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Heart Health: हार्ट को हेल्दी रखने का जान लीजिए कारगर नुस्खा, आहार की ये एक चीज दूर कर देगी बड़ी टेंशन

Mon, 09 Feb 2026 08:50 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Dil Ko Kaise Majbut Karen: दिल की बीमारियों के मामले दुनियाभर में तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। सभी उम्र के लोग इसका शिकार हो रहे हैं। अगर आप भी दिल की सेहत को लेकर टेंशन में रहते हैं तो शोधकर्ताओं ने इसके लिए एक कारगर नुस्खा बताया है। डाइट में एक चीज को शामिल करना आपके लिए बहुत फायदेमंद हो सकता है।
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हृदय रोगों का खतरा कैसे कम करें? - फोटो : Freepik.com
दिल से जुड़ी बीमारियां अब सिर्फ बुजुर्गों की समस्या नहीं रह गई हैं, बच्चे और युवा भी इसका शिकार हो रहे हैं। हृदय रोग दुनियाभर में तेजी से बढ़ती समस्याओं में से एक है। खराब लाइफस्टाइल, शारीरिक गतिविधियों की कमी, बढ़ता मानसिक तनाव, धूम्रपान-शराब और असंतुलित खानपान इसके प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में होने वाली कुल मौतों में सबसे बड़ा कारण हृदय रोग हैं। भारत में भी हार्ट अटैक व हाई ब्लड प्रेशर के मामले तेजी से बढ़े हैं। खास बात यह है कि अब 30 से कम उम्र में भी लोगों को दिल से जुड़ी गंभीर समस्याएं होने लगी हैं, जो पहले अमूमन उम्रदराज लोगों को हुआ करती थीं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हृदय को स्वस्थ रखने के लिए खान-पान को ठीक रखना बहुत जरूरी है। ऐसी चीजें खाइए जो कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को कम करती हों। इसके लिए रोजाना कुछ प्रकार के नट्स-सीड्स का सेवन फायदेमंद हो सकता है। अलसी के बीज को अध्ययनों में हार्ट के लिए बहुत लाभदायक बताया गया है।
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अलसी के बीज खाने के फायदे - फोटो : freepik.com
अलसी के बीज का सेवन

अलसी के बीज या फ्लैक्ससीड्स स्वास्थ्य के लिए बेहद लाभकारी होते हैं। इनमें कई महत्वपूर्ण पोषक तत्व पाए जाते हैं जो विशेष रूप से दिल की सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं।
 
  • अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड का समृद्ध स्रोत होते हैं, यह फैटी एसिड हार्ट की धमनियों में जमा होने वाले प्लाक को कम करने में मदद करता है, जिससे धमनियों में ब्लॉकेज का खतरा कम हो जाता है और हार्ट अटैक और स्ट्रोक का आशंका कम होती है।
  • अलसी के बीज ओमेगा-3 फैटी एसिड, फाइबर और लिग्नान जैसे एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर होते हैं। ओमेगा-3 फैटी एसिड बैड कोलेस्ट्रॉल कम करने और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने में मदद करता है। 

एक दिन में 1-2 चम्मच अलसी के बीज का सेवन किया जा सकता है। अलसी के बीजों को पाउडर बनाकर पानी, स्मूदी या सलाद में मिलाकर भी खा सकते हैं। अलसी के बीजों का सेवन करते समय ध्यान रखें कि अधिक मात्रा में इसे न लें, क्योंकि इससे पेट में गैस और अपच की समस्या हो सकती है। 
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दिल को कैसे स्वस्थ रखा जाए? - फोटो : Freepik.com
कोलेस्ट्रॉल-ब्लड प्रेशर होता है कंट्रोल

अलसी के बीज में पाए जाने वाली फाइबर की उच्च मात्रा शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल को कम करती है। इसके अलावा इससे गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ावा भी मिलता है, जिससे हृदय के रोगों का खतरा कम होता है। कई अध्ययनों से पता चला है कि अलसी के बीज का सेवन उच्च रक्तचाप को नियंत्रित करने में सहायक होता है। उच्च रक्तचाप हार्ट के रोगों का एक बड़ा कारण है और अलसी के बीजों में मौजूद तत्व इसे नियंत्रित करने में मदद करते हैं।


ब्लड शुगर रहता है नियंत्रित

अलसी के बीज में घुलनशील फाइबर की मात्रा अधिक होती है, जो शुगर के अवशोषण को धीमा कर देती है। यह ब्लड शुगर लेवल को स्थिर बनाए रखने में मदद करता है और डायबिटीज के रोगियों में हृदय रोगों का खतरा कम करता है। डायबिटीज को हार्ट की समस्याओं का एक प्रमुख कारण होता है। इसके अलावा फाइबर की मात्रा पाचन तंत्र को ठीक रखने में भी मदद करती है।    
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वेट लॉस करने में अलसी फायदेमंद - फोटो : Adobe stock
वजन कंट्रोल करने में सहायक

वजन बढ़ने से हार्ट डिजीज का खतरा बढ़ जाता है, अलसी के बीज में उच्च मात्रा में फाइबर के कारण ये भूख को कम करता है और लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराता है। इससे वजन नियंत्रित करने में मदद मिलती है और हृदय के स्वास्थ्य में सुधार होता है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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