फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MonkeyPox: कितना घातक है यह संक्रमण? विशेषज्ञों की चेतावनी- लंबे समय तक जारी रह सकता है प्रकोप, रहें सावधान

Tue, 02 Aug 2022 03:51 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला. नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
मंकीपॉक्स का बढ़ता वैश्विक खतरा - फोटो : istock
कोरोना के साथ-साथ मंकीपॉक्स संक्रमण के मामले देश के लिए चिंता का कारण बने हुए हैं। देश में मंगलवार तक कुल पांच लोगों में संक्रमण की पुष्टि हो चुका है, जिसमें से तीन मामले केरल और दो दिल्ली से है। भारत में संक्रमण से पहले मौत की भी खबर है। वहीं वैश्विक स्तर पर देखें तो विश्व स्वास्थ्य संगठन के आंकड़ों के अनुसार अबतक 80 देशों से मंकीपॉक्स के 21,000 से अधिक मामले रिपोर्ट किए जा चुके हैं।

भारत में संक्रमण से मौत के मामले के सामने आने के बाद से मंकीपॉक्स की गंभीरता और इससे होने वाले खतरे को लेकर भी सवाल उठने शुरू हो गए हैं।

देश के स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि वैसे तो अब तक रिपोर्ट किए जा रहे मामले, स्पेन में सामने आए सुपर-स्प्रेडर वायरस से संबंधित नहीं है, हालांकि इसके खतरे को भी अनदेखा नहीं किया जा सकता है। भारत के पहले दो मंकीपॉक्स मामलों के सैंपल की जीनोमिक सीक्वेंसिंग से वायरस के A.2 स्ट्रेन का पता चला है, जबकि यूरोपीय प्रकोप B.1 के कारण हुआ है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि जिस तरह से देश में इसका खतरा बढ़ता देखा जा रहे है, ऐसे में सभी लोगों को लगातार सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। मंकीपॉक्स के मामलों को हल्के में लेने की गलती किसी भी स्तर पर नहीं की जानी चाहिए।
विज्ञापन

2 of 5
मंकीपॉक्स संक्रमण के खतरे को समझिए - फोटो : istock
लंबे समय तक रह सकता है यह संक्रमण

मंकीपॉक्स के मामलों को लेकर शोध कर रहे सीएसआईआर-इंस्टीट्यूट ऑफ जीनोमिक्स एंड इंटीग्रेटिव बायोलॉजी (आईजीआईबी), दिल्ली के वैज्ञानिकों ने इसे 'क्यूरियस केस' के तौर पर वर्णित किया है।  आईजीआईबी के डॉ विनोद सकारिया और उनकी टीम ने भी एक अवलोकन के आधार पर बताया कि मंकीपॉक्स संभवतः लंबे समय तक रहा है। हम मानव-मानव संचरण के एक अलग समूह को देख रहे हैं और संभवतः हम इससे वर्षों से अपरिचित रहे हैं। फिलहाल इसके खतरे को देखते हुए सभी लोगों को हर स्तर पर बचाव करते रहने की आवश्यकता है।
विज्ञापन

3 of 5
मंकीपॉक्स के खतरे से करें बचाव के उपाय - फोटो : istock
कितना खतरनाक हो सकता है यह संक्रमण?

मंकीपॉक्स को लेकर हुए तमाम अध्ययनों में इसे ज्यादा गंभीर नहीं माना जा रहा है, हालांकि पिछले दो महीनों में दुनियाभर में इसके संक्रमण के कारण दर्जनों मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। भारत में भी मंकीपॉक्स से संक्रमित एक व्यक्ति की मौत हो चुकी है। केरल की स्वास्थ्य मंत्री ने बताया कि जिस 22 वर्षीय युवक की मौत हुई है उसमें मंकीपॉक्स के कोई लक्षण नहीं थे। उसे इंसेफेलाइटिस और थकान के लक्षणों के साथ अस्पताल में भर्ती कराया गया था। मौत की उच्च-स्तरीय जांच की जा रही है क्योंकि मंकीपॉक्स की मृत्यु दर बहुत कम है। 

4 of 5
देश में मंकीपॉक्स का संक्रमण - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि देश में मंकीपॉक्स का संक्रमण संभवत: पहले से ही था लेकिन इसका पता नहीं चल पाया था। सीएमसी, वेल्लोर में सामुदायिक स्वास्थ्य विभाग के प्रोफेसर डॉ जैकब जॉन ने एक रिपोर्ट में कहा "मंकीपॉक्स की अब तक गंभीर स्थिति नहीं रही है, इसके अत्यधिक संचरित होने का भी खतरा कम ही है। हालांकि हमें इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि एक ही वायरस के अलग-अलग स्थानों में विभिन्न वैरिएंट्स के कारण इसकी संचरण क्षमता भी अधिक हो सकती है। इसे ध्यान में रखते हुए इससे निरंतर विशेष बचाव की आवश्यकता है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
मंकीपॉक्स संक्रमण से रहें सुरक्षित - फोटो : istock
कैसे करें इस खतरे से बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि चूंकि वायरस त्वचा से त्वचा के संपर्क के माध्यम से फैल सकता है, ऐसे में संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने से बचना चाहिए। इसके लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना अच्छा विकल्प हो सकता है। उन जगहों पर जाने से बचें जहां पर इसका प्रकोप अधिक है। संक्रमित व्यक्ति द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली चीजों जैसे बिस्तर, कपड़े और तौलिए जैसी संभावित दूषित वस्तुओं को प्रयोग में न लाएं, इससे भी संक्रमण होने का खतरा हो सकता है। अपने हाथों को बार-बार साबुन और पानी से धोना सुनिश्चित करें, इससे संक्रमण के प्रसार को रोकने में मदद मिल सकती है।


---------------
स्रोत और संदर्भ
symptoms of monkeypox

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें