सेवन भी धीरे-धीरे शरीर में अतिरिक्त शुगर की मात्रा बढ़ाता रहता है।
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हृदय रोगों के खतरे को जानिए - फोटो : adobestock
विशेषज्ञ क्या सलाह देते हैं?

वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. अमित पेंडारकर के अनुसार, दिल को स्वस्थ रखने के लिए केवल नमक कम करना पर्याप्त नहीं है। भोजन में अतिरिक्त चीनी की मात्रा भी सीमित रखना जरूरी है। लंबे समय तक अधिक चीनी खाने से कोरोनरी आर्टरी डिजीज और हार्ट फेलियर जैसी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

ज्यादा चीनी वाले पेय पदार्थ केवल हृदय को ही नुकसान नहीं पहुंचाते, बल्कि लिवर की सेहत पर भी असर डाल सकते हैं। इनमें मौजूद फ्रुक्टोज मुख्य रूप से लिवर में प्रोसेस होता है। जब लंबे समय तक इसकी मात्रा अधिक रहती है तो लिवर में फैट जमा होने लगता है, जिससे नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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