कोरोना के साथ-साथ मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले देश के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। देश में मंगलवार तक कुल पांच लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुका है, जिसमें से तीन मामले केरल और दो दिल्ली से है। भारत में संक्रमण से पहले मौत की भी खबर है। वहीं वैश्विक स्तर पर देखें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार अबतक 80 देशों से मंकीपॉक्स के 21,000 से अधिक मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं।
भारत में संक्रमण से मौत के मामले के सामने आने के बाद से मंकीपॉक्स की गंभीरता और इससे होने वाले खतरे को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
देश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो अब तक रिपोर्ट किए जा रहे मामले, स्पेन में सामने आए सुपर-स्प्रेडर वायरस से संबंधित नहीं है, हालांकि इसके खतरे को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। भारत के पहले दो मंकीपॉक्स मामलों के सैंपल की जीनोमिक सीक्वेंसिंग से वायरस के A.2 स्ट्रेन का पता चला है, जबकि यूरोपीय प्रकोप B.1 के कारण हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से देश में इसका खतरा बढ़ता देखा जा रहे है, ऐसे में सभी लोगों को लगातार सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। मंकीपॉक्स के मामलों को हल्के में लेने की गलती किसी भी स्तर पर नहीं की जानी चाहिए।