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जानना जरूरी: इस लाइफस्टाइल विकार को वैज्ञानिकों ने बताया 'हेल्थ-इमरजेंसी', इससे हार्ट-अटैक और कैंसर तक का खतरा

Mon, 27 Mar 2023 08:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मोटापे के कारण बढ़ता हृदय रोगों का खतरा - फोटो : istock
लाइफस्टाइल में गड़बड़ी को अध्ययनों में कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं के कारक के तौर पर बताया गया है। यह मोटापे जैसी स्वास्थ्य समस्या का कारण बनती है जिसे वैज्ञानिकों ने हेल्थ-एमरजेंसी के रूप में वर्गीकृत किया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, मोटापा सिर्फ एक कॉस्मेटिक समस्या नहीं है बल्कि इसे व्यापक चिकित्सा और स्वास्थ्य समस्या के तौर पर देखने की आवश्यकता है।

मोटापे के कारण कई ऐसी बीमारियों का जोखिम बढ़ता जा रहा है जो गंभीर और जानलेवा तक हो सकती हैं। अगर समय रहते इस जोखिम को नियंत्रित करने के प्रयास नहीं किए गए तो एक से दो दशकों में दुनिया की बड़ी आबादी गंभीर रोग के चपेट में आ सकती है।

बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआई) 30 या उससे अधिक होने की स्थिति को मोटापा माना जाता है। कई अध्ययनों में पाया गया है कि अगर मोटापे को कंट्रोल न किया जाए तो इसके कारण कई क्रोनिक समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है। दुनियाभर में मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक हृदय रोगों से लेकर कैंसर तक की जोखिम को इसके कारण बढ़ता हुआ देखा गया है।

आइए जानते हैं कि मोटापे की स्थिति कितनी खतरनाक हो सकती है और इससे बचाव के लिए क्या उपाय किए जाने चाहिए?
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मोटापा शरीर के लिए बहुत हानिकारक - फोटो : iStock
विशेषज्ञों ने किया अलर्ट

हार्वर्ड टीएच चेन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की रिपोर्ट में स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने वैश्विक स्तर पर बढ़ते मोटापे के जोखिमों को लेकर लोगों को अलर्ट किया है। यह समस्या सभी उम्र के लोगों के लिए चिंताकारक है, जिसपर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है। शरीर के वजन का 5 से 10 प्रतिशत तक भी कम करके भी कई प्रकार के स्वास्थ्य लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

अतिरिक्त वजन, विशेष रूप से मोटापा, प्रजनन और श्वसन विकारों से लेकर स्मृति और मनोदशा तक के लिए समस्याकारक स्थिति है। मोटापा के कारण मधुमेह, हृदय रोग और कुछ प्रकार के कैंसर जैसे घातक रोगों का खतरा भी बढ़ जाता है।
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हृदय रोगों का बढ़ता खतरा - फोटो : istock
मोटापे के कारण हृदय रोगों की समस्या

शरीर का वजन बढ़ना सीधे तौर पर विभिन्न हृदय संबंधी स्वास्थ्य जोखिमों को बढ़ाने वाला माना जाता है। बीएमआई बढ़ने के साथ ब्लड प्रेशर, लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन (एलडीएल या बैड) कोलेस्ट्रॉल, ट्राइग्लिसराइड्स, ब्लड शुगर और इंफ्लामेशन भी बढ़ने लगती है। ये स्थितियां कोरोनरी हार्ट डिजीज, स्ट्रोक और इनके कारण होने वाले मौत के खतरे को बढ़ा देती हैं। मोटापा ग्रस्त लोगों में हार्ट अटैक का खतरा कई गुना अधिक देखा गया है।

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अधिक वजन और डायबिटीज की समस्या - फोटो : istock
डायबिटीज और इसकी जटिलताएं

शोधकर्ताओं ने पाया कि मोटापे की स्थिति प्रीडायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज दोनों के विकास के जोखिमों को बढ़ाने वाली हो सकती है। अतिरिक्त बॉडी फैट, विशेष रूप से पेट के आसपास की फैट सूजन की समस्या को बढ़ाने वाली मानी जाती है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज हो सकता है। 
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मोटे लोगों में कैंसर का जोखिम - फोटो : iStock
कैंसर का भी बन सकता है कारण

वर्ल्ड कैंसर रिसर्च फंड और अमेरिकन इंस्टीट्यूट फॉर कैंसर रिसर्च के शोधकर्ताओं ने पाया कि मोटापाग्रस्त लोगों में कई प्रकार के कैंसर का खतरा अधिक हो सकता है। इसे अग्न्याशय और कोलन कैंसर के बढ़ते जोखिमों में से एक पाया गया है। अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि पेट के आसपास बढ़ी चर्बी की स्थिति कैंसर की गंभीर जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है, जिसपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता होती है।



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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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